पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४६२

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पानतिन न मिन्न निरपेक्ष मापसे उत्पन्न हुई है। दोनों बहुतेरे संस्टस शान ले हैं। पुरउ प्राचीन मपिपोंके माम यादानुपाद चल रहा है। अभी तक कुछ भी द्वारा उन्मापित चिन्तापरतिका अनुसरण कर पदार्श- निपटेगा नहीं हुआ। ! निक तत्वों में बहुत मशोंमें हिन्दूमापापन्न हो रहे हैं। भारा मोर सम्मना। उनका भविष्य परिव किस प्रकार गठित होगा, कौन भागका प्राधान्य ज्ञातीय चरित्र किस तरह परि- : कह सकता है ! शानफे उज्यलालोकसे भार्यपि द्वारा यसित हुमा, पद चिन्ताशील मानयतत्ययितु पण्डित प्रवर्तित चिन्तामार्ग तथा दिन दर्शनके भयलम्पिक एक. स्थिर कर गये हैं। जिन सय राजनैतिक कारणों को ही यदि सभ्यतागायत पाश्चात्य जातिफे निकर जातीय चरित परिवर्तन होता है उसका भाग दो प्रधान यथार्थ समझा जाय, तो प्रतीच्य विद्वत्समास प्राय - भन्न है। पशि भाषा ही विरतारानि विधमान है। भायफे प्रभावको गतिमाम नहीं कर सकते । मापाशिक्षा. भाग मध्यपनके समप यह मय भायराशि जातीय चरित्र से जातीय चरिखमें कितना परिवर्तन होता है यह में प्रयेग कर विशेष परियर्तन उपस्थित करती है। इसके पाठकोंसे छिपा नहीं है। भूरिभूरि हटान्स मोजद है। जय लेटिन भाषाने युरोप. सभ्यताका विकास भौर परिपुरि। .. में अपना प्रमाय विस्तर किया था, तब सारा यूरोप' असभ्यायल्याने मनुष्य जिस दिन परतिके यया. इटालीके मायसे भर गया था। जय एक जाति दुसरो, चारसे भात्मरक्षा करने के लिपे गिरिगहरीर पक्षकोटर. जातिका गाय प्रहण करने लगता है, तब उसके साथ में छिप रहते थे उस दिनसे सम्पतालोकित २०यो' साथ अपने भाय करनेवाले पापों को अपनो शादी मनुष्यों के भतुल रेश्ययको पालोपना फरमेसे अपनी माग समेट लेती है। जब फारसो जातिफा विस्मित होना रहता है। मगरेज ज्ञातिका इतिहास मामायमूर्य मा गगनमें विद्यमान था, तब उनको अक्षर अक्षरमें इस यापपको पोषकता गो प्रमाणित विपनाका हिन्दुस्थानसे पटलाष्टिकके किनारे तक करता है। जो दो हजार वर्ष पहले रोम लापर फहरा रही थी। सब सभी गापा भादरफे साथ , दास थे साज ये अधिकांश स्थानीय रामराजेश्वर है। फारमी मागसे शब्द संप्रद पारने यझी हुई थी। यह उन लोगोको विजय जन्ती समान भाप फहरा रही माफे शैशय रोग फारसी भापको लिवापर भाज, है। मिनफे देशमै सूप छमहीने में मो माया दर्शन दिले भी मौजद मीर जातोय चरिग पर यायनिक भायका माज घे उनके अधिएस राज्य मस्त तक मी गहों होते। मायमन गदी दुगा है, यह कौन फदमकता है। उन लोगोंका . इतिहास पढ़ना और सम्पनाका दाक्षिणात्यको दायिती भाषा संस्टम भाषाको शब्द इतिहास पढना दोनों समान है। जो एक समय सम्पणिय ममलन हुई । इमोनिये सामील मागम एम | असम्म गाममे फलंक्ति थे, माज उनपे पंशपरगण समय संस्स्सका बहुत माग पुरा गया है। इस समय विधाताको भी टिकार्यमें माम बालागेको कोशित भारशी भाप अनुशीलन प्रादुर्भागसे भाषा, साहित्य, करते हैं। ये मानो तपस्पालाप भाषपलगे बलिष्ठ ममा, शाति मीर परिवो शो मा पाश्यारपभाष घुम हो कर भभिमान-दाय विश्वामिनको उरय जगत, नगन ग.मानपतस्या गिरतामील प्पनियों का पड गिता एटिका गुसपात करने मप्रसर दु मसर विषयों करा दिया। पंगल गारनीय ही पों, सारे गा को पालोचना करने से साफ सा मालूम होता कि सो समापने मतादरे पिजागोप भाग भोर गापा अनुपको सम्यताका पारापादिक विदास पारा मेघनी हानी शादिशानियां जातीय नरियों को माय सम्पताही सोपानररिपरी और fram विस्तार पर रही . मा गिक्षा हो उसका मूल कारण उन्नतिगाल ममातन निपा परिपतित दो दोनो I कि अमंग मादि मिशित पारयारय जाति मनुष्य पर दिन सम्ल मा रोधिमा मदी मानना था, TAPानोपनमें परतिर दो कर गाताप गमिधाम | मुगपालम्प पनाम का होगा ऐगा पा माल पर