पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


- मसूद ३य (सुलतान) ४३ मसूदसे कहा, 'महाशय ! च्या दुसरेका राज्य नष्ट करना । मसद रणक्षेत्र नहीं छोड़ा, परन् और मो दूने उत्साह ..आप जैसा धर्मशील व्यक्तिके लिये उचित है। इसके से रणक्षेत्र में घूम घूम फर अपनो सेनाको उत्सादित लिये भापको अन्तमें पश्चात्ताप करना होगा।' मसूदने । फरने लगे। भाजका युद्ध बंद हो गया। दूसरे दिन उत्तर दिया, 'समी ईभ्यरका राज्य है, ये जिस पर प्रसन फिर सयेरेसे युद्ध शुरू हुमा, दोनों पक्षको असंख्य सेना रहते हैं उसीको राज्यका अधिकारी बनाते हैं। विधौं । यमपुर जाने लगो। महीपाल और प्रीपाल विशेष परा. काफिरोंको मुसलमानी धममें दीक्षित करना हमारा कम दिखा कर मृत्युमुखमें पतित हुए । दिल्लीका सिंहा- एकान्त फर्तव्य है। यदि ये मुसलमानी-धर्म माननेको सन मसूदफे हाथ लगा। राजी नहीं, तो निश्चय हो उन्हें यमपुरका द्वार देखना। दिल्लीको जीत कर मसूद मीरट गपे। मोरटफे • होगा। इतना कह कर उन्होंने मूल्यवान् यत्रादि पारित राजाने उनके बलवियमको पात सुन कर पहले दो अपी. तोषिक दे दूतोंको विदा किया। नता स्वीकार कर लो थी। मसद सन्तुष्ट हो उन्हें दूतोंके विदा होते न होते मसूदने मीर हुसेन अरब, । सराज्यमें प्रतिष्ठित फरफे कान्यकुरजको और पढ़े। समोर वाजिद जाफर, अमीर तर्कान, अमीर नाकी, इसके पहले सुलतान महमूदने जय राय जयपालको अमीर फिरोज और मराव मल्क अहमदको पहुसंख्यक कान्यकुब्जके सिंहासन परसे उतार दिया, तय सलार अश्वारोही सेनाके साथ अनङ्गपाल पर चढ़ाई करने मसदने हो उन्हें फिरसे विठाया था। इस कारण मसूद- भेजा । अनङ्गपाल अपनी सेना, जो बिलकुल का मागमन सुन कर जयपालने नाना प्रकारको उपदोकन तैयार थी, ले कर रणक्षेत्र में उतर पड़े। तीन घटे तक भेज उनको गम्यर्थना की। इसके बाद जयपालसे मिल दोनोंमें तुमुल संग्राम चलता रक्षा । धर्मयोद्धाओं मेंसे कर मसूद छत्रकी ओर रवाना हुए। याहुतेरे यमपुरको सिधारे। असंख्य हिन्दू इस युद्धौ छन इस समय भारतवर्षफे मध्य एफ उन्नतिशील मारे गये । आखिर अनङ्गपालने कोई उपाय न देख मात्म- नगर था तथा हिन्दुओं का एक पवित्र स्थान समझा समर्पण किया। जाता था। मसद यहाँ पर डावनी डाल कर चारा यहांसे मसूदने दिल्लीको याला कर दी। इस समय | ओर सेना भेजने लगे। सलार शैफुदीन और मियान दिल्लोके सिंहासन पर राय महीपाल अधिरूढ़ थे। राजय यहराइच जोतनेको गये। यहां उन्होंने जय देसा उनके पास युद्धोपयोगी हायो और काको सेना थी। इस! किसानेको कोई चीज नहीं मिलती जिससे दलबल कारण वे निर्भय हो कर मसूदके भागमनको प्रतीक्षा समेत रहना विलकुल असम्मय है, तय मसूदको इसकी करते थे। प्रबल प्रतापशाली मसूदकी सेना जय दिल्ली। स्पयर दी। मसद यह ग्यर पा कर यहां जमोदारोगा पहुंची तब महोपाल उन्हें रोकनेको चेला करने लगे। षिकार्यमें उन्नति करने के लिये उत्साहित करने लगे। दोनों पक्षको सेना दूर दूर में रहती थो सही, पर युवक इसके लिये उन्होंने स्थानीय प्रजाको फसलका दाम घोरपुरुषगण प्रति दिन मलयुद्ध पलाने लगे। इस पेशगी दे दिया था। तरह एक महीना बीत गया। मसूद भयमौत हो कर अनन्तर मसूदने सुलतानुस सलाती और मोर खुदाको याद करने लगे। इसी बीच उन्हें पथर मिली। चनतियारको दक्षिण मारतय भेला । जाने समय कद कि गजनीसे पांच अमीर दलवल समेत उनको सदापता दिया था, फिर तुम लोगों की रक्षा करेंगे। यदि फोi में आ रहे हैं। महोपाल शन सेनाको वृद्धि देश हताश काफिर इसलामधर्म ग्रहण करे तो उस पर दया दिन. हो पड़े। थप दोनों पक्षको सेनामें पुन: युद्ध चलने लाना, नहीं तो नलबारसे उनका गिर फार मालना। लगा। मसूदको सरीफ उल-मुलकके साथ यातचीत करते एक दिन माणिकपुर मार काराके राजाने बदुमन्य 37. देव महोपाल पुत्र गोपालने उन्हें ऐसी गदा जमायो । दोशन के साथ पुछ दून मसूदणे निकट भेजे। ताने मा कि उनके दो दांत टूट गये। भीषण आघात पा फर भी को मेंट देकर निवेदन किया कि चंगपरमगारा दम लोग