पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५१

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मरिकारीड़िका-पस्कट "थेनुस्तन्यमरिका नराणाश्च ममूरिका । मसूसना ( हिं० कि०) १ बल देना, ऐंठना। २ निचो- तजानं बाहुमूलाम शस्त्रान्तेन गृहीतवान् । हुना, बल देना । ३ फिसी मनोधैगफा रोकना, जप्त ..... , पाहुमूले च शस्त्राणि रक्कोत्पत्तिकराणि च । करना। ४ मन हो मग रंज करणा, पुढ़ना। __.. . तजम्न रक्तमिलित स्फोटकज्यरसम्भवम् ॥" मसूण ( स० त्रि०) मरणेति दीप्यते इति णु दीप्ती (धन्वन्तरिकृत शायनेय अन्य ) | इगुपधेति क, प्रपोदरादित्यात् साधुः। जो कप्पा या गोके स्तनमें और मनुष्यफे हायमें जो शीतला निकल का न हो, चिकना और मुलायम। आती हैं, उनके मवादको किसी नोकदार अनके अग्न | मसृणा (सं० सी० ) मसणा-रित्रयां सराप । उमा, भाग पर उठा लेना होगा। पीछे जिसको टोका देनो अलसी । • होगी, उसको पाहुके मूल में छोटा छेद कर यह मवाद मसोढ़ा (दि० पु०) १ सोना चांदी आदि गलानेकी . उसके रक्त में मिला देना होगा। पीछे उसको ज्वर तथा परिया। २ मसूदा देखो। ' शीतला निकल मायेगी। यह आप ही आप नीरोग हो ' मसोसना ( दि० कि० ) मगगना देखो। • जाता है। फिर इस समय बड़ी पवित्रताके साथ रहना मसौदा (अ० पु.) १ काट छांट करने, दोदराने और पड़ता है। किसी तरहके अछूतको स्पर्श नहीं करना साफ करनेके उद्देशसे पहली पार लिखा हुआ लेख, मस. चाहिये। ऐसा होनेसे रोग बढ़ सकता है। विदा। २ उपाय, युक्ति। ३मसहरी यानो मच्छरों से बाण पानेको सामग्री। मसौदेवाज (म० पु०) १ वह जो अच्छा उपाय निकालता . . "दंशारच गशकारचेच पाकाले निवारयेत् । | हो, अच्छी युक्ति सोचनेयाला। २ धूर्त, चालाक। मसरिफामिः प्रावृत्य मवशापिनमच्युतम् ॥ मरपाट-अरवदेशके समुदतोरयत्ती एक यन्दर । यह (पद्मपुराण क्रियायोगसार १२ अ.) इस रोगका विस्तृत . अक्षा० २३४८ उ० तथा देशा० ५८ ४० पु०फे मध्य विवरा मसन्त शब्दमें देखो। अवस्थित है। दक्षिण और पश्चिममे अंची भूमि तथा मसूरिफापीडिका ( स० स्त्री० ) एक प्रकारको माता या पूर्वमें एक द्वीप रहनेले यह वन्दर पहुत निरापद है। चेचक । इसमें मसूरको दालके यरावर छोटे छोटे दाने वाणिज्यपोत निरापदसे इसके उत्तरमे भीतर प्रवेश कर . निकलते हैं। सकता है। नगरके चारों कोनमें चार दुर्ग हैं। सदर मसूरी (सस्त्री०) मसूर-स्त्रियां डोप। १ मसूरिका, ! में जितने मकान है, घे सभी एक बनके है, सिर्फ पुन. माता, चेचक । २ वियत्, नितोथ। २ रक्त वित्त, गालोंके बड़े बड़े पत्थरफ मकान दिग्नाई देते हैं। ये . लाल निसोध । सब मकान पारस्य सागरको रेतीली जमीन पर बने दुप मसूरी (हिं० पु० ) सिमले, सिकम और भूटान आदिमें ! हैं। नगरका जल एक बड़े नालेसे निकलता है। बन्दर- मिलनेवाला एक पृक्ष । यह कदमै छोटा होता है और में बड़े बड़े जहाजो के लंगर दालनेके लिये काफी प्रतिवर्ष शिशिर ऋतुमें इसके पत्ते झड़ जाते है। इस जगद है। को लफड़ी सफेद, पढ़िया और बहुत मजबूत होती है। यह नगर मरवयालोंके व्यवसाय-याणिज्यका एक 'इससे सन्दुक तथा सजावटके अनेक प्रकारके सामान ! प्रधान स्थान है। यहांसे भारतरर्प, मुमाना, मलय. बनाम जाते हैं। उपतीप, लोहितसागर, अफ्रिका मादि देशों के साथ मसूल (अ० पु०) महयूल देखो। पाणिज्य चलता है। अंगरेज और फरासी सौदागर ममूला (हि.पु.) एक प्रकारको पतलो लम्बी नाव। । पारस्प-उपसागरमें पाणिज्य करने ममय सो पंदरम मसूस (हिं० सी०) मन मसोसनेका भाय, फलपना। माल रोद कर दे जाते थे। भलावा दरावे. पारम्पदेश- मसूसन (हिं० खो०) आन्तरिक व्यथा, मन ममूसनेका के तथा भरवदेशके अन्यान्य बन्द के साथ यहांका जोरों भाव। . . . . . | याणिज्य चलता है।