पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५२२

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६६ पारीचपत्रक-गारीची वम्मपुत्र सुन्दके औरस ताड़का राक्षसीके गर्भसे इसका! सूर्ये पीतनाकार ध्यात्वा तद्विनिर्गतरश्मिनिवहराकाशे समा. जन्म हुआ। मारीचने सीताहरणके समय मायारूप कृत्य भगवतीमग्रतः स्थापयेत् ।-गौरी विमुखी प्रिनेत्रामष्टभुजा , धारण कर रामचन्द्रको मोहित किया था । पोछे राम- रक्तदक्षिणमुखी नीलविकृतवामवराहमुखी, वनाझ शशरसचीधारि- चन्द्र द्वारा मारा गया । (रामायण) राम देखो । २ कश्यप दक्षिणकरामुशोकपल्लवचापसत्रतर्जनीघरवामचतुःकरां वैरोचन ३ ककोलक, कंकोल । ४ याजक ब्राह्मण, पुरोहित ।। मुकुटिनी नानाभरणवती चैत्यगर्भस्थिता रक्ताम्बरफन्चुकोत्तरीयां ५ राजदस्तो, राजहाथो । ६ मरीचयन, गोलमिर्चका पेड़। सप्तशुकररथारुहा प्रत्यलोदपदा पंकारजवायुमपहले इंकारजचन्द्र- (त्रि०) ७ मरीचसम्बन्धीय, मरीनका। . सर्यग्राहिमहोग्रराहुसमधिष्ठितरथमध्या देवीचतुष्टयपरिवृतो तत्र मारोचपत्रक (सं० पु० ) सरलवृक्ष, चोड़का पेड़। . पूर्वादिशि बत्ताप्ली रक्ता वराहमुखी चतुर्भुना सन्यकुशधारि- मारीचपत्रिका (सं० स्त्री० ) सरल देवदारु, सर्जतरु । दक्षिणहस्तो पाशाशोकधारियामहस्ता रक्तकञ्च किञ्चति । तथा मारोचवल्ली (सं० स्त्रो०) मरिच वृक्ष, मिर्चका पेड़। दक्षिणे अदाली पीतसशाकसूचीवामदक्षिणभुजां वज्रपाशदक्षिण- मारीची (सं० स्त्रिी०) मरोचेरियं इत्यण डोप । एक प्रकारकं देवता। ये मायादेवी हैं । पर्याय-निमुखा, वज्र | वामकर्रा कुमारीरूपिणी नवयौवनालङ्कायती । तथा पश्चिमे पराजी कालिका, विकटा, वज्रवाराही, गौरी, प्रोत्रिरथा। शुक्लो यनसूचीबद्दक्षिणभुर्जा पाशाशोकधरवामकरी प्रत्यासीदपदी साधनमालातन्त्र में मारोचीका जो विवरण लिखा है, सरूपिणींचेति । तथोत्तरदिग भागे यराहमुखी रक्तात्रिनयनां चतुर्मुज वह इस तरह है- वज्रारबद्दक्षिणकरां चापाशोकधरवामकरा दिव्यरूपिणी ध्यात्वा ॥" . .. मारीची देवी। "यह गौर वर्णकी है। इनके नीन मुप्प, तीन आंखें लाल वर्णका है और बायां नीला है। यय-फरोको और आठ भुजाएं हैं। इनके मुंहका दाहिना भाग | तरह तिरछी 'हो है। इनके दाहिने हाथों में यम, . - - . -- LE