पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५३

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मस्तिष्क पप - "यम शीर्पययं मस्तिष्काजियाया वि लागि वे" यास्वादमें अन्तर, स्पर्श शक्तिको वृद्धि (Hyperacs. (ऋक् १०११६३१) thesia) और फमो (Annesthesin ) और मिन. - मस्तकके अभ्यन्तरका स्नेहयत् पदार्थ मस्तिष्क है। प्रत्र. मिनी ( Numbness ), मुड़मुड़ ( Tickling) चुन- लित शब्दोम इसको हो मस्तिष्कका घी. मगज या दिमाग चुनाना, ( Itching ), चोंटी रेंगनेकी तरहफा ( For- कहते हैं। हम लोग जो नित्य आदार करते हैं, पारस्थली mication , स्पर्शानुभव, छेदनेको तरदको यन्त्रणा मेंपरिपक्व हो कर उसका कुछ अज्ञ रस बन जाता है। (Pricking ) आदि स्पशशक्तिका व्यतिनम ( Parack- फमसे यह रस शुक और रक रूपमें परिणत हो जाता' thesis ) दिवाई देता है। सिया इसके मांसपेशियोंको है और शरीरको पुष्ट करना है। यह वीर्य ऊदंगामी हो। गतिविधिमें और भी कई तरहफे परिवर्तन दिखाई देते 'फर अंतड़ियों द्वारा मस्तिष्कमें जाता है और मनुष्यको हैं,-(१) सामान्य स्पन्दन ( Twitching या Sutr स्मृति और धृतिशक्तिको बढ़ाता है। किन्तु अनिय- suitse 3 endinuin ), (२) फम्पन ( Themor ), (३) मित योयक्षय होनेसे शरीरको पल हानि और मस्तिष्क- हृढ़ता ( Regidity ), (४) माक्षेप ( Spasms ), (५) फे शक्तियोंका ह्रास होते देखा जाता है। इसीसे साधु गुरुतर आक्षेप ( onvulsions ) और (६) अयशान पुरुप तथा संन्यासियों को प्रतिशक्तिको पृद्धि तथा चञ्चल ( Paralsss ) | इन सब स्नायविक पीडाभौम विजली- स्वभावयाले युवकों के मैथुनादि दोपसे उत्तः शक्तिका को चिकित्सा विशेष उपकारो है। जदा मांसपेशी हास होता दिखाई देता है। भवश हो गई हो, यहां विरामयुक्त स्रोत (Magncto- मेरुदण्ड और उससे लगी मोटी शिराका मस्तिष्क- electric) और कमी रहने पर अविरामनीत (IPoltaic) से घनिष्ट सम्यन्य है। यही शुक्र या घीर्यप्रयाही शिरा फो व्यवस्था की जा सकती है। मपिरामनोत बारा 'कहलाती है। इसीसे मस्तिष्कको सभो पीड़ा। क्षययुक्त पेशीको पुष्टि होती है। स्नायुमण्डल और या परावियां मेगदण्डकी समाश्रिता कही जाती है। पेशियोको पीड़ा शान्त फरनेफेलिपे जिन भावधियोंका मस्तिष्क और मेरुदण्डकी पीड़ाओं और खराबियों को प्रयोग किया जाता है, ये नीचे लिखी जाती हैं। मालूम करनेसे पहले कई नार्मोको जान लेना आवश्यक (१) मस्तिकाको उत्तेजना देनेवाली औषधियां- है। मस्तिष्कमें अस्वच्छन्दता या परवशता उत्पन्न होने : मदिरा, अफोम, इत्थर, झोरोफारम,घरस, काफी कोको, पर प्रमानुसार भारीपन, ( Heasiness ) स्पन्दन येलेडोना, तान्नकट, अथर्पण, हाउसाइमस, कपूर और Throbbing), उत्ताप ( llent ) चार ( vertigo) विजलीका स्नोत्र आदि। • मेरुदण्डकी जलन ( Burning) भोर खिंचाव (Tight: ness ) मालूम होने लगता है। (२) मस्तिष्कको अवसादक भीषधि,-अफीम,

मस्तिष्ककी मियामें खरायी उत्पन्न होनेसे या कोई

। मर्फिया, लोराल हाडास, विउदिल कोरल, मदिरा, .. परिवर्तन होनेसे गोंदका न आना (Insomnia ), . इत्थर, लोरोफारम, चरस, येलेशेना, पदोपिया, इप, लेटिउस, हाउसाइमस, सल्फोलेन, प्रमिडिया आदि। • प्रलाप यानी अकारण वफ यक बोलना ( Delitiun ), निद्रायेश ( Stupor ) और जड़ता (Cona ) आदि। (३) स्नायुशलमें-जेलमिमियम, फेनाजोन् मौर दुर्लक्षण दिखाई देने लगता है। सिया इमफे इसको . पगजल जाइन टायसादकः दोनेसे व्ययहत होता है। 'पोडासे कई इन्द्रियों को भी विफलता उठ पढ़ी होनी है।। मजाफी पीड़ा धोकनिया और गपसमिका उत्तेजक "जैसे मांखोंसे अग्निशिखा (Flushes )-का निकलना, रुपमै भीर प्रमाइटस, पराल हार स, दारिपनिक आँखोंके सामने विविध वस्तुका माना जाना ( Muscae | पसिष्ठ, कर. माटेद भाफ एमाइल, अफीम, मरिया, Tolitnutes ) दिखाई देना, कानोंके भीतर कई तरहफे। फैटेयरपिन, फोनापम, मारकोटाइन् भार करा मादि . शम्दों ( Tinnitus surium) का सुनाई देना, मिहाफ ' भी अरसादक. काही जाती हैं।