पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५३८

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पारिगन्यिका-माण्ड गाण्ड मिश्र कला स माainiममा मनु था। " ममा ' इत्यश्च । मुन्नपणी वनमूग। पादूसरे पुत्रका माग शनिश्गर गौर नया मारिपाद (म० पु. भावभेद, एक प्रकारका बुरे था। राजा सम्परणको साग तापती म्यादी गई लक्षणयाला घोड़ा। जिम घोहे के खुर उसके शरीरके , इस प्रकार कुछ पिन योग । गीर जप रंग रोसा न हो कर दूसरे रंगका हो उसीका नाम मारिमा को यह रहस्य माग हो गया रामा पाद है। ऐसे घोड़े का व्यवहार नहीं करना चाहिये, नो विगड़े और उनी राम nिi फरनेसे अमङ्गल होता है। , अपक्ष विश्वकर्मान गायिघि सरकार पर काम .. माजारि (म पु० ) पुराणानुसार मगधरान महदेयके ' माक्षिक, प्रनर रोजको गह ग ग कारण ठार...' पुर। मार्कण्डेया ही है। संज्ञा तुम्हारी मागीय मागितापो माांगे ( संत्री० ) मार्टि शोधपति फेगादिकमनया , दानघोंने दे नई उसे पानेको रातो, it imm. मृज आरन् बियां टोप। १ करनृरी। २ जन्तुविशेष कार जमार, घटायो । पाटामी। पर्याय--पूनिया, पनिरुज, गन्धलिका। . भगवान में योगीकार Tarfarai . ( राजनि०) । भास्करदेव मागडको भूमियम आरोपित कर .. गाजारीटोड़ी (हि० ग्वी०) सम्पूर्ण जातिको एक रागिनो।' स्थित हुए. घटाने लगे। म प्रकार का रोग यिama इसमें सब कोमल वर लगते हैं।

धोलो, 'देव, गया r गरीर पक्षा कनीय दिनाई

माजांरीय (संपु०)माांग्स्यायं मानार ( गदादिभ्यश्च ।। और यज्ञमा टनका तेज यिनिया गया था। पा ११३८ ) इति छ। विड़ाल, बिल्ली । २ शूद्र। जिससे देव मागमे विधान पिका पा. फायशोधन, शरीरका परिष्कार करना। हो वह उपा, कुवाको मिगिका (पालकी ), यमका दाट । मार्जाल । मं० पु० ) मार्जाररलयोरेकत्वात् रस्य ल।। के प्रति मार, विद्धाल। नएको नानि ना। (गा गयपु० १०५.२.०० र उत्पन्न हो । मार्जालोय (मं० पु०) मृज (स्थाचतिम गलन यामशालीयचः।' इतना कह या और . उग्ण ११११५ ) इति मालीयन् । १ विडाल. मिली। " गण्ड-काश्माग्यो अनर्गत काश्मीकी . २ शूद। ३ कायगोधन, शरीरका परिकार करना। तपस्या कर . पानी इसलामायादगं , ira पूमि । ४महादेव। नामक कराचीन पुण्यम्यान, यहाँका मन्दिर ... "नाटामाय सर्वाय मोडुप शुभपाये । समाहितसा मुन्दर मन्दिर भाग्नयों और कहीं भी पिनाहगोप्ने माय माजानीयाय गेगस ॥" उस दिय। मध नियनैपुण्य देख कर यहां जितने ... .. (भारत ३।३६।२७) प्रतिफन हो दिन आये, ममा मुन काठमें इसका प्र ५ पुराणानुमार एक ऋषिका नाम । इसका इमरा नाम मालोय भी है। इस गर्भाएट गन्य-जगनकी अपूर्व अनील कोनियों में । मार्जित (म०वि०) माजेते मज-णिन् कर्मणि क्त । 'तुम यह जो प्रशन दे गये हैं। मूलमन्दिर किम ममय बनाया शोधित, स्वच्छ किया हुआ। नियां राप। २ रमाल, वं, यह यि किसाको मालूम नहीं है। .. एक प्रकारका साय पदार्थ । पदो, चोनी, शहद और मित्र दोनोंमें धात अनुसार दहुरे इस कामीर-पति रणदित्यको मादिको मिला कर और उममें कपूर डाल कर यह अदितिने ३ बहते हैं। फिर को कोई भारतविजयी . बताया जाता है। ग्मात देगे। उस गर्म मन्दिादिमाता दवाते हैं। माहोय ( म पु महामांगावापत्यः ( मरमानना विशिष्ट दे

दिदि

) इति गृहार अन् । गुराक उन्हें अन्न नलवानी पु)प्रमित ..... शनिशा गीतापस्य । में हम गाः नियो गुवाइन्हान अयूबमाण्य प्रणनय इनिधसालिमार और संस्कार