पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५४३

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पालदही-गालदेव गिरती थी। गौड़के उजड जाने पर वहाँके बहुतमे लोग क्रान्त राजा मारवाड़में और कोई भी नहीं हुए थे। संग्राम -मालदहमे आ कर बस गये। इस नगरमें पहले मुस- मिहके मरने पर मारवाड़में जो शोकरजनीका भाषिर्माय लमानों को ही प्रधानता थी। पीछे मुसलमानोंकी हुआ था, मालदेयके अप्रतिद्दत प्रमावसे राजस्थानका संख्या क्यों घट गई और हिन्दुओंकी बढ़ गई, वह ठीय. सौभाग्याकाश पुनः प्रभात-सूर्यको गण फिरणसे रञ्जिन ठीक. मालूम नहीं। माज भी घर बनाते समय न हो उठा। मुसलमान ऐतिहासिक फेरिस्ताने इन्हें राज. दिखाई देती है। पुराने मालदहकी क्रमशः अवगति पूताने में सबसे बढ़ कर परामामो राजा बतलाया है । होती जा रही है, जनसंख्या घट गई है, वाणिज्यको धी सिंहासन पर बैठते हो मालदेवने लोदियोंके अधिकृत वृद्धि नहीं है। नगर और अजमीढ़का पुनरुद्धार किया। १५४३०में ये नदीके उत्तरी किनारेसे पाण्डु आका उपनगर आरंभ सिन्धियोंसे झालोर, शिवोना तथा भद्रार्जुनको अपने हुआ है। मी मूल पाण्डु आ नगर ही जंगलोंसे ढका अधिकारमें लाये। इस प्रकार धीरे धीरे ४० प्रदेशोंको हुआ। उपनगगें अभी एक भी दिखाई नहीं देता। अपने बाहुवलसे जीत फर इन्होंने मारयाइराज्यको सीमा फिन्तु यहां पहले बहुतसे लोगोंका वास था, इसका अनुः को बहुत छ बढ़ा दिया। इन्होंने नाना प्रकारफे दुर्ग मान यहांकी बहुसंख्यक पुष्करिणी और इधर उधर पड़ी और अट्टालिका बना कर राजधानीको अलंयत किया ई टोकी ढेरसे किया जाता है । यहां मुसलमानों के आगमन- या। इन्होंने जोधपुरके चारों ओर दुर्भद्य उथ प्राचीर, के पहले बहुतसे हिन्दू राजा राज्य कर गये हैं। वीच योच प्रायः तीन लाख रुपया खर्च करके मैरताका मालकोट दुर्ग, में यहां देवनागर अक्षरमें विहित मुद्रामें पाई जाती है। भट्टिजातिको परास्त कर पोकर्ण में सुदृढ़ दुर्ग तथा भीम संथाललोग जब पहले पहल यहांके जंगलको परिकार लोह पर्वत पर दुर्ग बनवाया। फलतः इनके शासनकाल करते थे, तय इस तरहको बहुत सी मुद्राएं पाई जाती में जोधपुर उन्नतिकी चरमसीमा पर पहुंच गया था। थी। पाण्ड आके निकट राइहोराणी नामक एक देवी- शम्बर झीलके लवणको आयसे इनका खजाना हमेशा -का स्थान है जो अभी हिन्दूदेवी मानी जाती है। भरा रहता था। - . पहले यह नगर नाना शोधमालासे विभूषित था। १५४२ ई०. तक राज्यसीमाको पढ़ा कर मालदेव अभी यह भग्नस्तूप में परिणत हो कर भनोत गौरवका राज्यको रक्षामें लग गये। इस समय चारों ओर छोटे परिचय दे रहा है । पुरानी मस्जिद में जुम्माकी मसजिद, छोटे राजपूत दलपति स्वाधीन होनेकी चेष्टा कर रहे थे । आज भी विद्यमान है। १००४ हिजरीमें अकबर शाहके मालदेवने बड़े कौशलसे उन्हें प्राप्य अधिकार देकर ‘समय उक्त मसजिद बनाई गई थी। जुम्मा मसजिद शान्त किया था। बहुत प्राचीन नहीं होने पर भी प्राचीन उपकरणोंसे बनो उस समय हुमायू दिलीके यादशाह थे। किन्तु घोड़ हुई है। हिन्दुराजोंके बने मन्दिरका खोदित प्रस्तर ही दिनोंके अन्दर प्रादेशिक शासनकर्ता सेरशाहने • इसमें दिये गये हैं। हुमायूको भगा कर दिल्लीका सिंहासन अपनाया । तब मालदही (हिं० स्त्री०) १ एक प्रकारको नाय। इसमें राज्यच्युन-हुमायूने मालदेवसे सहायता मांगी। किन्तु माझी छप्परफे नीचे यैठ कर खेते हैं । २. एक प्रकारका, मालदेवने विश्वासघातकता द्वारा अपने नामको कलह- रेशमी डोरिया कपड़ा। यह कपड़ा पहले मालदहमें ! कालिमासे कलुषित कर दिया । वियानाने प्रसिद्ध युद्ध में बनता था और इसके लहंगे बनाये जाते थे। । इनके बड़े लड़के रायमल मारे गये।. किन्तु उस समय मालदार (फा० पु०) धनपान, धनो। मालदेवने ऐसा स्थानमें भी नहीं सोचा था, कि हुमायूं के मालदेव-जोधपुरके एक प्रसिद्ध राजा ! मारवाड़ देखो। ये भावी वंशधर अफयर भारतके राजराज्येभ्यर होंगे। , राठोर-शके उपायल सूर्य स्वरूप थे । १५३२.१०में इन्होंने : हुमायूँ के भागते समय मरभूमि-मध्य भमरकोटनगर- राठोर सिहासनको सुशोभित किया। इनके असे परा- में अकवरका जन्म हुमा । मालदेवने शरणागत अतिथिके Tol. III. 122