पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५४७

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मालद्वीप ( मलयद्वीप) ६३० तथा देशा० ७२.३३ से ले कर ३४४ ० ७ मोल चौड़ा है। २४ द्वीपपुझोसे यह गठित है जिनमें- तक विस्तृत है। इसमें कुल मिला कर १६ द्वीप हैं। यह से केवल सातगें मनुष्योंका घास है। द्वीप-समूह ४६६ मील लम्बा और ६० मील चौड़ा है। २। टिल्लाडु मार्टि आटाल-इसका परिमाण ३५ वर्ग- द्वीपके योचकी प्रणालीका जल बड़ा गहरा है, किन्तु मोल है। यह ३८ द्वीपपुओंसे गठित है। सभी समुद्राशमै उतनी गहराई नहीं है । इसीसे पहाड़ी उपकूल भावादी है। भागमें समुद्रकी तरंगे बड़े जोरसे टक्कर लगाती हैं। मनकम यहां बहुतसे अर्णधपोत नष्ट भ्रष्ट हो प्रणाली हो कर अर्णयपोत आसानीसे द्वीप घेणो ज्ञा गये है। सकता है। ४ मिशाहुमटु-यह १०१ द्वीपपुओंसे यना हुआ है। 'मालद्वीप' नामको उत्पत्तिके सम्बन्धमें यूरोपीय उनसे केवल २३में मनुष्य यास करते हैं। . पण्डित अनेक प्रकारके सिद्धान्त पर पहुंचे हैं। चार फैड़िफोलो-१० द्वीपमे गठित है। प्रधान द्वीपोंको ले कर मालद्वीप गठित हुआ है देख कर माहपमाड़ो-यह अक्षा० ५से ले कर ६० तक उन्होंने इसका नेलेद्वीप नाम रखा । मालबाको भाषा विस्तृत तथा ४ द्वीपपुओंसे संगठित है। में नेले शब्दका अर्धा चार है। मतान्तरसे दिचमहलसे 1 अरि माटोल-पूर्वाकी और है और बहु संख्यक मालद्वीप शद निकला है। महलका अर्धा राजप्रासाद द्वीपोंसे गठिन है। है। किसी एक द्वीपमें सुलतानका महल था उसोसे 21 माने आटोल-इसके निकट माले छोप या राज- द्वीपपुलका नाम महलद्वीप पड़ा है। फिर किसीका यह द्वीप अवस्थित है। यहाँको जनसंख्या २००० है। भी कहना है, कि द्वीपशेणो मालाकी तरह अवस्थित है, अगरेजोंके लिये यहाँका जलवायु अस्वास्थ्यकर है। इसीसे मालाद्वीप या मालद्वीप नाम हुआ है। किन्तु मल दाखदीप या गई। यार, मलय, मालदीप आदि शब्द मलय शब्दसे ही निकले १०। दक्षिण मालदीप-यह २२ दीपसे गठित है। है। ब्रह्माण्डपुराणमें मलयद्वीपका नाम मिलता है। उस. इनमें फेवल ३ छोपोम लोगोंका वास है। में इस द्वीपको अति विस्तृत यतलाया गया है। ११ फाल्ने हो आटोश-यह अक्षा० ३.१६ से ले कर भूतत्त्वचिद् पण्डितमिसे किसी किसीका कहना ! ४१ तय विस्तृत है। है, कि यह दीप प्रवाल फोट-निर्मित है। फिर कोई १२। गोलोक आटोम--यह पूर्व पश्चिममें १५ मील कहते हैं, कि दीपपुञ्जके आस पासके स्थानों में अभी । विस्तार उतने प्रवालकोट नहीं देखे जाते। द्वीपकी और १३ । नीलायडु आटोल---यह अक्षा०२४० से लेकर जर दौड़ानेसे मालूम होता है, कि भारतके दक्षिण ३२० तक विस्तृत तथा २० द्वीपोंसे बना हुमा है।। मलयसे लेकर लंका पर्यन्त एक प्रकाण्ड भूखण्ड था। 1 कम्मो मपहु-तमाम मिट्टी पड़ी है, इसका यादमें भूपारकी चालना या पृथ्वीको अभ्यन्तरस्थ दूसरा नाम सूयाद्रीप है। अग्निकी शक्तिके उक्त भूखण्ड ममुद्रगर्भमैं धंस गया है। १५। फूआ मोन्नक -यह दक्षिण पूर्वको सीमा पर सिर्पा ऊंचा पर्वात इधर उधर द्वीपरूपमें विद्यमान है। अवस्थित है। इसकी लम्बाई एक कोस है। यहां. वास्तवमै लंकासे ले कर मलय प्रायद्वीप तकके अधियासी में अधिकांश अधिवामी तांती और मल्लाह हैं। तथा उत्पन्न द्रव्यादिका जैसा सादृश्य देखा जाता है । माद प्राटोन-मालदीपक दक्षिण अवस्थित है। उससे उक्त सिद्धान्त असमीचीन-सा प्रतीत नहीं होता। यह विषय रेसाफे बहुत करीयमें है। प्रायः १७५ द्वीपो. मालद्वीपकी भाषा दोपका स्थानीय नाम आटोल है। दीपपुओंमसे सिर्फ १६ प्रधान है तथा हरएकमें मनुष्य में मनुष्योंका वास है। कुल मिला कर अधियासियोंकी पास करते हैं। । संख्या प्रायः दो लास है। स्थानीय लोगोंका विश्वास ११. विन्दु पोलो माटोन-यह १२ मोल लम्बा और । है कि मालद्वीपमें दश हजार छोटे छोटे द्वीप है।