पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५५२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


४८६ पालद्वीप (पलंयद्वीप) इयन वतुता नामक एक अरव देशीय यात्री १३४०१ : मि०प्रे ने मालद्वीपवासियोंके आचार-व्यवहारको ई०सन्में सबसे पहले मालद्वीपमें आया और वहांके पर्यालोचना कर लिखा है, प्राचीन समयमें मालद्वीप वजीरकी कन्यासे विवाह कर लिया। बाद उसके वासी जो दानव पूजक था उसका स्पष्ट प्रमाण मिलता १६०२ ई० में पिराई ( Pyrard ) नामक एक फरासी है। कई जगह बौद्धधर्म के भी निदर्शन देखे गपे '. नायिक जहाज द्वय जाने के कारण मलद्वीप पहुंचा। ! हैं। उन्होंने केवल चार सौ वर्ष तक मुसलमान-धर्म द्वीपयासियोंने उसे पांच वर्ष तक वन्दी कर रखा था। | ग्रहण किया है। जिस मुसलमान प्रचारकने सबसे उसके पहले १५यों शताब्दीमें पुत्तेंगोज .णिोंने पहले यहां धर्म प्रचार किया उसको कन मालिद्वीपमें मालद्वीपका आविष्कार किया। कुछ दिन हुए लेफ टिनेएट आज भी विद्यमान है। यहांके अधियासो भक्ति के साथ क्रिप्टोफर ( Lieutenant Christopher R.N.) जमोन इस स्थानको देखते हैं। मालतीपमें बद' शब्दको नापनेके लिपे मालद्वीप आये थे। उन्होंने एक वर्ष तक प्रतिमा और मन्दिरको 'चौदसाना' कहते हैं। शायद . रह कर यहांका विवरण लिना । उन्हीं के विवरणसे यहां-वह वौद्ध शब्दका अपभ्रश होगा। इस विषय में एक के सभी तत्वोंका पता लगा है। ऐसा प्रवाद है, कि एक समुद्रवासी दैत्य माल. बहुत प्राचीनकालसे मालद्वोप सिद्दलराज्यके शासना-1 द्वोपवासिनी कुमारियों के ऊपर घोर अत्याचार करता धीन था। प्रोक, अरयोय और चीनदेशीय पर्यटकगण, और उन्हें हर फर ले जाया करता था। मानविन सभी मालद्वीपको सिंहलके शासनाधीन वतला गये हैं। गयुल घेराकात नामक एक. मुसलमान-प्रचारकने १७वीं शताब्दीके प्रारम्भमें पिरार्डके समय यहां जो भाषा, कुरानको जादूगरी-शक्तिसे उस दैत्यको मन्त्रमुग्ध कर प्रचलित थी यहो आज भी है। सिंहलो भाषा ही पहा- मार भगाया। की प्रचलित भाषा है । बौद्धधर्म के निदर्शन सर्वत्र मालद्वीपके रहनेवाले बहुत कुछ सत्यवादी हैं। ये ' देखे जाते हैं। इयन-चतुताके वर्णनसे मालूम होता है, | भारतवर्ष के बंगाल, चटगांव, मालयाके उपकूल तथा कि १३वी सदीके शुरूमें द्वोपवासिगण मुसलमान-धर्म सिंहलके साथ वाणिज्य करते हैं। ये नावें चलाने में दीक्षित हुए थे। वड़े निपुण होते हैं। मालद्वीपमें उक्त विद्या सीखने के १६वीं शताब्दीके आरम्भमें पुर्तगोजोंने सामान्य-! बहुतसे विद्यालय है। पदांके लोग अति निरोह तथा भावसे इस द्वीप पर आधिपत्य किया था। . शान्तस्वभावके हैं। सभ्यजगत्में जो दोप देखा जाता अलेकजन्डियावासी पापुस ( Papps ) नामक है यह यहां कुछ भी नहीं है। वे शराब नहीं पीते । उन- प्रसिद्ध पर्यटकने ४थो शताब्दीमें सिंहलभ्रमणके समय का तामडावर्ण तथा कद छोटा होता है। कहीं कहीं लिखा है, कि १३७० द्वीप सिंहलराज्यके अन्तर्गत थे। हशी जातिका संस्रवदोप दिखाई देता है। स्त्रियां सुश्री ५वीं शताब्दी में चीना यात्री फाहियान भी सिंहलके नहीं, पर घड़ी डरपोक होती हैं। चारों ओरके बहुतों द्वीपोंका उल्लेख कर गये है। उन्होंने यहुतसे अर्णवपोत यहां इब गये हैं जिनमें से कुछका कहा है, कि इन सभी द्रोपोंमें मुक्ता और होरा बहुतायत- नाम तथा डूबनेका समय नीचे दिया जाता है। १८७७ से पाया जाता है। टलेमी तथा कोसमस (cosmos ने ई०में लिफे ( Leffy), १८७६ ई० सन्में सिगल ( Sen. भी लो शताब्दीमें इन सब द्वोपीका उल्लेख किया है। gall) और १८८० ई०सनमें कनसेट (Consett) इत्यादि । सलिमन ( Sullimau ) स्वीं शताब्दीमें लिख गये हैं, कि अभी अनेक कारणोंसे यर्तमान मुलतानकी ऐसी धारणा यह सब द्वीप वहांफी एक सम्राशीके शासनाधीन था। हो गई है, कि हूये हुए जहाजों पर जीवित नाधिको. ११वीं शताब्दाम आल चरणी इन सव द्रोपोंका उल्लेख का स्वत्य नहीं था। इसीसे मुलतानको अनुमति के बिना करते समय कौड़ीके व्यवसायके सम्बन्धम बहुत-सी या किसीने जहाज निकालने में सहायता नहीं की थी। लिप्त गये है। . यहां के उत्पन्न द्रव्योंमें नारियल प्रधान है।