पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५६८

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मालवा यामनापी सेवा करने पर भी मालयाको समृद्धि जरा , सुन्दरी हिन्दू नर्तकीने इसफो एकदम अपने कायमै गो ग घटी। नूर उद्दोनका लड़का महमूर १५१२३०६ कर लिया था। राजा वहादुरन रूपमतीफे प्रणयके पदत. राजगद्दी पर बैठा । इमसे राज्याभिषेकके जुलूसले में माइ नगरमें एक सुन्दर भयन बना दिया । अमो तक मालयाको सम्पत्तिमा पता चलता है। भी उसके संदहर पाये जाते हैं शौर, अपने देशको भाषा, __महमूद, भाइयोंफे पड़यन्त्रसे राज्यमें शीघ्र ही में रूपमतीके प्रणयपूर्ण गीतोंकी अनेक किता' अशान्ति फैली। जब इसपो एफ भाईने चन्देरी पर चढ़ाई . मिलनी हैं। की तय इसने राजपूत राजाओं सहायता मांगो ओर इधर राजा बहादुर रूपमतीके साथ भोगविलासमै मदारीराय राजपूनको प्रधान मन्त्री बनाया। कुछ ही। लीन था उधर १५६९ ई०में अकबर बादशादको विषय दिनों में महमूद गदारोराय पर सन्देव करने लगा और कोर्ति मांडू नगर तक आ पहुंचो। १५७०६० में मालया छलप्रपंचसं उसे हटानेको चेट करने लगा। इममे अपनी स्वाधीनता खो दिल्ली बादशाह अकबर के अधीन राजपूत लोग विगढ़ उठे। महमूद गुजरात भाग गया। हो गया। मांडू नगरके खंडहरोंकी जांच करनेसे मालूम गुजरातफे राजा मुजफ्फर शाहने इसका पक्ष लिया। होता है, कि मालवाके राजा अपने राज्यकालमें सौभाग्य राजपून लोग महमूदको पकड़ने के लिये गुज- सम्पत्तिको उच्च सोमा तक पहुंच गये थे। इस स्थानके रातको भार बढ़े। दिन्द मुसलमानोंमें घमसान लड़ाई | स्थापत्य शिल्पको देख शिल्पशास्त्र जाननेयाले इस हुई। इस लड़ाई में प्रायः १६००० राजपून सैनिक जूझ | नगरको भूरि-भूरि प्रशंसा कर गये हैं। मरे। प्रायः एक लान मुसलमान सैनिकोंके मरने पर धीच बीचमें जोधपुरफे राजपूत राजामीने मालयाके मुसलमान लोग विजयी हुए। । कुछ अंशों पर अधिकार कर लिया था। मुसलमानी. इस समय मेयारफे राणा सा अर्थात् संग्रामास की शक्ति क्षीण होने पर लालाजीने मालयामे रापगढ़ चारों गोर अपनी प्रधानता फैला रहे थे भोर, तैमूरला । नामक राजधानी कायम की थी। पोछे उनके पोते बल. का पंज मुगल सेनापति वायर शाह भी दिल्लीफे राज-! भद्रसिंह मालयाफे राजा हुए । इस समय मालया । सिंहासन पर यांत गढ़ाये हुए था। ऐतिहासिफ लोग अजमेर आदि अनेक स्वाधीन राज्यों में बंट गया। काहने है.किवावरका युदय न होता तो खिलजोश. इनके शासनकाल में मराठोंने शक्तिशाली हो मालया के अन्त दोने पर भारतसाम्राज्य राजपूतोंके हाथ मा पर चढ़ाई की। जयपुरफ प्रतिमासा प्रसिद्ध जयसिंहने बाजी माता। रायको मालया जय करने में बड़ी सहायता पहुंचाई थी। १५२६९०में महमूदका मार कर गुजरात राजा कहा जाता है, कि जयसिंह और याजीरायके बीच बहुत बहादुरशाद कुछ दिनों तक मालवाकी गद्दी पर बैठा।। लिखा पढ़ी हुई थी। जयसिंहने मानणप्रमुख मराठाराज्य इम समयसे ले कर सफदरफे शासन समय तक ३७ वर्ष) को पुट करनेको इच्छाले सहायता की । जयसिंहकी सदा मालयामें अराजकता फैली रही और राष्ट्रयिप्रय होतायताके विना वाजीराय मालयामें हिन्दुराग्यको स्थापना नहीं कर सकते। भह लोगोंफे प्रधाम इस विषयमा . हुमाय बहादुर शाहको भगा मालयाका राजा यन विस्तारके साथ वर्णन है। घंटा। पश्चान् मान्न गो कादर मालयों की उपाधि ले मुसलमान इतिहासकार फिरिस्ताने लिखा है कि माइ नगाम १५३००को गालयाफे सिंहासन येठापा, मुगलसाम्राज्यफ सघापतनफे बाद गुजरात मराठा लोगों

गद शेरशादसे १५४२ हार फर गुजरात माग ग के अधिकारमें आया। १७३४ में पायाने मालयासे

इस समय मुजल बारमाह मपान सामन्तके झाम घोच लिया। उसके बाद मिन्द मार दोलफरने मालया. मालया सिंहासन पर मेटा। पदमी अत्यन्त इन्द्रिप में अपना राज्य पढ़ाया। उमपं. उत्तराधिकारी लोग । लोलुप था। सहरानपुरको रूपमतो मामा एक अत्न्त । अभी तक उस राज्यका भोग करते भा रहे है। मराठा