पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५७७

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. पालिक काफूर-पालित (काम्ये) नगर ले लिया। आलुफ खाने यहां पर हवसो! दिल्लीके राजकोषको भर दिया था। दिल्ली इस यणिकोंसे काफुर नामक एक खोजा दास खरीदा। यही समय सौभाग्यको चरम सीमा पर पहुंच गई। बहुत-सी खोजा दास भागे चल कर अलाउद्दीनका प्रिय सेनापति इमारतें और राजप्रासाद बनवाये गपे । पुढ़ापा था मालिक काफुर नामसे प्रसिद्ध हुआ । आलुफखाने जिसे, जानेके कारण अलाउद्दीनने प्रियतम कापुरको राज्यका धन दे कर खरीदा था, आज वही फ्रीतदास भालुफके | कुल मार सौंप दिया। विरुद्ध खड़ा हो गया। काफूरने दिल्ली जा कर मला फाफुरने १३१२. ई० में दाक्षिणात्य पर आक्रमण किया उद्दोनको प्रसन्न किया और उसका प्रियपाल बन गया। और ओरङ्गलसे यहुत धन रत्न ले पार दिल्ली लौटा। इस समय दाक्षिणात्यके देवगिरिके राजाने तीन वर्ष अलाउद्दीनका अंतिम समय देख कर काफुरने उसके बड़े । तक दिली दरवारको कर नहीं दिया था। अलाउद्दीनने लड़के खिजिर खां तथा सादी को गाने निकलवा कर मालिक काफुरको एक लाख घुड़सवारके साथ उनके ; उन्हें कैदमें डाल दिया । पोछे उसने अलाउद्दीनका एक विरुद्ध भेजा। देवगिरिरामने जब देखा कि वे काफुर., जाली विल दिखा कर सम्राटके सात वर्षके चौथे लड़के के साथ युद्ध में ठहर नहीं सकते तव निर्दिष्ट राजकर उमुर खांको सिंहासन पर बिठाया और आप सर्वासर्वा और धनरत्न उपहार दे कर काफुरके साथ दिल्ली आये।। हो कर राजकार्य चलाने लगा । यह सम्राटक तीसरे १३०६ ई०में इसने ओरङ्गालके हिन्दूराजाके विरुद्ध युस लड़के मुवारकका काम तमाम करनेका पड़यन कर रहा याला कर दी। किन्तु पहली बार काफुरकी सेना हारं सा कर था। मुबारकफे रक्षकोको इस बातका पता लग गया भाग गई । काफुर विशेष क्षतिग्रस्त हो दिल्ली लौट आया। और उन्होंने १३१७ ६०फे जनवरी मासमें उसे मार उसी साल उसने सैन्य संग्रह करके दूने उत्साहसे पुनः डाला। काफूरने सिर्फ ३५ दिन राजप्रतिनिधिका काम मोरङ्गल पर चढ़ाई कर दी । इस पार मोरङ्गलराज लङ्गर किया था। प्रबल प्रतापसे युद्ध करके भी परास्त हुए । युद्धके व्ययस्यरूप मालिक राजा फरुसी-खान्देशके फरापोराजवंशका प्रति. उन्हें प्रचुर अर्थ और निर्दिष्ट कर देना पड़ा। इस काम साता । यह अपनेको खलोफर भोमारका यंशधर बतलाता के लिये अलाउद्दीनने काफुरकी बड़ी तारीफ को थी। था। प्रायः ३० वर्ष तक दिल्लीश्वरके अधीन खान्देश- दूसरे थप १३१० ईमें काफुरने कर्णाटके द्वारसमुद्रफे का शासक रद्द कर १३६६ ईमें इसने अपनेको स्वाधीन राजाके विरुद्ध कृच किया । यह स्थान उस समय राजा घोषित किया। फरखीराजाश देखी। हपशाल बल्लालोंके अधीन था। दाक्षिणात्य में इसके जैसा मालिका (सं० रनो०) मालेय माला कन्-टाप् मत इत्यञ्च । समृद्ध राज्य दूसरा कोई भी नहीं था। मालिक काफूर- १ सप्तला, सातला । २ पुवी । ३ प्रीवालङ्कार, करटहार। ने मलबार उपफूलमें पहुंच कर उस घटनाको स्मरणीय! ४ पुष्पमाला। ५ नदीविशेष । ६ मुरा। दाक्षा मध, रखने के लिये यहां एक मसजिद बनवाई। काफुरने बड़ी अंगुरफी शराय । ७ चन्द्रमलिका, चमेली। ८ दासी, आसानीसे द्वारसमुद्र पर अधिकार कर राजधानीको | अलसी। पंक्ति। १० पक्के मकान ऊपरफा एड, लूटा। पीछे सुप्रसिद्ध और अतुल ऐश्वर्यपूर्ण शिय- रायटो। ११ मालिन। मन्दिरको दाइ फर यहाँका प्रकाएड धनभाएडार लूट मालिकाना ( फा० पु.) १ यह कर, दस्तूरो या इको ले गया । भाज भी उस भग्नमन्दिरमें उस समयके हिन्दु मालिक-अदना या कर्जदार मालिक ताल्लूपदारको देते स्थापत्यका उज्ज्यल दृष्टान्त देखने में भाता है। काफुर। । २ स्वामीका अधिकार या स्वत्य, मिलकियत । अपरिमित धनरत्त ले कर दिल्लोको लौटा। फेरिस्ता (मि० वि०)३ मालिकको भोलि, मालिककी तरह। ने लिखा है, कि कापुरको १६००० मन सोना, ३१२ मालिकी (फा० सी० ) १ मालिक होनेका भाव। २ हाथी और २०००० घोड़े हाथ लगे थे। काफरने माटिकका स्यत्य । दाक्षिणात्यका चिरसश्चित अतुल धन भएडार लूट कर मालित (सं० वि०) मालाकारम परियेएित । Vol. XVII, 127