पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५७९

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.. पालिक काफुर-मालित ५०५ (काम्ये ) नगर ले लिया। आलुफ खांने यहां पर हवसी । दिन्टीके राजकोषको भर दिया था। दिल्ली इस यणिकोसे काफुर नामक एक सोडा दास खरीदा। यही समय सौभाग्यकी चरम सीमा पर पहुंच गई। बहुत-सी खोजा दास मागे चल कर अलाउद्दीनका प्रिय सेनापति इमारतें और राजप्रासाद बनवाये गये । बुढ़ापा मा मालिक काफूर नामसे प्रसिद्ध हुआ । यालुफखाने जिसे, जानेके कारण अलाउद्दीनने प्रियतम काफुरफो राज्यका धन दे कर खरीदा था, आज वही क्रीतदास आलुफके : फुल भार सौंप दिया। विरुद्ध खड़ा हो गया। काफूरने दिल्ली जा कर अला। फाफुरने १३१२ ई०में दाक्षिणात्य पर आक्रमण किया उद्दोनको प्रसन्न किया और उसका प्रियपात बन गया। । और ओरङ्गलसे बहुत धन रत्न ले कर दिल्ली लौटा। इस समय दाक्षिणात्यके देवगिरिके राजाने तीन वर्ष। अलाउद्दीनका अंतिम समय देव कर काफुरने उमफे बड़े तक दिली-दरवारको कर नहीं दिया था। अलाउद्दीनने लड़फे विजिर खां तथा सादी खांको मां निकलवा कर मालिक काफुरको एक लाख घुड़सवारके साथ उनके उन्हें केदमें डाल दिया। पीछे उसने अलाउद्दीनका एक विरुद्ध भेजा। देवगिरि-राजने जब देखा कि ये काफुर, जाली विल दिखा कर सम्राटके सात वर्ष चाँथे लड़के के साथ युद्ध में ठहर नहीं सकते तव निर्दिष्ट राजकर उमुर खाँको सिंहासन पर बिठाया और आप सासर्या और धनरत्न उपहार दे कर काफुरके साथ दिल्ली आये।। हो कर राजकार्य चलाने लगा। यह सम्राटक तीसरे '. १३०६ ई में इसने मोरङ्गालके हिन्दूराजाके विरुद्ध युद्ध लड़के मुवारकका काम तमाम करनेका पइयत्न कर रहा यात्रा कर दी। किन्तु पहली वार काफुरकी सेना हारं खा कर था। मुयारकफे रक्षकोंको इस पातका पता लग गया माग गई । काफुर विशेष क्षतिग्रस्त हो दिल्ली लौट आया। और उन्होंने १३१७ ई०के जनवरी मासमें उसे मार उसी साल उसने सैन्य संग्रह करके दूने उत्साहस पुनः। डाला। काफुरने सिर्फ ३५ दिन राजप्रतिनिधिका काम मोरङ्गल पर चढ़ाई कर दी। इस यार ओरङ्गलराज-लङ्गर किया था। प्रबल प्रतापसे युद्ध करके भी परास्त हुए । युद्धके ध्ययस्यरूप मालिक राजा फरुखी--सान्देशके फरीराजयंशका प्रति. जो न कर देना पड़ा। इस काम. टाता । यह अपनेको बलोफा ओमारया वंशधर बतलाता के लिये अलाउद्दीनने काफुरकी बड़ी तारीफ को थो। था। प्रायः ३० वर्ष तक दिल्लीवरफे अधीन सान्देश- दूसरे वर्ष १३१० ईमें फाफुरने फर्णाटके द्वारसमुद्रफे का शासक रद्द कर १३६६ ई०में इसने अपनेको स्वाधीन राजाके विरुद्ध फूच किया । यह स्थान उस समय : राजा घोषित किया। फरवीराजभरा देखो। इयशाल बल्लालोंके अधीन था। दाक्षिणात्यमें इसके जैसा मालिका (सं० स्त्री०) मालेय माला कान्-टापू मत रत्यश्च । समृद्ध राज्य दूसरा कोई भी नहीं था। मालिक काफुर- १ सप्तला, सातला । २ पुवी । ३ प्रीवालडार, पाएटहार। में मलबार उपफूलमें पहुंच कर उस घटनाको स्मरणीय! ४ पुष्पमाला। ५ नदीयिशेर। ६ मुरा। द्राक्षा मद्य, रखने के लिये यहां एक मसजिद बनवाई। काफुरने यड़ी | अंगुरको शराय । ७ चन्द्रमलिका, चमेली। ट्यतसी, आसानोसे द्वारसमुद्र पर अधिकार कर राजधानीको मलसी पनि। १० पक्के मकानफे ऊपरफा पएड, लूटा। पोछे सुप्रसिद्ध और अतुल ऐश्वर्यपूर्ण शिव• रापटी। ११मालिन। मन्दिरको दाह कर यहाँका प्रकाण्ड धनभाएडार लूट मालिकाना ( फा० पु.) १ यद्द कर, दस्तूरी या एक जो ले गया। आज भी उस मानमन्दिरमें उस समयके हिन्दु मालिक-अदना या कम्जेदार मालिक ताल्लुफेदारफो देते स्थापत्यका उज्ज्यल दृष्टान्त देखने में आता है। काफुर है। २ सामोका अधिकार या सत्य, मिलकियत । 'अपरिमित धनरल ले कर दिल्लोको लौटा। फेरिस्ता- (कि० वि०)३ मालिककी मांसि मालिककी तरह। ने लिखा है, शिकाफुरको १६००० मन सोना, ३१२ मालिको (फा० सीर) १ मालिक दोनेका माय। २ हाथी और २०००० घोड़े हाथ लगे थे। काफुरने | मालिकका स्वत्य । दाक्षिणात्यका चिरसन्चित अतुल धन भएडार लूट कर मालित (सं० नि० ) मालाकारमे परियेटिन । Vol. XVII127