पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५८०

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मालिक अम्बर-मालिक काफूर मालिक अपर-आविसिनिया ( हवसी) देशवासी एक , उल मुल्कका लड़का। इसने १४६० ई०में जुन्नर जा कर . मुसलमान। यह भारतमें आ कर दाक्षिणात्यके बाद स्वाधीनता अवलम्बन की थी। निजामशाही देखो। ' नगर राजचंशके यहां नौकरी करने लगा। अपने असा-मालिक-उत्-तुजार (मालिक हसन)-बसोराका रहने- धारण प्रतिमा वलसे यह थोड़े ही समयके अन्दर राज्य. - वाला एक प्रसिद्ध वणिक् सम्राट् ! यह अह्मदशाह वाहनो का एक प्रधान कर्मचारी हो गया। इसके कूट मन्त्रणा का एक आत्मीय और मित्र था। दाक्षिणात्यसे आ कर. वलसे तथा युद्धकौशलसे वादशाह जहांगीरको मुगल- इसने माहिमवोपके शासनकर्त्ता फुलवको हराया और सेनाको भी पीछे हटना पड़ा था। वलपूर्वक उक्त स्थान अधिकार कर लिया । 'गुजरातके गह्मदनगरको बोर रानो चांद थीयोके मरने पर १६०३ / सुलतान अह्मदने इसका दमन करने के लिये अपने लड़के ई०में मुगल सेनापतिने अह्मदनगर पर चढ़ाई कर दी। जाफर खाँको भेजा तथा दोउ, गोआ आदिके नवार्वोके इस समय निजामशाही राजगण होनबल हो रहे थे। पास सहायतार्थ पत्र लिखा। सभी मिल कर ७०० मालिक अम्बर कोई उपाय न देख राजधानीको लौटा | जंगी जहाज ले जल और स्थलपथसे युद्धके लिये अग्नसर और थिर्की ( औरगाबाद ) में राजधानी उठा ले गया। हुए। मालिक-उत्-तुजारने वहुतसे वृक्षोंको काट कर जहां रह कर वह अपने भुजबलसे निजामशाहोवंशक | उपकूल भागमें ढेर लगा दिया और आप माहिमद्वोपके गौरवरक्षा कर रहा था। इसके सुशासनसे दाक्षिणात्य ' मध्यभागमें रहने लगा। जाफर खां और उसके सह. . वासी मुसलमान बड़े संतुष्ट हुए थे। योगियोंने जलपय और स्थलपथसे मालिफ अम्बर पर सम्राट जहांगीरने निजामशाही वंशका उच्छेद करने- • आक्रमण कर दिया। महादशाह वाहानीने मालिककी : के लिये तथा मालिक अम्यरके शौर्ययोर्म पर ईन्वित सहायतामें १०००० हजार सेना और कुछ घोड़े हाथी हो गुजरात, मालव और दाक्षिणात्यसे तीन सेनादल मेजे और आप जलपधलं भाग गये। जाफर खाने गुज- उसके विरुद्ध भेजा। दोनों पक्षमें घमसान लड़ाई छिड़ो। रात पर अधिकार किया। --- : ५५ :-:: : . युद्ध में मुसलमानों की हार हुई। १६१० में वह फिरसे मालिक-उस शर्क-जौनपुर शको राजवंशंका प्रतिपाता। भह्मदनगर-सिंहासन पर अधिकार कर बैठा। ! यह दिल्लीपति' मह द तुगलक का प्रधान मन्त्री था। .. लोग इन्हें प्याजा जहान कहा करते.ये।.. ___धीरे धीरे राज्य भरमें उसकी धाक जम, गई। यही महमूदकी शासन विश्लासे दिल्लोके अधीनस्थ राज्यका सर्वेसर्वा हो गया। विदेशीको राजशक्ति परि- सवा हो गया। चिदशाका राजशक्ति परि- शासनकर्तामोंने वागी हो स्वाधीनता अवलम्बन की। चालनमें बद्धपरिकर देख दाक्षिणात्यवासी भारतीय | १३६४ ईमे ख्वाजा जहान मालिक उस शर्ककी उपाधि मुसलमान विपरशतः इसे छोड़ कर चले गये। । लेकर पूर्वाञ्चलका शासन करने आया । इस प्रकार खजातीय शकिसे विच्युत हो मालिक .. जौनपुर आ कर इसने अपनी राजधानी बसाई । अम्बर होनयल हो गया। वचावका कोई उपाय न देख : थोड़े ही दिनों के अन्दर इसने ' अपनेको स्वाधीन राजा इसने मुगल बादशाहकी अधीनता स्वीकार कर ली और | 'पतला कर दिल्लोके अधीनता-पाशको तोड़ दिया। इसके अह्मदनगर धादशाहफो लौटा दिया। इसके बाद इसने दत्तकपुत्र मुवारक शाहसे ही शो वंशका सौभाग्य पुना अहमदनगरको कब्जा किया तथा मालवराज्य पर | सूर्य उद्य हुआ था। . : . ." 'धढ़ाई कर दी। जहांगीरके प्रिय पुत्र खुर्रमसे हार खा कर | मालिक काफुर-खिलजीवशाय दिल्ली सम्राट · मला- 1 यह राजसंसारसे अलग हो जानेको वाध्य हुआ। महा। · उहीनका एक प्रिय और विख्यात सेनापति । अलाउद्दीन राष्ट्रकेशरी शिवाजीके पिता विख्यात शाइजी भोसले के सेनापति मालुफ खाने १२६७ ई०में गुजरातके अन्त. इसके दाहिने हाथ थे। .. र्गत अनहलवाड़ाके राजा कर्णरायको परास्त किया और मालिक अहद-अह्मदनगर राजवंशके प्रतिछाता निजाम- युद्धके क्षतिपूरणस्वरूप उनसे समृद्धिशाली खम्मात