पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६

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मलसंभ-पलपन . है। इमर पटिनम पिना तथा पूर्व में सिङ्गापुर गादि । नाम । २ पश्चिमी संयुक्तमान्त में बसनेवाले एक प्रकार - छोटे छोटे दीप है। एशिया महादेशके पूर्व और पश्निम- फे राजपूत । पे लोग मुसलमानी अमल में मुसलमान में जो राज्य पढ़ते है उनका जलपय याणिज्य इमो, बना लिये गये थे। इन लोगोंका माधार पिनार अपरागत प्रणालोमे होता है। यहां चोर मालू धौर सैकड़ों छोटे मो हिन्दू-मरोना है। छोटे द्वीप घर उपर विक्षिा रहने वाणिज्य पोतको मलयानो (हि० खो०) एक ऊना मौर सोपा पतला भाभी की जाने मानेमें यदो अमुविधा होती थी। अभी! संमा। इस पर ये तमे मलगमको कसरत की जाती है। पृटिन गयएटको पाने वार निकायन दूर हो गई है। . माराम देखो। १५०३०में बोलन यामी लुदोभिको यामा नाम मलग ( पु.) रजक, घोषी। किमी यतिने नदीका मुहाना जान कर इस प्रणालोंमें मलगमा (६ि० पु०) येसनमें लपेट कर तेल या धो डाने प्रवेश किया था। पाश्चात्य पणिक उसके पादसे हो हुए मैंगनके पतले टुकर। . . : .. मराह हो कर माने जाने लगे हैं। मलगिरि (हिं० पु.) १ एक प्रकारका का करी रंग। मलांग दि० पु. ) गलाम देखो। यह रंग रंगनेके लिये कपष्टा पदले हरफे दलफे काढ़े में मलगम ( हि० पु०) लकड़ीका पना हुमा पर प्रकारका और फिर फसोसफे पानी सुयोते हैं और फिर उसे मा। इस पर कमरत करनेवाले यो लोग चढ़ और ! एक रंगमें जिसमें फस्था, चूना, मोती और उतर कर कमरत करने है। मलसम तीन प्रकारका होता। चंदनका चूरा पीस कर बोला रहता मोर-ल- गहा मलपम, लटका मलम और घेतका मलाम। छयोला, नागरमोथा, कपूर कगरी, नण, पांजर, विरमी, गमा मलगाम मुगदर भाकारका गंमा होता है । इसको मुगंध गाला, सुगन्ध कोकल. पाल, अरांस, युदना, अंगाई चार पांच हायसे कर नहीं होती। लटका हुआ मुगन्ध मैत्री, लौंग, इलापनी फेसर और कम्तरीका था लरकीमा मलम उस पा किमी और धरनके सहारे चूर्ण मिला रहता है, माल कर पहर मर उपालसे है। आरसे मधोमुमा लरका रहता है। जब स भेकी उनारने पर उसे दिन रास उमोमें पढ़ा रहने देते है। जगह धरन शादिमें यत लटकाया जाता है सर इमे। दूसरे दिन करडे को उममेमे निकाल कर निनोर लेने गतका मादाम खाते हैं। इस पर कसरत करनेवाले हैं तया यगफे रंगको छान कर उसमें दिनाका तर महाधम यसको पार कर भनेर मुद्रामि कसरल! मिला उममें फिर उस कपटे को दुबा कर मुगास । फरत है। मलसमको कसरन भारतको एक प्रागान पर भाज कल प्राया रंगरेज मलगिरी रंगरंगों पर माल नामक क्षिय जानिकी निकाली हुई है। इसी मल को प्रत्ये गार चूने रंग रंगते हैं, फिर से कसीमा जातिको निकालो पुस्ताको मलयुद्ध भी करते हैं। के पानी में छुपा देते है। इसके पार गे हुए वाप मलपम पर चढ़ने उतरने का माम पर है। मलको माहार देकर नियोधरी और पुम्पान मथा भग्नमें करनेसे मनुपमें फुरती भाती है और पली राने मज. उस पर दिनाका इतर मल देते है। (मि) मसगिरि महोती। रंगका। पायरयामाहाफे पुरानी माटर को लकड़ीमलयन (दि. पु.) एक प्रकारका मनार | द लगा . का टा। यह सरकार या पार फोगहरी रुपमें दोता है और दिमालपकी राय भारत और अमरों और पर गाया जाना है। इसमें पेली रम्सी देनासामफगों में पापा माता । इमकी काय पांपी जाती है। सा दूसरा गाम गरम भी है।३, मन्द्र कालाती है तथा इम पर रंग या गहना है पर प.मरत शो मलम पर गा उसकै माारसे हो । मार पटने पर ऊनको नगद गदार जाती है। उनमें मिला कर सागा काला जाता शिगांगे अमी नानाm mar