पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६१६

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मिगटी - ___करगड लो जन्मभूमि है। पिना नाम लामिण्टोने इस देश में बा कर ही अविरोध मत. गियर नियट सुनिक्षित गजमोतिा थे।' को पोसता की प्रेरणासे पुन्देलगाए झगमें दमन- मिष्टा पापमोई विश्वविद्यालयको शिक्षाका अन्त कर से नहीं किया, किन्तु यहुन दिनोंको गरामनासे : मन् १७१४ में पार्लियामेस्ट मभामद हुए। युन्देलपाट को अबस्था शनि शोचनीय हो गई थी और .. कामोसी राष्टविषय मार उन्होंने मान्सीसी सरकार- । डाकुओंके उपयसे यहांफै अधिवासियोंके जान-मालपो. कर घिरोप साहाय्य किया। मन् १७९७ ई० में इन्होंने सरक्षा करना उनके लिये बाहुन कठिन हो गया था। भाषमा (0.I.) डी सी० एलको उपाधि प्रान की। अपगढ़ के राजा लक्ष्मणदेव जाफोंमें बड़े बड़े । । इस वादगनकोय पक्ष मर्थन करने के लिगे कमिश्नर । अजयगढ़ के मुहा पदाडो रिलं पर गारमप फरने को हो कर नको तूला नगरमें जाना पड़ा था। इसके याद - किसीको टिम्पन नहीं होनी गो। लक्षाणदेयका पदले . इन्होंने कसिंकायोपका शासनानां बन यहांके फानूनका इस म्यानमें एकाधिपत्य शा। कई वर्ग पदले नि सुधार किया। इसके बाद यहां मन्सोमियों को मार कर देना स्पोकार कर ये मजयगढ़ शासन करने लगे। यूती हो जानेके कारण मिण्टो को उस द्वीपको छोड़ किन्तु सोशन कर ठोक ममय पर चुकाते थे। इस कर पदेश लौट गाना पड़ा था। यह सन् १७६७१०। पर करनल माटिंण्डलके अधीन एक फौज उनके पित की घटना है। इसके बाद उनको यारेनको उपाधि मिली।; भेजी गई । यह मन् १९६०में वियनाफा राजा · गुप और सन् भङ्गरेज सेनापनिने यो परिश्रमसे भगा फिले १८०६० यो आकण्ट्रोलको सभापति हुए थे। । की चहारदीवारो कुछ जोतो अपने जोरदार गोलो. न्होंने पारेन टिम विराद्ध शमियोग चलाया। से तोड़ डाला। इस पर महाराज सन्धि कर लेने पर था पर उनके भारतीय शासनमें किये गये अत्पानारों- वाध्य हुए। इन्होंने गहरेज सेनापतिको भाडा माग को जोरम प्रनियाय किया था। भारत मानस पहले फर सपरियारके साथ फिलेको छोड़ कर नीशहर नगर में नका हृदय उदारमूर्ति यार्क को तरह उदारनासे पूर्ण था। चले गये। किंतु उम किले को पुनः पानेको माना उन्होंने समझ लिया था, कि में भारत में जा कर अगरेजोंके यहां परास्त दो, किन्तु रिजा सकने की भारतीयशा उपकार करूंगा और प्रोतिपूर्व यहांका माना नामंजूर कर दी। इससे स्पयिन को लक्ष्मण शासन करुगा। किन्तु भाररामें आने पर भारतीय देय अकस्मात् कहाँ हरय हो गये। किन्तु रिमाई मानने अन्यायुफै ऐन्द्रशालिक प्रमापो कारण उनको अपना भविष्यों को काण्ड उठ गया तो मामला मत परिवर्शन करना पड़ा था। लक्ष्मणदेयके पुट्टाके लोगों को पातोरायके तत्वावधान - ___ सन् १८०१६को शरी शुलाको इन्होंने पलामें में समयगढथे रिलेमें जा कर रोका हुकुम रिया। पदापन किया । ( उस समय फलकाता नगरी दी मारतकी किन्तु इस प्रम्नाय पर पामीराय गदमन गप और राजधानी घो।) नफे गासनकालमें निम्न लिपित यह लक्ष्मणदेयके कुटुम्यफे साथ नौवदर रहने लगे। घरमा दुई गो- रेश गंगापतिको पाजीराव मसा पालन करने युग्देलपएसको दुर्गटना, निजामरे, साप पन्दोयस्त, देर दोसे देश प्रदेश दो गया। इस पर उसे फाप्पी. ३ मि. फापुल और फारसमें इस मेहमा४ मास की देषमान करने के लिये मेमापनिने एक पहरेदार विद्रोद. ५ विगांकुरका गला, मामीसिपी भौर ? निगा कर नौजदर भेगा। पहरेदारगे प र मेरा, पाट यासियो, जति हुप. भारतमागरमं दो किसिम पर हमनदेयकां माता.शिगुपुष, कन्या लो भाममा, ६ भोपाही शासन-मिशाला, राजा , मी पर, पासाराम तुली गढी गागरको पाय स्टे मौर विचार अन्धका संस्कार, ८ बनारमशा फाट कर पहरा दे रहे है । पातीरायकोग कर भाग मोर एरिया कानाको सनको भाटोचना। पहराशा उनी भोर भप्रसार मामको माघrit