पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६४२

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मियान-पिरको freen ( का पम्मान मा ! (पु० } २ मध्य. सिन्धुनदी प्रसिर पुगत माम मनोari गाग, बीमादिगा। प्रधानके द्वारा ही सम्पन्न होती है। यह मा जालसे मिना दिली. ) यह मापारण कपड़ा को किसी मछली पकनेको प्रयास पृथर है। उस समय ये एक गले कप, मोगे उसको रक्षा गादिफ लिये दिया मिट्टीका घड़ा ले कर सलमें फूल पर है। पहले माना। भलाद कह कर घटेके मुंहको पेटमें लगा दोनों हाथ मिपामतहों (हि स्त्री.) मानबह देगे। में पानी पोरने जाते हैं। मो तरद पेजदा गाहने १ IAL का०वि०) १ म पहन बड़ा मीर न पहुन छोटा, . पहाजा माते हैं। उस समय गे १५ फोर ली मध्यम गाकारका। (पु.)२पेमेत जो किसी गांव निमटेने मारी एसएलोके मदमें माल कर गोग हो। ३ गादीमें भागेको भोर पोयमें लगा द्वमा जल में ये रहते हैं। मलिशंशा साल मा जाती है पाहवाम जिसपं. दोनों ओर घोड़े सोने जाते हैं। इसे मय निमरेका मुमपंद करते है। इस समय मछलियो म मापन। ४ एकप्रकारको पालकी। फम जाती और निकल नहीं सकती है। इसके बाद मिपाना- मेसोरेग्मीफे काठियायायिभागमे रहनकिनारे भा कर उसे मानो रोस टुकड़े टुकरेपर . पाली एक जाति। मुना नदी किनारे मयाकान्ता डालते हैं। नामक स्थान मल्लिया गांवमें इस जातिका पास नको खियां काली होने पर मौलफे मुग्न है। यह अपने चौदहियों या सरदारको दलपति फी श्री उसनो पाराव नहीं। कोई कोई तो परम उपरो स्वीकार करने पर भी यहाँफे आफुर उपाधिधारी सागात दिगा देता है। कितनी ही येश्यका काम करती है। . ततका आदर करने है। किन्त उसी आशा भानसार' मानने गाने गो निपुण खो जातो हेपे नदी किनारे को काम नहीं करते। परकी पर तरह की घास घरा बनाया करती है गौर मिपागा-सिम्यप्रदेशवासी मलाहको पा जाति मे.! इस पंचा करती है। मगर या प्रामफे साधारण मधि. मांगागा भार मेयानी नामसे गो यह जाति पुकारी जाती। पासीसे दूर सतत दोभपना गांय मा कर मनगराते है। पदां. एक बार और बचियोस यह विनफल: हापुरुष मय भी येचते हैं गार वाला मा का गार पृषयः माति है। इसको संगमा भी इन ससे' गात फिरत हा खपा पदारम गाना गातो शिरतो हैं। पैश्याको तरह का दाय भाप देकर कितने अधिक। दो मुमाफिर इनके पत्र में फस जाते है। गर्म भोर शायामपटु होते हैं। इनका हर मिपाना-ग्यालियर-राज्यको गुणा सय-पजेन्सीफे भन्न सरा भार उदार है। नदी किनारों के गायोit माप "प एक गागार। मौर मण्त्री पानेवाला साल 2 फर पमने ६ मिपा (फाखी) पाया पापा सोदामो मानी पकाना सामना ना प्रधान शौयिका ६ पायंचोंक दीनमें पहला से कही कही कमाल पाहुनी इमो मदीमे गा मंजूर नामको झोलम चीनिषों बात है। को शाहगाों पर ही यास करणे है। यहां इनके रहन-सियार ( दियदलदलीडीपक ऊपरो भो । केलिपेको पर गदी दंगा जाना। त्रियां भी गाय! परमगी होवामीर जिसमें गराड़ी पड़ीदती है। गना पला पर पुरसकी सहायता करना है। पुनियान ( हिमपार देगी। अदालने पर मादक किनारे गएलो पाने में लगे मिपेय (40)१प। २पा। ह म पिप एक.लाटी नागमे गादियों को ले कर मिपेय (मासिक) पर योग्य, पाई। गाने सम्मामों के माय माप पटा कर पी जाती है। मिरंगा फा० पु.) प्रधान, मंगा। मगुदी प्रमाणे महान गानोम पे भरिमाप नायरको (Riyatपापको नया REREITY बनाया। गुको बीमारी।