पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६४५

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मिरि "ये मुख्यतः नदीके किनारे छोटे छोटे गांवों में ४५ दिन्या) स्वर्ग ( तलड़) और पृथ्वी ( मरासिन)की विशेष फुट ऊंचे मचान वांध कर घर दनाते हैं। ये मुरगी। भक्ति करते हैं। और सूथर पालते हैं। गांवों में किसी भोजका समारोह अपर लिखे देवताकी पूजा करानेवाले मीची पा होने पर स्वेच्छापूर्वक इन जीवोंका वध कर भक्षण करते. मिम्बोया नामके पुरोहित रहते हैं। रोगीको हवा देना हैं। किसी गाँव में इनको भैंस पालते देखा गया है। और क्रियाकर्ममें जीवको बलि देना इनका प्रधान कार्य ये मैंसके दूध दुहते हैं। सारणतः जङ्गल कार कर ये है। मिभ्योया ( पुरोहित ) वंशानुक्रमसे होते हैं। ये खेती करते हैं। धान, सरसों, मकई और कपास यहां- इस पदको प्राप्त करना ईश्वरकी इच्छा करते हैं। कैसे की प्रधान उपज है। घे देवता का आह्वान करते हैं नोचे उसका उल्लेख • ये धलशाली और स्वभावतः पुष्ट होते हैं। ये सब किया जाता है। जीवोंके मांस भक्षण करते हैं। अव मिरी जातिके लोग १८ वर्षकी उनके समय प्रेतात्मा द्वारा परिचालित हो समतलक्षेत्रके गांवों में आ कर बस गये। फलतः हिन्दुओं. कर वनमें अपने इएदेवको ले जाते हैं। ये इस समय वन के संसर्ग होनेके कारण इन्होंने गोमांसका भक्षण करना। फल खा कर कुछ समय बिताते हैं। इसके बाद मानी छोड़ दिया है। । ये नये उपादानसे गठित हो जाते हैं। उनकी आत्मा भी हर तरहसे परिमार्जित हो जाती है। ये दिथ्यज्ञान प्राप्त - इनमें वाल्ययिवाह आज तक प्रचलित नहीं है। किंतु पाल्यकालमै हो विवाह सम्बन्धको मंगनी हो जाती है। कर अदृश्य वस्तुको यथार्थता बतलाते हैं। ये स्तुति पाठ जब ये दोनों अपने खाने कमाने लायक हो जाते हैं तव द्वारा चित्त परिशुद्ध कर रोगीको रोगसे मुक्त कर सकते इनका विवाह प्रकाशरूपसे विघोपित होता है। कभी । हैं और सारी पठनावलीको देववाणी रूपमें कह देते हैं। कभी घरको कन्याके घर जा कर नौकरकी तरह काम समतलक्षेत्रके गांवों में रहनेवाले मिरी प्राचीन प्रधाफे करना पड़ता है। जब तक कन्याका स्थिर किया हुआ अनुसार नेकिरो और नेकिरानकी पूजा छोड़ कर इस रुपया नहीं चुकता, तब तक यह वहीं नौकरका काम | समय शङ्कर और परमेश्वरकी पूजा करने लग गये हैं। यह करता है। पूजा (बोरखेवा या घरखेवा) विशेष धूमधामसे की जाती .. स्त्रियां अपने पहनने के लिये कपड़ा बुन लेती हैं, सूती है। गृहस्थ कभी कभी नेकिरो और नेकिरानकी पूजा छींट बना कर उसमे अंगरना तय्यार करती हैं। इनका । करते हैं। मिस्त्रीया इस उत्सवमें पुरोहितका कार्य करते हैं सही , किन्तु पहले की तरह ईश्वरका काल्पनिक 'जीन' नामक मोटा गमछा गृहस्थोके लिये विशेष उप- भादान नहीं करते। कोई भी देवता क्यों न हो, इनकी योगा हाता है। पुरुष जङ्गल फार फर खेती करते। पूजाको पद्धति एक ही प्रकारको है। सभी पूजाओंमें हैं, 'इनकी स्त्रियां भी खेतों में जा कर शारीरिक परिश्रम मुगों, बकरे, शूकर और भै'सेको वलि दिया करते हैं। करने में कोई कसर नहीं रखती। उत्सवोंमें चायलसे तैयार किये हुए मद्यपानका विशेष - ये सब मृतदेहको नीचे गाड़ते है। गाड़ देने के बाद प्रचार है। इनको मृतकके लिये अशोधको शुद्धि के लिये कोई तूल ___धर्मातरणके सम्बन्धमें इनमें भतिया और अभक - तथाल नहीं करना पड़ता। तिया नामको दो श्रेणियां दिखाई देती हैं। अर्थात् जो . ... इनका धर्म कर्म अन्य जङ्गली जातिकी तरह है । इन-1 'गोसाई' के चेले हैं, वे भकतिया और जो गोसांपोंसे को कोई विपद् उपस्थित होने पर ये प्रेतोंकी परितृप्तिके मन्त्र-दीक्षा नहीं लेते, के अभकतिया नामसे परिचित हैं। लिपे उनकी पूजा करते हैं। ये प्रेतात्मा नेकिरी और | आसाम शिवसागरमें गोसाइयोका अड्डा है। वे प्रायः निकिरान नामसे मगहर हैं। नेकिरीको पूजा पुरुष और ब्रह्मपुत्रके दक्षिणी किनारे पर रहते हैं। कभी कभी - नेकिरानको पूजा स्त्रियां करती हैं। सिवा इनके ये सूर्य । यत्न मामुली द्वीपों और ब्रह्मपुत्र के उत्तरतस्यासियों _____Vol. xvil, 145