पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६४६

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५७८ पिरि मिरियों यहां आ कर अपनी गुरुदक्षिणा चुकाते हैं। इनमें बहुविवाह भी प्रचलित है। सरदार स्वेच्छा.. ये कोई मूर्ति यमा फर उसको पूजा नहीं करते। पूर्वक बहुत सो पत्नियां खरीद सकते हैं। पिताफे मरने किसीको भी ग्राह्मण पुरोहित नहीं हैं। बहुतेरे भैस या पर अपनी गर्भ धारिणो माताको छोड़ अन्य विमाताओं- निपिट मांसोंका भक्षण परित्याग फर हिन्दू-सम्प्रदायमें ! के साथ पुत्र विवाह कर सकता है। दरिद्रीको पन्नो मिलनको चेयर कर रहे है । माटी मिरी अपनी म्यजातियों पानेको आगामें घोर परिश्रम करना पड़ता है। कन्याको की तरह मचान यांध कर वननेवाले घरों में यास नहीं पण म दे सफनेके कारण विवाहमें पड़ी पहचान होती फरते। ये अन्यान्य छोटे छोटे हिन्दुओंकी तरह मट्टीका है। इसीके फलसे स्त्रियां यदुतसे मर्द करने पर पाध्य । घर बना कर रहते हैं और जातीय प्राचीन नीति रीति होती हैं। और धर्माचारको छोड़ कर हिन्दू जातिके धर्माचारका मिरी स्त्रियां अपने स्यामीकी बड़ी भक्ति करती हैं। अनुकरण कर रहे हैं। । कितना हो कट होने पर भी अपने स्वामोको कटुयाय ____ो पार्वत्य मिरी अगरेज राजत्वमें सुवर्णश्री नदी- नहीं बोलती । घे जिस स्वामीके पास जय रहती है, के किनारे रहते हैं, उनमें भी कई श्रेणियां हैं। उनमें तब उनसे किसी तरह भविश्यास नहीं करती। पुरुपके घत-घाती, सराक, पानीयुटिया और तरबुरिया ही प्रधान संग जमीन कोड़नेमे भो ये जरा सोच नहीं करती। हैं। सीमान्त प्रदेशको रक्षाके लिये भासामफे राजास पहले कह चुके हैं, कि ये प्रत्येक कार्यमें जीव-यलि देते ये कुछ यार्षिक पृत्ति पाते थे। इस समय अङ्गरेज-सर- है। इनका विश्वास है, कि जीयमान किसी द्वारा मारे कार शान्ति-रक्षाफे लिये उनको कुछ फुछ दिया करती। जाने या मरने पर स्वर्ग जाता है और उस प्रेतात्मा पर है। पार्यत्य मिरी जातिके लोग एक दलपतिके अधीन यम शासन किया करते हैं। प्रेतात्मा स्वर्गम झाटा है, पास करते हैं। किसी किसी प्राममें एक एक फुटुम्यके इस लिये पूजा आदिम जाहिंसा करनेमें जरा भी नहीं लोग समूचे गाय पर आधिपत्य करते हैं। आवरोंकी ! हिचकते । इनके यमराज हिन्दुओंके यमराजके सिवा तरह उगकी शासनाला नहीं। ये रातमें जाग कर और दूसरा कोई नहीं। ये मृतदेहको जमानमें गाद देते पहरा नहीं देते। अथवा मोरङ्ग नामक समामें सम्मि- है। यदि काई समतलक्षेत्रमें भा कर परलोकयासी होता लित हो कर्तध्याकर्तव्यका अवधारण नहीं किया करने ।। है तो भी उसको पांत पर ला कर पूर्वपुरपीकी कॉक पानोयटियोंके सरदारका नाम डेमा है। इनके रहने। पास गाते हैं। किसी समामक रोगसे मरने पर। फा घर पांससे बना होता है और ७० फीट लम्या होता उस पर्वत पर नहीं लाते । पममें गाइने समय घे है। इनकी खियां वेशभूपा और भाभपण पहना करतो! मृतात्माके लिये भोज्य पदाथ, गहना और हांडो, लोटा है। साधारणतः पहाडी निराष्ट मणियों की माला गले.. आदि गाड़ा करते हैं। इनका विश्वास है, कि ये भोज्य- में शालती हैं। पुरुष बड़े दलिष्ट होते हैं। सिहलियो पदार्थ स्यारोहणकी यात्रामे काम आयेगा। मेतात्माको की तरह सर, जूड़ा बांधते हैं। इनके कानों में चांदी । स्वर्ग जानेके लिपे पाधेय दनको प्रथा हिन्दुओं में भी है कुण्डल भीर सरमें बाघम्बरसे छाई हुई तकी टॉपो जो थैतरणाफे नामसे प्रसिद्ध है। प्रेसवालोंके गहनेको रहती है। कुरता भार पत्रका विशेष ध्ययदार नहीं। दंप कर यमराज उसके गुप्त्यका हाल जान जायेगे, फरते। ऐसा ही उनका विश्वास है। हाथी भादि जन्तुओंको पकानेका कागल इनको ये अपनी उत्पत्ति तथा पर्यत पर रहने सम्बन्ध मरठी तरहसे मालूम है। प्रायः फांदा लगा कर पशुश्री कहा परत है, कि परम पिता द्वारा पयत पर पास करने को पकला करते हैं। पुरुष शेरका मांस खाते हैं। योग्य उपादानोंसे हम लोगोंका शरीर गठित हुमा है इनका विश्वास है, फिरेरफे मांस यानेसे गरमें बल और उन्हीं की मालासे हम यहां याम करते हैं। पहले का सवार होता है। स्त्रियो शेरका मांस नहीं पाती। ये हिमालयकं तिम्वतीय मान्तौम रद थे। पक्षियोंको उद