पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६५०

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५८० पिजर्जापुर'. अलाया वाजग और जुनार भी पहनायतसे होता है। था। विजयगढ़ और चरणाद्विगढ़ आदि शब्दों के छोरे.' अनेक यामि अफीमको खेती होती है। गढ़यालफे से तथा विन्ध्याचलके पामयाले प्रदेशमें । सएटदरीके पाम पान यूय उपजना है। देखनेसे इसके पुराने इतिहासका बहुत कुछ पता ___ फलकतं और पम्यईको छोड़ मिजापुरके जैसा चलता है। . धात म्यान दमरा और नहीं है। कुछ समय विन्ध्याचलकी तराईमें दुर्भव प्रसिद्ध चुनारगर यना पहले गाले मोर गई व्यापारफे लिये मिर्जापुर भारत में ! हुमा है जिसे गंगा अपने जलसे पवित्र करती है। कदा पहला म्यान समझा जाता था। लेकिन यम्यई जव्वल. ज्ञाता है, कि द्वापरयुगमें कोई देवता हिमालयसे कुमारी पुर रेलयेके गुलने पर यहांका थापार बहुत कम हो गया। अन्तरोपको जागहे थे। रास्तेमें उन्दै गंगा तट्यत्ती है। तो भो इस प्रदेशको व्यापारका एक प्रधान फैन्द्र कह विन्ध्याचलकी तराई मिली। यहां कुछ काल उन्होंने सकते हैं। यहां पीतलफे परतग, लाह और दरी यहुत , विधाम किया। उन्होंके चरणचिइसे चुनार या चनार जगहमें भेजो जाती है। इस जिलोंके उत्तर इए-इण्डिया. ' नाम हुमा है। । रेलये और गला रहने के कारण व्यापारमें विशेष सुविधा उज्जैनके राजा विक्रमादित्यफे भाई भर्स इरिने गज्य. हुई है। प्रेगड-द्रक रोम और दाक्षिणात्यके राजपथके भोगका त्याग कर विन्ध्याचलमें बहुत दिनों तक योगा. कुछ भाग इस जिले हो फर गये हैं। अनेक कारणों से । भ्यास किया था। आज भी उनका मन्दिर मौजूद है जो मिर्जापुर में कई पार दुर्मिक्ष हुमा जिससे यहुतेरे लोग। इस स्थानका माहात्य यतलाता है। भत्त नायका मन्दिर कराल काल के प्रास यने। पत्थरोंका यना है। इसको शिल्पकला देखने योग्य है। आस कल बहुत जगहों में जाल फाट घेतो यढ़ाई पश्चात् गङ्गाजल और पिन्ध्याचल की इस रमणीय भारतकोना दो तिहाई जमीन जल्लोस । और प्रशान्त गार्योसे भरी सुन्दरता पर गोदित हो भरी है। मरकारके यन्दोवस्तो महालकी मालगुजारीको ! पृथ्वीराज इस प्रदेशमें रहने लगे थे। फुछ दो दिन बाद पतिदारो कहते हैं। फाशीराजके अधीन जो पतनीदार खैरउद्दीन सुयुक्तगीनने मिर्जापुर पर अधिकार किया और है मंजूरीदार उमफा नाम है। जमीदार नीचे इन्होंका : मुसलमानो शासन चलाया। फिर कुछ समयके बाद स्थान है। ये लोग किसानोंस मालगुजारी यसूर फरसे । सामिराज नामके किसी हिंदू राजाने मिर्जापुर विजय है। यहां किसानको हालत भार जगहों से अच्छी किया था: चुनारगड़के तोरणद्वार पर एक स्थान है। लेकिन ये लोग बड़े भालसी होते हैं। पानी : एक गिलालिपि है जिसमें १३३० सम्यत्। १२०३०) मद्दों पड़ने पर सिनाईम मेतीको उन्नतिकी चेष्टा ये नहीं सुदा हुआ है। इस शिलालिपिस उक घटनाका प्रमाण करते। इसलिये क्षक्षिण गृहस्थ लोग अकालय दिन मिलता है। पष्टी मुसीबत में पड़ जाते हैं। इसके बाद महम्मद माहवफे रोहिल सेनापति साद इनिहार। घुद्दीनने पूर्णरुपसे यहां मुसलमान-राज्य स्थापित किया। गिजांपुर जिला कामी प्रदेशका एक भाग सामा! इस यंशपे. एक मासकको विषया खीसे चिपाह जाता है। अतएप दमका पुराना इतिधाम काशीराज्यके कर शेर at या शेरशाहने १५३०० इस स्थान पर इतिहास में मिला हुआ है । मिर्जापुर शहद फिी मिरजा ' अपना अधिकार जमाया। १५१६ ६०में हुमायने कमी के नागस लिया गया है। अतपय मास मिजांपुरका प्रांकी सदापतासे ६ महीने इस स्थानको घेर पोछे दघाल भोरा मुसलमानी सलनात मायने घला ! कर लिया। शेरगाहने पुनारगढ़ में आश्चप लिया। कुछ मिापुरका पुराना इतिहास नुनार या वाणादिगढ़के : दिन बाद यह स्थान फिर उसके हाथ लगा। मम्पन्यमें कुछ दिया गया है। पुनार देगो . ११७:०में मुगनेि फिर थुनारगढ़ पर जा कर प्राचीन कालमै मिलापुर हिन्दु राहोंके अधीन : अपने शासन को हद कर लिया। १७२० में कानाराज