पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६५३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


मिल ( जान स्टुभर्ट) ५८३ - ३ उक्त जिलेका प्रधान शहर। यह अक्षा० २५६, रूपी कल्पवृक्षका आनन्द लूटने में समर्थ हुए थे। घर उत्तर तथा देशा० ८२ ३५ पूरदके बीच गङ्गाके ही उनका विद्यालय था ! उच्च शिक्षा पाने के लिये उन्हें किनारे यसा हुआ है। जनसंख्या १० हजारके फरोव है।' विश्वविद्यालयकी सीमाको पार करना नहीं पड़ा था। भारतमें यह शहर वाणिज्य प्रधान कह कर प्रसिद्ध है। छात्रजीवन। लेकिन अनेक स्थानोंसे रेलवेका संयोग होनेके कारण जान स्टुअर्ट मिलके पिताने इनको ३ वर्षकी अवस्था इसकी प्रधानतामें धक्का पहुंचा है। गङ्गा किन रेसे सुन्दर ही व्याकरणको शिक्षा दी थी। एक वर्ष में ही इन्होंने मन्दिर, मसजिद, बड़े बड़े मकान तथा नौकायें दर्शकोंके यूनानी भाषामें अनुवाद करना आरम्भ कर दिया और चित्तको मोहती हैं। यहां अनेक धनवान् घ्यापारी' शीघ्र ही 'ईशप' रचित कथामालाका अध्ययन किया। इस रहते हैं। यहां यरोपियनके गिरजे तथा अनेक तरहके, तर विद्यामन्दिरकी प्राथमिक सीढीपर चढ कर मिलने विद्यालय हैं। पहले यहां फौजको छावनी थी। लेकिन , ८ वर्ष हिरोदोतास, जेनोफन, सनोटिस, डायूजिनिस, सिपाहियोंके गदर के बाद अब यहां फौज नहीं रखी आइसोकेटिस और प्लेटो आदि प्रसिद्ध प्रन्थकारों के जातो। । विशाल ज्ञानभाण्डारमें प्रवेश किया था। जेम्स पुत्रको 'यहां चपड़े लाखके ( Shellac ) कारवारमें । एक मिनटके लिये भी आंख अन्टग करते न थे। सोने, ८०००से अधिक लोग अपनी जोविका-निर्वाह करते' खाने, पढ़ने और टहलने के समय सदा पुत्र के साथ रहते है। यहां पोतल और पत्थरके बरतन, खिलौने, ' थे। मिल समवयस्क बालकों के साथ एक बात भी .गलीचे, अनेक प्रकारके गले, चीनी, कपड़े, धातु, फल, ' करने नहीं पाते थे। इसलिये पिताको सदा पुत्रके मसाले, तम्याकू, नमक, ई और घोका व्यवसाय जोरों शैशवावस्थामुटभ कौतुहलको मीमांसा करनी पड़ती कलता है । यहां इष्ट इंडिया रेलवे का एक स्टेशन है। ! थी। पिता पुत्रको केवल पाठ अभ्यास करा कर ही मिल ( जान स्टुअर्ट)-सुप्रसिद्ध अंगरेज दार्शनिक । चुप नहीं हो जाते थे, पुत्रको प्रच्छन्न प्रतिभा उद्दीपित इन्होंने लण्डननगरमें सन् १८०६ ई०में जन्म लिया था। करनेके लिये पुस्तकके कठिन अशोको स्वयं समझ इनके पिता जेम्स मिल् एक गरीब किसानके लड़के थे। लेनेको कहते थे। किन्तु किसी धनवान स्त्रोके साहाय्यसे पडिनवर्गफे विश्व प्रातःकाल और संध्याको जेम्स पुत्रको साथमें ले विद्यालयमें उन्होने शिक्षा पाई थी। इसके बाद वे अन्य । कर टहलनेके लिये निकलते थे। ये कहानियों द्वारा ' रचनाफे काममें लगे । उन्होंने पहले अनेक शास्त्रोंका सारगर्भित उपदेश देते थे। जान स्टुअर्ट साध्या समय अध्ययन कर पाण्डित्य लाभ किया था। उनके यनाये | पिताके गणितशास्त्रका अध्ययन करते थे सही, किन्तु हुए बहुतसे उपादेय अन्य विद्यमान हैं जिनमें | इस विषयमें उनका जरा मी अनुराग न था। रहलनेके भारतवर्षका इतिहास अन्य अतीय प्रसिद्ध है। इस अन्य समय भी पुत्रसे पढ़ा हुआ पाठ पूछते थे। इस तरह में उन्होंने भारतियों के साथ आन्तरिक सहृदयता और थोड़े ही दिन में प्रेममय पिताके परमयत्नसे राबर्टसन समवेदनाका परिचय दिया है। ये स्वाधोनचेता तथा ह्य म, गोवन, प्लुटके और बर्नेट आदिका इतिहास पढ़ स्पष्टपादो थे । साधारणके मनोरञ्जन करने लिये अपने | गये। जेम्स टहलनेके समय मौखिक धर्मनीति, राज. मतका परिवर्तन नहीं करते थे। नीति मनोविज्ञान और सभ्यताका इतिहास-सम्यन्धीय '; उनकी ये सारी गुणावलो और प्रकृति पुत्र में अधिक जो कौतुहलोद्दीपक उपदेश देते थे, उनको दूसरे दिन आ गई थी। जान स्टुअर्ट मिल उनके. ज्येष्ठ पुत्र हैं। टहलते समय ही पूछ लिया करते थे और पुत्रको अध्य- जान स्टुअर्टके लिये उन्होंने जैसी शिक्षाकी सुथ्यवस्था । यनप्रवृत्ति वलयती बनाने के लिये मिलसे नाना शास्त्रोंके कर दो.थो, पैसो सबके भाग्य नहीं होती। नेहमय' सारगर्भ प्रसङ्गकी अवतारणा करते थे। इसके अनु- परिजनयर्गको शान्तिशीतल गोद में बैठ कर जान विद्या- । सार मिल घर लौट आनेके वाद पिताके मुखसे सुने