पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६५६

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मिल (जान स्टुअर्ट) हुआ। गुलामो प्रथाको ले कर अमेरिकाबालों में गृह । फरनी चाहिये। अगरेज-जाति दार्शनिक, अप्रगण्य विवाद उपस्थित हुभा था। उसमें गुलामी प्रधाके मिलको खो कर सुगभीर शोकमें निमजित हुई थी। . विरोधियों के साथ इङ्गलैण्डके महानुभावोंने जो सहानु. मिलका दार्शनिक मत या नीतिशास्त्र ।। भूति प्रकट की थी, उनमें मिल अन्यतम है मिलने पुनः . १६वीं शताब्दीके अभ्युदयकालमें जिन महा. युनाइटेड स्टेट्स या युक्तराज्यके पक्षमें अपना मत प्रकट ! रथियोंने प्रतीच्यचिन्ताराज्यमें राष्ट्रविलय उपस्थित फर सहदयता और विज्ञताका परिचय दिया था। । किया था, जान स्टुअर्ट मिल उनमें अन्यतम हैं। उन्हों- मिलने अपनी लेवनीसे अनेक प्रन्धोंको रचना की ने जिस समय जन्म लिया था, उस समयसे कुछ समय है। उन्होंने पहले सन् २८२३ ई०में Traveller और ! पहले मानवीय स्वत्य स्वाधीनताके सिद्धसेवक मान्सोसो Chronicle नामक पत्रिकामें कई लेख लिखे। दार्शनिक भल्टेयर और प्रजातन्त्र प्रतिनिधि वाग्मिमघर इसके बाद उन्होंने अन्यान्य पत्र-पत्रिकाओंमें भी मिरावों आदि मनस्वीगणकी स्वाधीनचिन्ता प्रसूत उन्मा कितने ही गवेपणापूर्ण तथा गम्भीर ले 1 लिखे । तर्क दनामय उद्दीपना मन्त्रको अवश्यम्भावी फल, फ्रान्सके शास्त्र और नीतिशास्त्रको छोड़ कर सन् १८५६ ई०से राजसिंहासनको चूर्ण और राजशक्तिको उन्मूलिन कर लगायत १८६१ ई०के भीतर उन्होंने स्वाधीनता (Liberty), लोमहर्पण फ्रान्सीसी विशवफी सृष्टि कर यूरोपमें प्रजातन्त्र- हितवाद (Utiliterianism ) और स्त्री जातिको अधो- शक्तिकी साम्यसूचक विजयघोषणा कीर्तन कर रहा था। नता Sulijjection of Women नामको तीन पुस्तकों। इसी तरह जब मैककाल, पेटालोजी, विलहम, मन. की रचना की। हम्योलट, गेटे, भलटेयार और चेन्थम आदि महामहो. सन् १८५६-६०में प्रतिनिधि शासनप्रणालो (Repre- पाध्यायोंकी स्वाधीन चिन्ताके उद्दीपन-मन्त्रसे चिर- sentative Government ) और हेमिल्टन द्वारा रचित प्रचलित प्राचीन चिन्तारूपी दुर्गसे धुआं निकल दर्शनकी समालोचना की। रहा था, पीछे अगाध मनीषी मिलकी इसके बाद उन्होंने नेचर (Nature) योर एकजामिनर | स्वाधीनता और हितवादके महामन्त्रसे चिन्ता- • ( Examiner ) नामकी पत्रिकाओं में कई लेख लिखे। । राज्यका कुसंस्काराच्छन्न सुदगढ़ प्राचीन दुर्ग प्रज्वलित मिल अपने अन्तिम जीवन तक अन्ध-रचना तथा संशो- हो कर ध्वंसको प्राप्त हुआ। देवता और असुरगण गन्त. धनके कार्यमे लगे हुए थे। इस समय इन्होने माले की, हित होने लगे । ईश्वरका चिरप्रतिष्ठित न्यायका सिंहा. पाक्षिक समालोचनो पत्रिकामें कितने ही लेख लिखे।। सन केयल कविकल्पित सा प्रतीत होने लगा । प्रजातन्त्र- अपनी पत्नीको मृत्युकै वादसे हो मिल वर्षमें दो वार' शक्तिकी विजयदुन्दुभि सर्वत्र निनादित होने लगी। अब- आ कर लण्डनमें रहने लगे। उनकी लेखनी और जिह्वा । लायें युक्तिके शस्त्रसम्पातसे गुलामीके टूढ़ वन्धनको परहित साधनसे कभी भी पराङ्मुख नहीं हुई। अधिः छिन्न भिन्न फर साम्य स्वाधीनतामयो विजयधैजयन्तो कांश समय ये गानो पत्नीको फनके पास रह कर दिताते उड़ा कर समाजश्टङलाके विपर्ययसाधनमें तसत्प थे। यहां उन्होंने एक कुटो बना लो थी। पत्नीके शोक- हुई। मिलका नीतिशास्त्र हो उन्नतिशील १६वीं को उसको गुणावलीको स्मरण कर घटाते थे। इसके शताब्दीके इस भावनीय विलयका प्रवर्तक हैं। वाद् सन् १८७३ ई०के मई महीने में यही उगकी मृत्यु मिलके दार्शनिक मतका विश्लेषण करनेसे उसमें ३ हुई। विद्वजगत्ने उनके वियोगमें यथित हृदयके साथ विषय सुस्पष्ट भावसं दिखाई देते हैं। इन्हीं विधाराके समवेदना प्रकट की थी। रमणो-संसारने उनके लिये अपूर्व सम्मिलनसे मिलका चिन्तामोत गठित हुआ था। मजस्र आंसू बहाये थे। निलने भारतवासियोंके प्रति । प्रथमतः उनके पिताके दी हुई धर्म और नोतिको कितने प्रस्तावोंकी रचना कर पालियामेएटमें आन्दोलन । शिक्षाका योज उनके हृदयमें पुरित हो चुका था। किया था उसके लिये मारनपासोमावको कृतज्ञता प्रकट मिल सब तरहसे पिताको दोसासे दीक्षित थे।