पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६५७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


पिन (जॉन स्टुअर्ट) ५८७ समाजको अन्यान्य शक्तियां उनके चित्त पर अपना प्रभाव । प्रकृति के नियम और विवेक बुद्धि आदिको अभ्रान्त 'फलान सको। जेम्स के हृदयमें धर्मचिन्ताके स्वाधीन । युनिसे परिचालित होता था। चेन्थमने अन्तमें यह भायका सबसे पहले उदय हुआ था। उन्होंने ईश्वरके । प्रकट किया, जो जगत्का अत्यन्त हितकर है और असंख्य स्वतःसिद्ध अस्तित्वमें विश्वास न कर उसे प्रमाणसापेक्ष लोगोंके सुखका कारण है अर्थात् जो कार्य सर्वापेक्षा स्वीकार किया था। किन्तु घे चार्वाक आदि प्राचीन : अधिकतासे लोगोंको सुख प्रदान करता है, वही मनुष्यका दार्शनिककी तरह नास्तिक नहीं थे। पयोंकि, उन्होंने । धर्म और कर्तव्य है यही ईश्वर के नियम और अभ्रान्त कहाँ है, कि इस परिदृश्यमान जगन्का आदि कारण : युक्तियों के द्वारा अनुमोदित है। युक्ति और प्रमाणके अज्ञात और अज्ञेय है । उन्होंने अपने पुत्रको शिक्षा दी थी, सिवा अन्धविश्वास-प्रसूत काल्पनिक प्रकृति-नियमका कि ईश्वरने संसारमें वैषम्यकी सृष्टि की है । घे रोग, शोक पालन करना मनुष्यका कर्तव्य नहीं। मिलने वेन्थमसे आदि वितापोंसे मनुष्यको अनवरत दग्ध कर रहे हैं। वे हितवाद ( Principles of utility ) और सुग्यवाद "कभी भी सर्वशक्तिमान् नहीं हो सकत । उनका सदा (Doctrine of happiness ) इन दोनों मतकी शिक्षा न्यायवान् गौर दयामय होना असम्भव है। इस तरह ये ग्रहण की थी। ये दोनों मत ही उनके हृदयमें कित खंटान धर्मके विरोधो हो उठे थे। उनका मत यूनानी हो गये थे। पं ही उनके चिन्ता-राज्यके पथप्रदर्शक दार्शनिकों के अनुरूप था। घोयिक ( stoie ), पंपिक्यू- । हुप । हितवाद और सुनवाद ही उनकी नोतिके नियामक 'रियन ( Epicurian) और सिनिक (Cynic) इन तीन थे। इसी धारणाने उनको बिजलीको तरह नये यल- दार्शनिक मतके सारसे उनके मतको सृष्टि हुई थी। किन्तु से बलवान् किया था। आनन्द तथा परार्थपरताको ही उन्होंने सुखों में तृतीयतः-मिलके प्रति हेरियट टेलर नाम्नो स्वाधी- सर्वोच्च बासन दिया है। नता- प्रया विदुपी रमणीका आधिपत्य । मिलने अपनी • पिताका यह मत मिलके हृदयमें बैठ गया था। उसके | जीयनीमे और उनके जीवनचरित्र के अन्य लेग्वको ने सिवा मिल प्लेटोको पुस्तकमें लिखे सरिम धर्ममतोंको | आनी पुस्तकों में मुक्त भएठसे स्वीकार किया है, कि 'वृदयङ्गम कर नीति-मार्गमे आगे बढ़े थे। न्यायपरता, उनका भविष्य जीवन उनकी विदुपो स्त्रोके प्रभायसे परिमिताचार, सत्यप्रियता, उद्यमशोलता, दुःखसहि नियन्त्रित हुआ था। ष्णुता आदि सद्गुणोंको सटिसने धर्मपदयाच्य कहा विवाह होनेके बाद उन्होंने जो पुस्तकें लिखी है। मिलने भो इन सब वित्तत्तियों को धर्मका उच्च | चे पतिपत्नो दोनों की लिखी हुई है। मिस टेलर भी सोपान माना था। ऐसी वैसी स्त्री नहीं, वरं वड़ो विदुषों थी । और तो द्वितीयतः-येन्धमाके नये मतने हो १८वो शताब्दीके। क्या, कभी कभी वे मिलके रचित विषयों का संशोधन कर अभ्युदय झाल में प्राचीन सिद्धान्तके मूलमें कुठाराघात देतो थी। मिलके जीवन कोमलतर वित्त वृत्तिका किया। बन्धा मिलके पिताके मित्र थे। पात चीत जो विकाश दिखाई दिया था, वह पलिमके सिवा और . और उनकी पुस्तकों को पढ़ कर, आदि कई कारणों से | कुछ नहीं था। टेलर मिलकी गृहिणी वन करके उनके मिल येधिमके नये प्रतित चिन्तामार्गमें घुसे थे। जीवनको केन्द्रवरूप हा गई थी। इस रमणीको अगाध 'पेन्थमको व्यवहारशास्त्र नामकी पुस्तकने पश्चिमीय जगत्में स्वाधीनप्रियता और समाजद्रोहिताको वासना मिलके नवयुगको अवतारणा को थी। मिल शैशवावस्थासे | चित्तमे बैठ गई थी। इसका प्रमाण इनके लिये पर- इसो मन्त्रमें दीक्षित थे। इसलिये घेधिमके प्रवर्तित। यत्ती ग्रन्थों से मिलता है। हितवादका (Utilitarianisin) अंकुर मिलके चित्त इस तरह मिलके चिन्ताराज्यमें उन दिवाराओंने मिल में प्रकाण्ड पक्षमे परिणत हुआ था। चेन्धमकं पहले कर एक अभिनव विप्लवकी सृष्टि कर दी थी 1 मिलन जिग २८यों शताब्दीके अन्त तक पाश्चात्यनीतिशास्त्र, पुस्तकों को लिखा है, उनमें तकविद्यां ( Logic ). हितवाद