पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६६९

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५६६ पिसरी-मिसल . भारतके भिन्न भिन्न स्थानमें इसका भिन्न भिन्न | लिये वहुत उपकारी है। यदि ढकार माती हो, तो नाम है । जैसे,—बङ्गालमें-मिथ्री, मिछरी ; पक्षावमें- मिसरोके शरवतमें नीबूका रस डाल कर पीने से उकार. चीनी वा भूरा, मिश्री; तामिल-कर्कण्ड, तेलगू- का आना बंद हो जाता है। रातको गरम जलके साथ मलकण्ड , कनाड़ी-कलकण्ड; मलयालम-फुलकण्ट मिसरी मिला कर खानेप्से सदों और कवजियत दूर हो सिंहलो-शकरी संस्कृत-एएड, सितोपला, शर्करा, जाती है। मिमरी और कालोमि को एक साथ सिद्ध मत्स्याएडी ; अरवी-नवात, खन्द ; पारसी-काण्डे- फर पान करनेसे सर्दीका पता नहीं रहता। धूपमें सफर सफिद; फन्दे---सुपेद, अगरेजीमें-Sugar Candy I करनेवाले मुसाफिरों के लिये मिसरी बहुत फायदेमंद मिसरी वनानेका तरीका-ईसके रससे गुड़ और है। यह प्यास नहीं लगने देती और थकावटको दूर गुड़से चीनी बनती है। अपरिष्कृत चीनीको जल में डाल करती है। फर आंच पर चढ़ावे । जब जल फूटने लगे तब उसमें मिसर (सं० पु०) देशभेद ।। थोड़ा दूध डाल कर उसके कुल मैलको बाहर निकाल | मिसरूमिथ-पदार्थचन्द्रिका और विवादचन्द्र नामक ले। मैल बिलकुल निकल जाने पर चीनीका रस परि- स्मात प्रत्यके प्रणेता। इन्होंने राजा चन्द्रसिंहको पली कार और सफेद हो जायगा । अनन्तर उस गाढ़े रस लछिया ( लक्ष्मी) देवीके आदेशसे १४वीं शताब्दीके -( Syrup) को मट्टीके कृजे या फतरे में डाल कर ठंढो मध्य भागमें उक्त दोनों अन्धों की रचना की। जगहमें छोड़ दे। कुछ समय बाद ठंड लगनेसे यह रस मिसरोटी (हिं० स्त्री०) १ मिस्से आटेको नी हुई

जम जाता और उसमें दाना पड़ जाता है तथा वर्फकी रोटी। २ फंडे आदि पर सेंक कर बनाई हुई चारी,

तरह वरतनके जैसा उसका भाकार हो जाता है। यही | अंगाकड़ी। मिसरी फजे या कतरेके रूपमें बाजारों में विकती है। (मिसल (अ० स्त्री०) सिपंख धर्मसङ । गुरु नानक ... वर्तमान समयमें विज्ञानविद् परोपीय सौदागरोंने प्रवर्तित धर्ममार्गानुचारी सिपख सम्प्रदाय पिछले चीनीके कारवार में लाभ देख कर भारतमें ईग्नको खेती- समयमै धनको लालमा उन्मत्त हो कर एक दलपतिफे की ओर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने भारतवासियोंके | अधीन एक एक विभिन्न दल या मिसल रूपसे संगठित मट्टीके फड़ाहके बदले में विभिन्न प्रकारके लोहेके कड़ाहों हुआ। फो सृष्टि की है। इनमें (क) yans heated by ) | गुरु नानफके बाद क्रमसे अगद, अमरदास, राम-

fire, (ख). rans heated by steam, (ग) Film | दास, अर्जुन, हरगोविन्द, हरराय, हरेकृष्ण, तेगबहादुर
evaporation, (घ) acuum pans, (ङ) Bath | और गुरुगोविन्दसिंह मादि गुरुपद पर अमि.

evaporators, (च) Fryo's concretor आदि | पिक हुए थे। ऐसा नहीं, कि वे केवल धर्म और उल्लेखनीय है। नीतिपालनमें हो लगे हों, किन्तु उन्होंने युद्धविग्रहमें भी

लगभग ६० वर्ष हुप, येलर साहदने मिसरोकी सांचे में लिप्त होते थे। गुरुगोविन्दसिह धन्दा नामक एक

ढालनेके बाद उसमें जो मैला रस रह जाता है उस वैरागीको उत्तराधिकारी बना गमे। इनके अधीनमें रह .रसको दानेदार यनानेको विशेष चेष्टा की, बल चेष्टा ही फर सिपख-सम्प्रदायको राजनीतिक शृङ्खला समधिक नहीं की, वरन् उसमें ये कामयाव भी हुए थे। उन्होंने जो गुढ़ हुई थी। दन्दाने उकैती कर जो प्रभुत अर्थ उपार्जन तरीका निकाला उसीका अनुसरण कर Chevallier किया था, उसीके लोममें पड़ कर तथा ईयान्वित हो कर गौर १८७६ ई०में Alrers Reynoso ने अपनो चेष्टामें | उनके पीछेके सिपख नेतामोंने अपने अपने दलकी स्वतः सफलता पाई यो। । न्वतारक्षा करते हुए इफैनीसे अर्थ सञ्चय किया और . . धैद्यकमें मिसरोके अनेक गुण बतलाये गये हैं। कई मिसल या दलके सदार-वंश पीछे सामन्तराजफे तुरतकी तैयार की हुई मिसरीका शरबत दुर्घल व्यक्तिफे । रूपमें परिगणित हुए । जब पायकेशरी सरदार...,