पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६८१

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मित्र ६०५ हेलियोपोलिस. ( Heliopolis ) या सौर नगरको ) उपनिवेशिकोंने पहले भूमध्यसागरके तीफे नाना स्थानों- • प्रतिष्ठा कर सूर्यपूजाका प्रचार किया। इन लोगोंने पोछे | में वास किया । उनमें लिवू (fibu .) जाति पीछे गोसेन (Goshen) भूमि पर अधिकार कर मिसकी लाइवियस नामसे परिचित हुई। अफ्रिकाका प्राचीन . निम्न-भूमि पर अधिकार जमाया और सिरिया! नाम लाइविया है। प्राचीन मिसकी पौराणिक कहावत तक अपना राज्य फैलाया । सूर्य-कन्या पास्त ( Pasht) | इस तरह है, कि उनके पूर्व-पुरुष दक्षिण-पूर्व से मिसमें • या यास्त ( Bast) उनको अधिष्ठात्री देयो है। आये थे। इनका आदिनिवास तानेसार ( raneter ) '. पाथरस या पाथमिमगण उत्तरके विभागमें रहते , या देवभूमि है। - , थे। होलिमो या सूर्यनगरवासी पीछे मेमफाईट ( Mem । आदि राजा मेनाके राजत्यकालमें सभ्यताका यिकाश phite ) नामसे प्रसिद्ध हुए। पूर्व समयमें अरवी निम्न देखनेसे मालूम होता है, कितने सहस वर्ष पहले मिसमें मिसके देवता सेट ( Set या Typhon ) को पूजा करते | मनुष्योंकी वसती हुई थी, इसका अनुमान लगाना नठिन थे और पश्चिम पशियामें सर्वत्र सूर्यको ही पूजा प्रच- है। लित थी। जो हो, द्वापर युगके अवसान मनाने अपने सुशि. । प्राचीन मिस जातिको कहायते' कुछ वाइबिलको क्षित और पराक्रमशाली सैनिकों के साहाय्यसे ५००४ वर्ष वर्णनासे मिलती जुलती है। असुर जब पापाचार। ईसासे पूर्व (दूसरे मतसे ७००४ वर्ष ).मिसूके सिंहासन फैलाने के लिये तत्पर हुए, तब सूर्यदेव (Hor-em kha) ने पर आरोहण किया। उन्होंने समाजमें विलास-यासना. युद्ध में उन सभीको पराजित किया। असुरगण परा• की सृष्टि कर पृथ्वीमें पापका चीज वपन किया। मिसके -जित हो कर कुशस्थलमें अर्थात् दक्षिण अफ्रिका ( यही । इतिहासमें उसके पूर्ववत्ती जनसमाजका रूप इस प्रकार 1. पया कुशद्वीप है ?) भागे। पीछे यही निप्रो नामसे ऑकित हुआ है। . .. विख्यात हुए. निनोको ही हबशो कहते हैं। सुरों में या ____ मनाने ही सरलतामय मानय जीवनमें पापका प्रबाद

. देवताओं में कितनोंने ही श्वेत द्वीप और अफ्रिकाके उत्तर प्रवाहित किया था। उसके पहले मनुष्य जाति प्रकृति

भूमध्यसागर तट पर जा कर उपनिवेशकी स्थापना के शिशुकी तरह बनमे, पर्वत कन्दरों और तराई आदि मी तामाहु (.Tamahu-तमोहा १) इनके अप्रगण्य जगलों में वास करती थी। मनुष्य अयनसम्भूत बनके ,फल-मूलोंको भक्षण कर अरण्य जन्तुकी तरह स्वच्छन्द- ...अनम या आम् (Amn) के वंशधरोंने पशिया-खएड. रूपसे विचरण करते थे। यह दिगम्बर मानवदल में प्रवेश कर पेलेटाइन, सिरिया, एशिया माइनर, अरव, सरलताको प्रतिमूर्ति था। और कालदिया आदि देशोंमें जा कर उपनिवेशोंको झरने और नदोका जल हो जिसफा पौनेका जल स्थापना की। चतुर्थ जाति शाशुकोन निर्दिष्ट स्थानमें न था, वन-फल ही आहार या, दिग् ही जिसका अम्बर था, रह कर बेदुइनरूपमें परिणत हुई । इस जातिके लोग प्रायः चन्द्र ही दीपके प्रकाश थे, नीलाम्यर जिसकी धांदनी अरवमें ही रहते थे। मिसके जातितत्त्वमें इन्हीं प्रधान था गृक्ष, लता, पशु, पक्षी जिसके सहचर थे और विशाल चार जातियों का उल्लेख है। विश्वमन्दिर जिसका यामगृह था, उनमें किस लिये ___आज कलकी वैज्ञानिक मण्डलीने वाइविलकी बातों परस्पर द्वेष भावका सञ्चार होता? . '. की उपेक्षा कर और यहांके किस्से कहानियोंको परवाह न क्रमशः यह मानवदल सभ्यताको : साइमें उच्चतर कर सुसंस्कृत विज्ञानानुमोदित प्रमाणके साहाय्यसे यह सोपान पर चढ़ा । तरु लता द्वारा आच्छादि य.फुअफुटि .. सिद्धान्त किया है, कि काकेशीय ज्ञातिके मानव सुदूर- और पर्धेतके निविड़ कन्दरको छोड़ कर पशु चमें वत्ती प्राचीन काल में ऐशियासे मिसूमे गये थे। निमो' द्वारा शिविर (शांमियाना). तय्यार कर वसुन्धराको .. जाति.या स्म्र लाइट, और अरव जातिसे यह पृथक है। पोठ पर विचरण करने लगे। उस समय उनके .. rol. XVII, 152