पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६९

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हनफियोंके देवताको बहुत्यकल्पना स्वीकार करने | आत्मनायन उत्सग कर दिया था, इसलामधर्म प्रपत्तक हुए भी उन्होंने अल्लाको हो एकमात्र ईश्वर मान लिया। महम्मदने भी ठीक उसी प्रकार अपनो अभोट यस्तुको था। देवशफ्तियोंकी यह एकत्वकल्पना उनको प्रशाका : जनसाधारणमें वितरण करने के लिये कमर कसी।महम्मद .फल नहीं, बलिक संस्कारका फल था। यही मत मागे को इस नये धर्मशा प्रचार करने में और भी दो तरहसे चल कर महम्मदीय-इस्लामधर्मके नामसे विख्यात हुआ।। सहायता मिल गई। एक तो यह है, कि हनिफीगण उस इस. ज्ञानमार्गका अवलम्बन उन लोगोंने तर्क, | समय अपने नये धर्मको प्रतिष्ठाफे लिये एक पैगम्यरकी मीमांसा अथवा युक्तिसे नहीं, पल्कि अपने अपने विवेक- तलागमें थे; दूसरे यहदियों के मन ममाके आयिर्माय. पलसे ब्रह्मचारी हो समस्त सांसारिक कामनाओंको की आगा लगी थी। दोनों मतावलम्बियोंने भिन्न भिन्न

तिलांजली देते हुए किया था। लोगोंने इसे मूर्तिः भायसे इसी एक महम्मदकी शरण ली। दनफियोंने

पूजा विरोधो माग समझते हुए मो पापप्रक्षालन आदि। इनके वचनको ईभ्यरपोपत और अनाभा यहदियोंने उसे कार्यों के लिये उपयोगी जान कर स्वीकार कर मूसाका बचन समझा। इस प्रकार यह दोनों विभिन्न लिया था। सम्प्रदाय महम्मदीय धर्मदीक्षा लेने के बाद ममशः एक - इस प्रकार वारयिलमें लिखे हुए इग्राहिमका घममत धर्मावलम्बी हो एक ही जातिमें मिल गये। ( Ideas of Law and Gospa) फिरसे जनसाधारणमें महम्मदीय धर्ममत प्रचार होनेके पहलेको महम्मदफे .फैल गया, नया धोरे धीरे सव कोई प्राचीन धर्मसे नवीन । योगसाधन तथा मुक्तिलाभके सम्बन्यः एक अलौकिक धर्ममें थाने लगे। । घटना इस प्रकार मुनी जाती है-होरा पर जिस . धर्मान्तरप्रयासी महम्मद भी इसो समय अपने साला | समय महम्मद चित्ति निरोध कर एच्छ तिराय योग- परका वन-नीफलके साथ आ कर दानिफ दलमें मिल साधन कर रहे थे, उसी समय रमजान मासको एक गहर गपे। यह धर्म इन्हें हृदयानुकूल मालूम हुमा । अतपय रातको स्वगींग दूत जिग्राइल ( Gaorlal ) इनके पास उन्होंने उस विश्वव्यापी सर्व जगदीश्वरको प्रणाम आया । महम्मद उस समय सोपे हुए थे। दूसने अपने किया तथा अपने हदयको गूढ़ व्यथा सुनाते हुए कर्तव्य पाससे पक रेशमी-पव निकाल कर इनके सामने र . पथ पर इद रखनेको प्रार्थना की। । दिया। मयलिपि पढ़ने की क्षमता उन्हें मने पर मी इसके बाद.मृद्ध सैदइयन अमरके पपका अयलम्बन इतने उन्हें दुवारा पढ़ने कहा। इस प्रकार मूसा, पीशु कर महम्मद अपना समय निर्जन दौराशैलङ्ग पर ! आदिको ना पहले उमी दूनसे मदम्मदको पान प्राप्त योगसाधनमें विताने लगे। इस प्रकार यों भगय । हुभा और तमोसे पे पैगम्बर ममझे जाने लगे। 'भजन करनेके बाद इनका योग मिद्ध हुमा। हनिफो। ४० वर्षको अवस्था में महम्मदने ज्ञान वितरण करने. मत इनके घरहीमें दखल जमाये हुए था। अप कभी तो के लिये फिर मो जनसमाजमें प्रवेश किया। सबसे ये मानसिक उत्तेजनाके समय ईश्वर के दर्शन करने और ! पहले उन्होंने अपने परियारको दो दोदित किया। इनको कभो ईश्वर प्रेममें तलोन हो जाते थे। इस प्रकार । प्रियतमा पत्नी सदोजा, वरका, मायुवनर तथा घरे उनका हदय सुगमोर भ्यर प्रेममें दब गया। । मामाली येन् मायि तालेय मादिने इनके धरानु. ...इस प्रकार चौयोसय वर्ष में वरको पास महम्मद । मोदित याश्य पर लह हो कर इन्हें मसाका दूत पैगम्बरफे नामसे विख्यात हुए। भर पे साधारण | समझा। योगीकी तरह गिरिगुहा में छिपे नही रहते, बलिक अन इसके बाद प्रायः मीन पर तक पूर्वप्रचलित मति- समाज में सत्यधर्म अयात् इस्लाम ( मुकि-धर्मका पूमक मत यालों ता नयोन मत-यालोपे. बीच घोर तर. प्रचार करने के लिये बाहर निकल परे । वाइपिल-वर्णित पितई चलता रहा। एक दिन महम्मदने हासमयंगोय सिमामाने पयित धर्मप्रचारफे लिपे जिस प्रकार गणमान्य सपनोंको भपने यहां निमसित किया और Vol. III. 18