पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७००

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मित पृष्योग किमी देशमें नहा है। इस दानवको विराट | मिसके शिल्पनेपुण्यको देख कर विस्मयविमुग्ध हो रहे मूर्ति मिसी शिल्पका अद्भुत निदर्शन ( नमूना ) है। हैं। मिसके शिल्पयितानने ही फिनिसीय और यूनान शिल्पीने २००६ाय उच्च एक पहाड़ काट कर एक प्रकाण्ड, जातिको शिल्पविज्ञानका पाठ पढ़ाया था। . । दानय मूर्ति का निर्माण किया था। यह कुछ अंशोंमें अनेक मतीत कीर्तियां नष्ट हो चुकी । फामयाइस नरसिरको मूर्ति के समान है । इसकी भौंह भीषण गोर के आक्रमणमें मिसके कितने ही मन्दिर नष्ट हो गये। मुम्ब मनुष्यको सरद और नीचेका माग सिंहकी तरह है। उसके पाद वलीफा ओमरने ३६००० भट्टालिका मिसकै धर्मशानमें यह बागुयल और विद्यावलका अपूर्व और ४००० मन्दिर नष्ट किये और देयदेवियों को उठा कर मिश्रण है। मनुष्यका गस्तक युद्धिको खान और पशुराज गरवमें ले गये। . , सिंहका गरीर योरत्ययोधक है। स्किङ्कस्को मूर्ति पहले इन अव विप्लयोंको सदन करते हुए भाज भी मिस कारोको प्रतिनिधि और मिसको रक्षाकारो देवरूपमें वर्णितः अपने शिलालेपों और चित्रलिपियोंसे महिमान्वित हो हुई थी। जिसके होरेनयू (Iloremku) यूनान में हम रहा है। चिस् ( Harmnalis) रूपसे माना गया है। स्फिङ्कस् मिसूके पुरातत्त्व, धर्मशास्त्र और रोतिनीतिकी पर्याः दोनों मूत्तिके हो अनुरूप प्रतिनिधि है। स्फिाङ्कसकी लोचना करनेसे मिसके यधिवासियोंको मार्योंकी मन्य- भीषणाति सैकड़ों वर्ष पार कर आज अतीत फोतिको तम शाखा कहने में जरा भी अत्युक्ति नहीं होती। घोषणा कर रही है। इसका शरीर १४० फीट ऊंचा मनीच्य महापुरुप एक घायसे इस पातका समर्थन करते है। चियुकसे ललाट तक यह ३० फीट चौड़ी है. दोनों है। जो सब अप्रेज प्रत्नतत्त्वयिद् भारतफे घेदिकयुग. पैरोंका अन्तर ५० फीट है। दोनों पैरोंफे घोच एक बहुत को २००० ईसा पूर्व पतलाते जरा भी कुण्ठित नहीं होने बडी पट्टालिका तैयार हुई है। इस मूर्तिफे देखनेसे मिस्के और अंग्रेजोंके भावों भरे भारतीय प्रत्नतत्वविद भारत- निल्पनेपुण्यको चर्मोत्कर्षता सहज ही जानी जाती है। चर्पके प्राचीन इतिहासको ईसाके जन्मकालसे पीछेका छोटी छोटी मूर्ति बनानेसे सन्तुष्ट न हो यहाँके । बताते हैं, ये बेचारे मिसमें ७००० वर्ष पहले ही वैदिक शिल्पियोंने पर्यंत काट कर हो एक विशाल मूर्तिको युगका प्रभाव देख विस्मित होंगे। प्राचीन मिसके साथ पनाया। इसको अपेक्षा शिल्पोत्कर्ष गौर क्या हो । प्राचीन भारतका बहुत सीसादृशा है और पूर्ण रूपसे सकता है? विचार करने पर यारंवार यही कहने की इच्छा करनी है, यूनानी धर्मशास्त्र में स्फिङ्गस् बहुत कुछ रूपान्तरित कि मिस भारतकाएकमात्र उपनिवेश है। मिसके अधि. हो गया था। उसका मुख खोकी तरह, पूछ सांपकी यासियोंने वैदिक धर्मनीतिका यीज ले कर मिसमें रोपण तरह, शरीर फुत्ते की तरह, पक्षा सिंहको तरह है। इस किया था सहो, किन्तु यह सभ्यता वृक्ष विजातीयभूमि- मतिकी तरह साफराकी प्रतिमूर्ति भी अत्यन्त पडी है।! में पदमल ही नहीं सकता। होतो पोको यह भो एक विशाल पर्वतको काट कर ही तयार की सम्पताकी समालोचनाके तराजू पर रखने पर गा गई है। जाता है, कि मिसकी सभ्यता यापयविशानके पिपुल रामेससयंशीय रानाोंने जिन सौधमन्दिर और वैभवसे पूर्ण रहने पर भी यहाँको समाजपद्धति सना- समाधिमन्दिरों को बनाया था, घे सब रामेसियाम तन धर्मशाखको हदमित्ति पर प्रतिष्ठित ना हुई थी। नागसे विएशत है। इस मन्दिरका फैलाय २२५ फोट। स्येच्छाचारिता और स्वतन्तता दी यहांके सांसारिक है। इसका अधिकांश ध्यंस हो गया है। मुखको निदान थी। धर्मनीतिका दूढ़ गढ़ मिस. मलतया पण्डित सहन्न सहस यामे प्रायोन। यासियों को किसी समय वांध न मका । उनके देवनागी कीर्ति स्मृतिस्तम्मका भाविकार कर रहे हैं। पीसी ने मानययत्सलतासे प्रेरित हो कर मनुष्यको शिल्प. शताब्दीफे मुसम्म वैज्ञानिकगण भी ७००० वर्ष पहलेफे विष्ठानको शिक्षा दी और मुग्योपार्जनका पथ दिखलाया