पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७०२

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मिहिरदच-गोटिंग गजनरङ्गिणी, गिहिरकुलका विवरण इस प्रकार मोड़ (हिं० स्रो०) सङ्गीतमें एफ सरसे दूसरे सर पर जात । आया है--मिहिरकुल काश्मीर के एक राजा थे। इनके समय मध्यका अंश इस वसूबोसे कहना जिसमें दोनों पिता का नाम यमुफुल था। अपनो या रतायो लिये ये मरों के योनका संबंध स्पस्ट हो जाय और यह न जान प्रमिल थे। इनके शासन-कालमें पकरे भेड़े को तरह मानव पड़े कि गानेवाला एक परमे फूद कर दूसरे स्वर पर इत्या होती थी! पृद भीर बालकको हत्या करना इनके चला आया है। मोंडकी जरूरत किसी स्परसे केवल ' लिये कोई बात हो न थी। एक दिन इनकी महारानी | उसके दूसरे परवत्ती वर पर ही जानेमें नहीं पड़तो, यतिक सिंहलदेशक कपड़े का कुरता पहने हुए थी 1 कपड़े में पैर किसी एक स्वरसे किसी दूसरे स्पर पर जाने अश्या फा चिह्न बना हुआ था। महारानीके स्तन पर पैरफा उतरनेमें भी पड़ती है। स्वर्गको मूछनाओं का उधारण चिद्र देश राजा क्रोधका पारावार न रहा, परन्तु मीडको महायता हो होता है। देगी यानोंसे घोन, कन्चुकी (मन्तःपुररक्षक)-के कहने पर राजाका सन्देह दूर रवाय, सरोद, सितार, सारंगी भादिमें मोड़ पाहत अच्छी दुमा । पीछे उन्होंने फौरन सिंहलदेशको जीतनेके लिये तरह निकाली जाती है, परन्तु पियानो और हारमोनियम प्रस्थान किया । सिंहलराजको राज्यच्युत करके यादि मंगरेजी ढंगके याजों यह किसी प्रकार निकल ही मिहिरफुलने यहां एक प्रबल राजाको प्रतिष्ठित किया । नहों सकती। विद्वानों का यह भी मत है, कि मोड़ सिंहलसे लौट गार मिहिकुलने चोल द्रविड़ फर्णाट गादि निकालने के लिये स्त्रियों के कण्ठ की अपेक्षा पुरषोंका कण्ठ शोंको जीतने के लिये प्रस्थान किया। किन्तु यहांके बहुत अधिक उपयुक्त होता है। अधिवासी राजो मिहिरफुलके आनेसे पहले ही देश छोउ मोना (दि० कि०) हाथोंमे मना, मसलना। फर भाग गये थे। मिहिरयुल काश्मीर लौट आये और मीडासौगो (दि० रनो० । मेदासींगी देखा । यहां उन्होंने मिहिरपुर नामक एक विशाल नगर तथा मोाद । भ. खोल) किमी कार्यको समाप्ति आदिक श्रीनगरमै मिहिरेश्वर नामक शियको स्थापना की थी। लिये नियत समय, भवधि | २ फागगारके दण्डका भारतवर्ष, गक, हृण आदि शब्द देखो। । काल । फरकी अवधि । मिहिरदत्त -काश्मोर राजरानी प्रकाश देवीके गुप। मोगादो ( हिं० वि०), जिसके लिये कोई समय या (राजस० ४१८०) | अवधि नियत हो। २ जो कारागारमें रह चुका हो, भो मिदिरपुर ( ०सी०) मिदिरकुल प्रतिष्ठित एक मानीन जेलमा रह कर मजा भुगत चुका हो। नगर। इसका वर्तमान नाम मिदिरौलि है। | मामादीहुंसी (द्वि० स्त्री० ) घर gगड। 'जिसका रुपया मिहिरति (सं० की ) भगनरायके पुन । तुरंत न देना पडे, यल्कि एक मियत समय या अयधि मिदिराणा ( सं० पु. ) मिहिरेणाणपयने स्तूपन इनि पर देना पड़े, यह हुण्डो जो मिती परने पर भुगता मिहिर अण पम् । शिय, महादेव । जाय। मिहिरेश्वर (म.पु.) मिहिरकुल प्रतिष्ठान शिव मीचना (हिं० मि०) यन्द करना, मदना । मिहिलारोप्य (सं० मो०) दक्षिणपथ अवस्थित एक नगर- मीजा (दि० सी०) १ अनुकलता। २. स्वगाय। ३ का नाम। सम्मनि, राय। hti ) मध्यप्रदेश निकाला एक प्रकार- मांज्ञान ( १० रनो०। तुला, नगत । २ तुलारागि। को अरहर । दमक दान पुल बड़े होते हैं और पाक कुल संगमाओं का योग, जामा मीना देगा। देग्ने यार होती है। मोटना ( हिं० कि० ) मीनना देग्यो। मोजना ( हिक दायोंमे गलना, ममदना । २ महंन मीटिग (मो .) परामर्श आदि लिये Rare फरना, दलना। । पर यहुनरी लोगांका जमायदा, अभियन।