पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७०५

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मोन ६३१ स्रोनित ; शुक्रसे देखे जाने पर मुशोल, नृत्यगीतादि मोन राजि हरपतिके रहनेसे यालक घेद और अथ. कुशल और स्त्रियोंका अति प्रियपान तथा गनिसे देखे जाने शास्त्रवेत्ता, साधु और सुहृदों का पूज्य, राजाका नेता, पर जातवालक अहितकर, विकलदेह, कामातुर, नोन टोर। धनी, सर्वदा सन्तुवित्त, दर्पित, स्थिर, उद्यमवाला कुरूप स्त्रीवाला होता है। और विख्यात होता है। मीन राशिस्थित गुरु यदि • यदि राशि भोर राशिपति तथा चन्द्र वलयान रहे, तो रविसे दिखाई देता हो, तो राजविरोधी, सर्वदा परितृप्त उक्त राशिफल होते हैं, अन्यथा फलमें नारतम्य देखा ! तथा धन और भाप्तवन्धुविहीन, चन्द्रमासे दिखाई देने जाता है। पर स्त्रियोंका प्रिय, मानो, धनो और ऐश्वर्यघाला, मङ्गलसे मोन राशिमें महल रहनेसे जातबालक रोगी, देखने पर संग्राममें जखमी, कर, परपीड़क और स्त्रो कुत्सित संतानवाला, प्रयासशील. आत्मवन्ध तिर- पुत्रादिविहीन; बुध के देवने पर राजमन्त्री वा राजा, कृत, मायावी, ठग, विवादी, फुटिल, यार वार शोकातुर सुत, धन और मौभाग्ययुक्त, सभी मनुष्योंका आनन्द- गुरु और यिप्रका अवज्ञाकारी, सर्वदा असाधु मृत्ति- कर तथा अतिशय रूपमा शुक्रके देखने पर सुखी, धन- सम्पन, इतिवेता, ज्ञानयान और श्रुतिप्रिय होता है। वान्, पण्डित, दोपशून्य, उत्तम भाग्यवान् और स्त्रीयुक्त मीनस्थ मङ्गल रविसे दि ई देने पर पूजनीय, सुन्दर तथा शनिसे देखने पर अतिशय मलिनदेह, भोर, दोन, और दुर्गम स्थान में भी गृहवामोकी तरद रहनेवाला। सुखभोगरहित और प्रविहीन हुआ करता है। '; तथा कर स्वभाववाला, चन्द्रमासे दिखाई देने पर विकल । मीनराशि शुक्रका तुझस्थान है। इस स्थान में शुक्र • देह, फलहकारी, बुद्धिमान, पण्डित और राजाके विरुद्ध सबसे वलयान् माना गया है । इस राशिमें शुक्रके रहनेसे काम करनेवाला। बुधसे दिखाई देने पर मेपायी, शिल्पा दिखा देने पर भावी शिल्प जातवालक अत्यन्त गुणवान्, बहुत धनी, गनुकुल- और पण्डित; बृहस्पतिसे दिखाई देने पर सुन्दर स्त्रीवाला, विजयी, लोकविख्यात, श्रेष्ठ, राजप्रिय, दाता, सजनप्रति. • सुखी, विजयी, धनी और व्यायामशील शुक्रप्से दिखाई देने पालनकारी, चतुर्वेदवेत्ता, वंशधर, और मानवान: मोनस्थ पर स्त्रियोंका प्रिय, उदारमरुतिका, विषयी और सौभाग्य शुक्र रविसे देखे जाने पर अतिशय क.८ अत्यन्त शर, संपन्न; शनिमे दिखाई देने पर कुत्सितदेह, उदार, युद्ध पण्डित, धन और सत्यविशिष्ट, अतिप्रिय और विदेश .प्रिय, मूल, असुखी, धनहीन और परोपकारी होता है। गमनरत चन्द्र के देखने पर विख्यात, राजपुरुष, अतिशय मीन राशि बुधके रहनेसे माचार और शोच-निरत भोगी, लुध और बलहीन ; मङ्गलके देखने पर स्त्रोद्रोही, देवतारत, सन्तति-विहीन, दरिद्र, परिहासरन, दूसरेके । सुखी, श्रेष्ठ और गोधनयुक्त ; युधके देग्नने पर आमरण, धनसे धनी और विख्यात हुआ करता है। भूषण, अन्न, पान और मिधिन-धसनादियुक तथा अर्थ- ..मोनमें बुध रह कर यदि रविसे दिखाई देता हो, तो शाली, गृहस्पतिके देखने पर हस्ती, घोड़े और गो- शूर, प्रमेह रोगी, अग्नि पीड़ित और शान्तस्थमाववाला | धनादियुक्त, अनेक सन्तानवाला और सुखी, शनिके चन्द्रमासे दिखाई देने पर लेखक, सुकुमार शरीरवाला, देखने पर बहुत धनी, रोगी और शूर तथा मोनमें शनिके विश्वासी,माननीय और सुखी; मङ्गलसे देखे जाने पर रहनेसे यज्ञप्रिय, शिल्पविद्याविशारद, शान्तस्यभाय, लिपिकर्मकारी, धनहीन, राजभृत्य और धनवासियोंका धनयान, बिनयो, रनपरीक्षक और धर्म-थ्यवदाररत होता नेता; बृहस्पतिसे दिखाई देने पर मेधावी, शास्त्र, राज- है। मन्ती, धनरक्षक और लिपिककर शुकसे दिखाई देने | मीन-राशिस्थित शनिके रविते दिखाई देने पर पर. पर कन्या और कुमारवर्गका लेखकावार्य, धनी, रूपवान् । दारानिरत, धनो और विख्यात होता है । चन्द्रसे दिखाई . और शौर्य युक्त; शनिसे दिखाई देने पर दुर्ग या अरण्य. देने पर मातृदोन, सरित और धनी । मङ्गलके देखने पर घासी, बाभोजो, दुष्टस्वमायका, अतिशय मैला फुचेला वातव्याधि रोगयुक्त, लोकदोहो, प्रयासशील और रहनेवाला और सर्वकार्यहोन होता है। निन्दित स्वभायबाला ; बुधके देखने पर राजाके असा