पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७४२

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मोरकासिप लहा येवन चुकाया। म ममय कर्नल फेलके रहने भवनमें थाश्रय लिया। मंगरजी सेनाने राजभवनों पर पटनामेन्यका अमाय दूर करने के लिये इन्होंने आग लगा दो और गांव को छार. मार कर डाला। एक दूसरे राजमविय नयनायको लाम सपपेके साथ . १७६१०में फरासी सेनापति मूसों-ला द्वारा परि- विहार मेजा। इसके बाद इन्दोंने कम्पनीले प्राप्यमैले चालित सेनादलको ले कर शाह मारमने बडालकी ओर ६७ सपो कालिमबाजारफे अध्यन बारसनफै पास भेज़ , कदम बढ़ाया। विहारसे ३ कोस पश्चिम मोहानी नदी. दिये। म रुपयेमे २॥ दाग रपये मान्दाजकै फरासोमो. के किनारे सोयान नामक छोटे गांव में दोनों दलमें मुठ- युद्ध गर्गक टिपे भेजे गये थे। भेड़ हुई। बगरेज सेनापति फनाकके अगत् कोमलसे पर्ट माना राजम्य उगाइनमा मार जो बंगरेजोंके , मुसोल वन्दा हुए । अंगरेजो ने यादशाह के साथ हाथ मौंपा गया था उममेगमा तिलकचंद वडे अप्रसन्न : मन्यि का प्रस्ताय करके सितारायको पटना भेजा। हुए। ये सैन्यम ग्रह फर युद्ध के लिपे बिलकुल तैयार किन्तु इससे कोई फल न हुआ। आसिर री फरयरी- हो गये। इस समय दक्षिण और पश्चिमके अद्धवाधीन को दोनों दलमें फिरसे लड़ाई छिदी। हतभाग्य शाह गजे और जमोदार स्वाधीन होने की कोनिमें थे। आलम इस बार पराजित हुए और बड़े दोनमायसे माय माय शिपमाटफे अधीनस्य महाराष्ट्रीय दलके उप- सन्धिको प्रत्याशासे अंगरेजी छावनी में आये। इस द्रयमे मेदनीपुर के कुछ सामन्तोंने प्रकाश्य मायसे स्वेच्छा लड़ाई में मोरकासिमके सेनापति राजा राजवलम और मार आरंभ कर दिया था। गाइजादा जो बङ्गाल! राजा रामनारायणने बड़ी वोरता दिखाई थी। पर घड़ाई करने पर थे उसमे तथा महाराज नन्दकुमार- इभर बीरभूमिका शासनभार महम्मद तकी खांके को दुईमनोय आकाङक्षाम बगालमें अशान्ति फैल हाथ सौंप कर नवाव मोरकासिम पटनाको चल दिये। गई थी। उन्हें भारी सदेह था, कि यादशाह मालम और कर्नाकसे मौरसारको अफम्माम् पदच्युति, मोरकासिमका भेंट करते समय उन पर कही विपत्तिका पहाट न टूट राज्यप्रदण और विदेशी यंगरेजोंका वर्तमान व्यवहार पड़े । पटना आते हो इन्होंने नजराना और बहुमूल्य देर कर देश के नेता बहुत अमन्तुष्ट और उत्तेजित हो रहे । उपहार दे कर यादशाहको संतुष्ट किया और उनसे थे। नये नयाव मीरकासिमने धीरभूमकं जमीदार आसद्' 'मारिजा'को उपाधिफे साथ बङ्गाल, बिहार और उड़ीसा- जमान बांसे महायता मांगों, किन्तु उनकी आमा पूरी की सूपेदारो प्राप्त फो। गई। इस पर नयाव यमुन अप्रसन्न हुए। एक सामान्य . फरमएटल उपफूलमें फरासी युद्धको शेष करके जमोदार को ऐमो उपेक्षाको ये मद म सफे। उन्होंने कर्नल फूट अंग्रेज सेनानायक हो कर फलक आपे । फौरन अपनी सेना तथा शामिगवाज्ञारफे. अंगरेज-सेना फर्नाकके साथ नयाद मौरकासिमका पटता न देज पति मेसर यार्फ, परिचान्दिन मेनादलको ले कर बर्स कौन्सिलके सदस्योंने इन्हें १७६१ को २२पों अभिलको मानको पाना कर दी। उधा भासद जमान भी अपने पटना भेज दिया। इस समयसे कासिमके सा फूट सगृहोत मेनादलको लेकर का या निकट एक दुर्गम भऔर कर्नाकका जो मनोमालिन्य था यद विवादमें परि. ' स्थानमें पाई दया का नगार और अंगरेजी सेनाको णत हुमा। राजा . . निकट ' पाट जोदने लगे। दोनों पक्ष मसान लडाई छिडी हिसाव किताव ले कर पद चला युपमें असद जमान राजदुए भार सेना तितर वितर घर माह मालमके' हो गई। परगा दुर्गमें जा कर इम पार उम्। माल १७६००में प्रगपुरफ } भोर सिपहा मला राजा नपावके पिगदए। लगातार तीन चार रोका .. नमी . वाद गरी मनानं दार ता का राज.। दुर्गम प्रा नदी