पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७४३

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पीर कासिम अपने वचनको पूरा न किया जिससे आमन्त्रित जमी- यूरोपीय ढंगसे सिखाये गये गुर्गन खाके अधीनस्थ सिपाही, दारों तथा अन्यान्य प्रधान व्यक्तियोंका अपमान हुआ, ) गोलन्दाज और अश्वारोही सेनादल जब जमीदारोंका तब उनके क्रोधका पारा बहुत चढ़ गया। ये सोंकी | दमन करने निकले, तक वे सयके सब आत्मरक्षाका उत्तेजनासे उत्तजित हो एक दल सशस्त्र अनुचरको ले | उपाय द ढ़ने लगे। कमगार खां पर्वतमें जा छिपा । कर नवावकी छायनी पर आ धमके। अंग्रेज सेनापतिके युनियादसिंह और टिफारीराज फतेसिंह बन्दी हुए तथा इस दुर्य हारकी यात नवावने गवर्नर मान्सिटाट के पास भोजपुरके पलवानसिंह और अन्यान्य दुद्धप जमोदारीने लिख भेजी। सुजाउद्दौलाके राज्यमें आश्रय लिया । उन भागे हुए जमो. . भान्सिटार्ट के आदेशसे कूट और फर्नाक कलकत्ते दारोंको सम्पत्ति ले कर मुसलमान सामन्तोंने आपसमें आनेको बाध्य हुए। नचावका अभिप्राय सिद्ध हुआ। बांट ली। अंग्रेजो सेनाके परनासे अपस्त होते हो मोरकासिम इस समय सीताराम नामक राजस्व विभाग कर्म- राजा रामनारायणको हिसाब-कितावफे लिये बहुत तंग नारीने नये नवावके ऊपर अपना आधिपत्य जमाया था। करने लगे। साफ तौरसे हिसाव न धुझानेके कारण | दीवान सोताराम धीरे धीरे राजा सीताराम नामसे मश- कासिमने उन्हें कैद कर लिया। केवल कैद ही नहीं, हर हो गये। सभी कार्यों में ये रिशयत लेते थे। आखिर परन् उन्हें यहुत सताया, यहां तक कि उनके राजाप्रासाद। नवावफे विरुद्ध पड़यन्त्र करने के अपराध घे मारे गये। फो भी लूट लिया : राजामासादसं कुल मिला कर सात इसके साथ साथ और भी चार उच्च श्रेणोके नयाव-कर्म लाख रुपयेको सम्पत्ति मौरकासिमको हाथ लगी थी। चारीको प्राणदएड मिला था। अगरेज गवर्नर नवाव. राजाके यन्धुवर्गकी भी तरह तरहकी यन्त्रणा दे कर उनसे के मित्र थे, इसलिये इस वातको ले कर कोई गड़बड़ी न सात लाख रुपये वसूल किये। जिन्होंने किसी तरह | उठी। भी रामनारायणको सहायता को थी उन पर घोर अत्या. इसके बाद नयाय मीरकासिमने वङ्गविहारकी जमों- चार किया गया था। जागीरदार राजा मुन्दरसिंह, दारो बन्दोबस्त और सैन्यसंस्कारको मोर ध्यान दिया। उनके मित्र होनेके कारण कैद किये गये । साथ साथ दिनाजपुरके राजा रामनाथके मरने पर मौरकासिमने उनके दीवान और कोपाध्यक्ष गङ्गाविष्णु भी उसी परके । दूत भेज कर राजस्वका दावा किया। गजपुल कृष्णनाथ पधिक हुए। रामनारायणके भाई धोराजनारायण तथा और चैधनाधसे नजर आदि ले कर उन्होंने ५७६३२४) चराध्यक्ष राजा मुरलीधर विशेष लाञ्छित हो फेदी यन। रुपया अधिक कर बढ़ा दिया। राजशाहोमे भो ८ पर मुर्शिदाबाद भेज दिये गये। पटनाके कोतवाल लाख रुपये को वृद्धि हुई। नदियाराज कृष्णचन्द्रको पक्षमें महम्मद शाख और प्रधान कोठियाल मनसारामशाहको भो अच्छा नहीं हुआ। भो सता कर उनसे मोटी रकम ली गई। सरकारी इस प्रकार घडविहारका राजकर प्रायः दुना बढ़ा कर या रामनारायणका गुप्तधन पतला कर मौरकासिम नवाब मौरकासिमषांने दोदण्ड प्रतापसे प्रायः तीन वर्ष पटनाफे सभी धनी नागरिकीको लूटनेसे बाज नहीं । तक राजस्य उगाहा था। राजकार्यमें उनकी विशेष आ। दक्षता रहने पर भी अपरिणामदर्शिता और अयथा यत्या. रामनारायणको पटना यन्दो रख कर मोरकासिमने | वारका भो उनमें अभाव नहीं था। उनका राजत्य सितायरायको निर्यातन करनेका सङ्कल्प किया, किन्तु एक शृङ्खलाबद्ध अत्याचार माव था, उसे किसी हालतमें अग्रेज गवर्नरको रुपासे वे मुक्तिलाभ कर अयोध्याको | राज्यशासन नहीं कर सकते। चल दिये। ____ मवाय मौरकासिम अंगरेज-सदस्योंके योच जो मनो- विहारमें विरुद्धदलको ध्वंस और गजकोप पूर्ण मालिन्य था, उसे अच्छी तरह जानते थे। कौन्सिलमें कर मोरकासिम जमीदारोंका दमन करने अप्रसर हुए। भान्सिटाका पक्ष दुर्यल देख इन्होंने यग्रेजोंसे दूर रहना Vol, AVII. 167