पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७४८

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पीर कासिम HERE परामय और गिरिया रणक्षेसको ! राजमहल पहुंचे। पयोंकि, मोरकासिम लियागमें पराजयमै मर्माहत दो मोरकासिम अपनी प्रियतम बेगम, पहले होमे युद्धको नैयारी कर थे। यहांसे ये लोग दाम दामी भोर मयान सम्पत्तिको मार सुलेमान और मुरको रवाना हुए । फिलेदार भरवलीको विश्वास राजा गयतरायफे तस्यायधानमें रोहिनास गढ़ भेज कर घातफनासे मुझेर दुर्ग भी १७६३ को यो भर निश्चन्त हुए । इसके बाद उन्होंने उधुमानाला ज्ञानेका तूबरको शन के हाथ लगा। पिचार किया। किन्तु उनके कठोर हृदयको परोचनासे घा पटना जानेके कुछ समय याद ही पढ़यन्त्र. गोदो दो दिनोंक, अन्दर मुझेरमें एक महा अनिष्टकर कारी नयावको मेनाने घेतन मांगनेफे होलेम गुर्शनराफे हत्याकाण्ड हो गया । उनके दुकुममे रामा रामनारायण, शिविरमें प्रवेश किया और उसे मार डाला। इस प्रकार पुत्र गमेत राबवलम, धनकुयेर जगन् सेठ दोनों भाई, शत्रुपक्ष कुमन्त्रणाजालमें समोको जोय मीरकासित मपुरा पद राय राजा उमेदराम योर फतेसिंह, युनियाद. को मात्रा पर पानी फेर गया। मंगरेजोका यि मी सिंह भादि गिदार हिन्दु बन्दी जमीदार यही करता उनके प्रति दिनों दिन पढ़ने लगा। मातिर मोरकासिम से मार ले गये। ने गुस्से में भा कर पटने में जितने अंगरेज-फेदो थे उन्हें ___ मान्तर मोर कासिमने दल-बलके साथ भागलपुर घड़ी निष्ठुरतासे मरया डाला। दुराचार समरून रस नपानगरकी यात्रा की। यहांसे ये उधुमानालाकी रक्षा पाशवका भार लिया था। यो अस्तुपरके सवेरे एलिस, के लिपे सेना भेजने का प्रबंध करने लगे। घर ४यो | हे, लुमिरन आदि नौ योर भी यापुर भेज दिये गये। अगस्त को गिरिया रणक्षेत्रका परित्याग कर मगरज. पिशायफे हायसे दुयल मयलामोंने भी ग्ला नहीं पाई। सेनापति आइमस और मोरजाफरगा यो अगस्तको एलिसफे दुधमुहें बच्चे भी मार डाले गये । इस प्रकार उधुमा गाई पाम को पालकोपुर नामक स्थान का यो अपबरको चेदालमातुन मामाद में जितने मग. धमके। अगरेजो सेनाने गदी माग हो फर युगं पर माफ रेज थे, सभी उस पिनाचफे हायक शिकार बने, एक भी मण किया। चारो मोर से गोला बरसने लगा, किन्तु छुटने नहीं पाया। कममे कम ५० कर्मधारों और सौम दुर्ग प्रागीर में जरा भी नुकसान नहीं पहुंचा। ऊपर सैनिक मारे गये थे। गोरजाफरने साये देकर मार्कर और माराटुन नामक इस लोमहर्षण हत्याकाण्डका संग्राद पाकर मेर .. भाने जमाईफ दो मेनानियों को कायू कर लिया। भारमस और मौरजाफरने दलाल माथ पटनाको उन्ही पापन्ससे दोपहर गतको गंगरेजी सेगा मा | प्रस्थान किया। मौरकासिम न लोगकि पहनने पाले पर दुर्ग घुमगा। याहर और भीतर अंगरेजी सेनाका दो दुर्ग-रक्षाका भार कुछ मिपादियों पर छोड़ भाग गदै कड़ा पहरा रहा। मोकार उडी दुई मुसलमानी सेना थे। ये रोदनाम दुर्ग परियार और धनरस्नको लेकर मत फेहायसे यमपुरको मिधारी। जो पोडेसी मोरसे, अयोध्या-नयावा यहां भाप लेनेकी भामामं कमंगाना दुर्गद्वार तथा मेनु पार कर भागने की चेष्टा कर रहे थे पे दी भार बल दिये। घोर मुमाउरोलामे प्रालित गमा भीर मार्गरको मेगा शिकार बने। इस प्रकार प्रयापे. मनुमार उनका स्वागत किया। मन दलको सैन्यसमराका हाम फर माराटुन भीर ___ मौरकासिमक उपचार उपक्षारमे प्रमनदी तथा मैरक मारर भने अधिरत दुगंधारी नगरेमकि. दाप सम.के. सुशिक्षित सेनायलसे सदापना पाकर मसाला पंज किया। बड़े उत्साहित हुए । उनको भाईयरफ, मायर मानालाका परास. दाद मारकासिम मुगको दोनेको उपागा गौर गुमाधान कारिपास होका भागे। यहां से उन गज फैदियों की साधले गुम अयसर नदीक देश कर ये मौरकागिमग गाय मदन पर पटनाको यातारदा पर मंगरेश सेमा- मिल अंगरेजोका मुकाबला करने मले। फर्ममामा महो पतिन युनधिकार से कर यो सितम्बरको पार कर उन्होंने भागीरा मनासा पटना में