पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७५६

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६०२ पोर जाफर हुए और बदला चुकानेका मौका ढूढ़ने लगे। उनके । आन पड़ी। क्लाइवका अभय-पत्र पा कर दुर्लभराम दलवल आत्मोय स्वजन और अनुचर भो आशानुरूप अर्थ न के साथ यहां पहुंचे। अगरेज कम्पनीका पावना जो २३ पानेसे चिढ़े थे। उधर सेना भी असन्तुष्ट थी, कारण लाख रुपये था उसमसे आधा राजकोषसे और भाधा उन्हें याकी वेतन नहीं मिला था। अव मोरजाफरको वर्द्धमान भीर कृष्णनगराधिप तथा दुगलोफे फौजदार चारों ओरसे विपदुने घेर लिया। उसे उर था, कि कहीं | अमीर घेगके खजानेसे चुकानेको कहा गया। , राज विद्रोह भी न खड़ा हो जाय । . नवाद राजा रामनारायणको विहारसे भगाना चाहते मोरजाफर और दुर्लभराममें गाढ़ी मित्रता थी। थे, किन्तु दुर्लभराम और क्लाइवने ऐसा नहीं होने मोरजाफरके नयाव होनेसे जव दुर्लभने कोई लाभ न | दिया। इसी समय महाराष्ट्र दलपतिने २४ लाख रुपपे देखा, तब यह भी नई चाल चलने लगा : नवावको उस | चौथका दावा करके नयावके पास आदमो भेजा। इसी . पर सन्देश हो गया। इसी सन्देह पर उसने विहारके समयमें नवावके साध रामनारायणका मेल हो गया। राजा रामनारायण और मेदिनीपुरके फौजदार राजा पटनामें मीरजाफर खांका दरवार बैठा। मौरन नाम- मानसिंहको अपने वशपे लानेका सङ्कल्प किया । पूर्णियाके मालको पटनाफा नवाय बनाया गया। रामनारायण मोहनलालका लड़का कैद किया गया । पोछे दुर्लभराम. डिपटो नयाची पद पर स्थायी रहे। इस उपलक्षमै उन्हें को हो इस पड़यन्त्रका मूल जान कर वाव उसका ७ लाख रुपये देने पड़े थे। इसके कुछ समय बाद हो काम तमाम करने में लग गया । दुर्लभराम ताड़ गये और मीरजाफरको वादशाहो सुवेदारी सनद मिली। इसो उन्होंने आत्मरक्षाके लिये काफी सेना इकट्ठी को। समय फ्लाइव भी ६ हजारी मनसबदार और उमराव परन्तु अगरेजोंने दोनों में एक तरहसे मेल करा दिया । । हुए थे। मीरनने सिराजके भतीजे मिर्जा महसीको सिंहा इस समय राजा नन्दकुमारका नंयाध मीरजाफरके सनका फएटक जान गुप्तभावसे मार डाला। कहते हैं, साथ अच्छा सद्भाव था। राजस्व-विभागमें दक्षता कि मीरजाफर भी गुणधर पुत्रके साथ इस वालकके | रहनेके कारण वे दावान दुर्लभरामके सहकारो. घा हत्याकाण्ड में शामिल था। क्योंकि, इसके पहले ढाकाके | खालसाके पेशकार थे। उनकी फुमंत्रणासे नवाव और नयोष सरफराज खांके दूसरे लड़के अमानो खांको मोरन दुर्लभरामको विपदमें डालनेको कोशिश करने सिंहासन पर बिठानेकी कोशिश हो रही थी। वहांके लगे। नायव-नवायने मंगरेज-कोठोके लोगोंकी सहायतासे दुर्लभरामका काम तमाम करनेमे नवाधका उद्योग इस राष्ट्रविप्लवका दमन किया। देख फ्लाइयने उसे कलकत्ते ले जानेको कहा। नवायके १७वीं नवम्बरको नवाबने राजमहलको ओर यात्रा ससैन्य रवाना होनेके ८ दिन बाद ही मोरनके देशसे फो। लाइव भी उनसे आ मिले। नवाधकी, सेनाके सेनाने दुर्लभरामने मकानको घेर लिया। स्काफटनकी पहुंचने पर विद्रोही-दलने शान्तभाव धारण किया। यहां | चेपासे सेनादल निवृत्त हुआ। पोछे फ्लाइवने नवापफे रह कर ही इसने खादेम होसेन खाँको पूर्णियाका फौज 1. पड़पन्त्र-जालसे उन्मुक्त कर राजा दुर्लभरामको सपरि- दार बनाया। खादेमने यहाँका विद्रोह दमन तो किया, वार कलकत्तं भेज दिया। पर,उसके अत्याचारसे पूर्णियावासा यहुत तंग मा __नवाय दिनों-दिन अर्थाभावके कारण विपन्न हो रहे गपे। थे। अंगरेज-कम्पनीका ऋण चुकाने के लिये उसके , विद्रोहको शान्त देख क्लाइयने अंगरेजी कम्पनीका | राज्यका अच्छा अच्छा अश जब्त कर लिया गया था। जो प्राप्य था उसे मांग भेजा । साथ साथ उन्होंने यह भी जागार विभागके निम्नतम कर्मचारी चूनौलाल और सूचित किया, कि ये नवादके साथ पटना जानेसे लाचार मणिलाल राजस्व यमूल कर थोड़ा हिस्सा दरवारमें मेज . हैं। इस समय दोचान राजा दुर्लभरामको आवश्यकता , देते और वाकी हड़प कर जाते थे। इधर सेनाओं का बाकी