पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७५७

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पीरजाफर ६७३ घेतन चुकानेके लिये २ लाख रुपया अंगरेजोंसे कर्ज | याट जोह रहा था। मौरन और अंगरेज-सेनादल जव लिया, किन्तु इतनेसे क्या हो सकता था। घोरे भोरेनवावके साथ था मिला, तव शाहआलमने फिरसे - सेनाविभागमें अशान्ति फैल गई। विदोहिदल पड़यंत्र. पटना पर चढ़ाई कर उसे जोत लिया। इस कारी मीरजाफरके प्राण लेनेको उतारू हो गये। मुह- समय पूर्णियासे खादेम होसेन खां वादशाहके साथ 'मके समय चक्रान्तकारियोंने उसका काम तमाम करने मिलनेके अभिप्रायसे रवाना हुआ। कप्तान नफ्स का सङ्कल्प किया। खानाहादी खां पकड़ा और मोरन । और सिताबरायने खादेमको ससैन्य मार भगाया। के हुकुमसे मरवा डाला गया। केन्ड और मीरनने बहुत दूर तक उसका पीछा किया । में शाहजादा शाह आलमने वालकी। इस समय मूपलधारसे वर्षा आरम्भ हुई। चार दिन चढ़ाई कर दो। राजा रामनारायणने शाहजादेका पक्ष | लगातार यात्रा करने के बाद श्री जुलाईको पनाघातसे लिपा, जान कर मीरजाफर दलवलके साथ राजमहल | मोरनको मृत्यु हुई। पहुंचा । लाइवके घुद्धि-कौशलसे उपद्रव शान्त हो । प्रियपुत्र मोरनको मृत्युसे नबाव मोरजाफर शोक- - गया। इस उपकारमें नवायने कलकत्तेको जमोदारी! सागरमें इन गया । एक तो चारों ओरसे रुपरेको मांग, काइयको जागीर-सरूप दे दी। आगे चल कर इसी उसके ऊपर अंगरेजको प्रतिपत्ति, प्रमुत्व और अयथा "जमींदारीको ले कर क्लाइव और इ-इण्डिया कम्पनीमें | अर्थशोपणने उसे पागल बना दिया। अय राज्य फरनेकी . झगड़ा हो गया था। उसको विलकुल इच्छा न रही। 'उसी सालके अगस्त मासमें बोलन्दाज और जंगी जहाज क्लाइवके स्वदेश जानेके बाद हालयेल कलकत्ताके मागीरयो में दिखाई दिया। नवायके उपदेशानुसार चूचड़ा- अध्यक्ष हुए। उन्होंने अन्धकूणहत्याकी तरह मोरजाफरके "के गोलन्दाज गवर्नर उसे दूसरी जगह भेज देने को बाध्य अकर्मण्यादि दोपोंको नाना वोंमें चित्रित कर अगरेज- हुप अक्तूबरके प्रारम्भमें नवाबने कलकत्ता पदार्पण | सदस्यमण्डलीके निकर उपस्थित किया। हालवेलके किया। इसी समय लाइव विलायतको चल दिये। सिद्धहस्तसे रचित मीरजाफरके दोपोंकी विस्तृत काहिनी अब गोलन्दाज जगी जहाजोंने फिरसे भागीरथी में लंगर तैयार होनेके समय मीरनकी मृत्यु हुई। इस समय डाला । मोरजाफरको इस बार विपक्ष दलके अनुकूल देख पड़यन्त्र-जालमें विजड़ित हो कर किस प्रकार मीरजाफर क्लाइव भोलन्दाजोंके विरुद्ध खड़े हो गये। युद्ध में मोल खाँ बङ्गा सिंहासनसे उतारा गया था, यह मीरकासिमके न्दाजोंकी हार हुई उनका यथासर्वस्व अंगरेजोंके हाथ लगा चरित्रमें अच्छी तरह आलोचित हुमा है। ओलन्दाजोंने यो दिसम्बरको अङ्गीकार-पत्रके साथ मोरकामिम सा देखा। अपनो भूल खोकार कर युद्धके खर्च स्वरूप दो लाख गिरिया और उधुमानालाके युद्ध के पहले से ही मोर- , रुपया दे कर छुटकारा पाया। इसके बाद १७६० ई०के । कासिमके औद्धत्य और विद्रोहभावको देख कर मंग . फरवरी मासमें उन्होंने स्वदेशकी यात्रा की। रेजोंने फिरसे बङ्गालके सिंहासन पर मोरजाफर पाको फ्लाइयने विलायत जानेके कुछ समय बाद ही शाह- | पैठाना चाहा था। १७६२ ई०को १०यों जुलाईको जादाने दूसरी बार यङ्गाल पर चढ़ाई कर दी। नवादी दोनोंके बीच सन्धि-पत्र लिखा गया। वयसरकी लड़ाई- सेनाके साथ नवीन वादशाही दलका धमसान युद्ध | के बाद मोरकासिमको फुल आशा पर पानी फेर छिड़ा । युद्धमें मौरन घायल हुआ। पोछे वाद- गया। बड़े दीनभावसे यह अपना जीवन व्यतीत फरने । शाही सेनाने रणक्षेत्रसे ५ कोस दूर हट कर छावनी लगा। डाली। यहांसे ये मोरजाफरको बंदी करने लिये १७६४ १०को स्यों अश्नुवरको मेजर मनरोने वफमर- मुर्शिदाबादकी ओर चल दिये। सौभाग्ययगतः इस को यात्रा की। युद्धके एक दिन पहले मोर कालिमके समय मोरजाफर यर्द्ध मान अञ्चलमें महाराष्ट्रीय दलको ! भाग जाने पर मोरजाफर ग्यां फिरसे यहालको मसनद Vol, xvll. 169