पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७६२

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मौरट इस भूतएडमें ६८ नगर और ८२०६ प्राम लगते हैं। यह गगाके घटने बढ़नेके कारण उनके गर्भ में विलीन हो नगरोंमें मीरट नगर और सेनाबाद. अलीगढ़ (फोइला), गया है। ईसाके जन्मसे पहले यह खण्डहर यहां सहारनपुर, खुर्जा और हाथरस नगर प्रधान हैं । इममें | मौजूद था। २२ हजार लोग यसते हैं। हस्तिनापुर जैसा पुराना नगर न होने पर भी मीरट- मोरट ( मेग्ठ )--युक्तप्रदेशका एक जिला। इसके को प्राचीनता गौर प्राधान्य इतिहासमें दिखाई देता है। उत्तर मुजःफरनगर, पश्चिम यमुना, दक्षिण चुलन्द शहर | जिलेके योचमें यह नगर वसा है। यहांसे दिल्लो तक और पूर्वमें गङ्गानदी प्रवाहित हो रही हैं। क्षेत्रफल रेल लाइन गई है । गाड़ियां माती जाती हैं । सिवा इसके २३५६ वर्गमील है । मीरट नगरमें इसकी सदर अदालत उत्तर-पश्चिम भारतके प्रायः सभी समृद्ध नगरों में आने ' रहती है। गङ्गा और यमुनाके वीचमें रहनेके कारण जानेको सुविधाके लिये यहांसे रास्ते गये है। प्रेजोंके इसकी जमीन समतल और उर्वरा है। यह स्थान बहुत अधिकारके याद छावनी कायम हो जानेसे यहां पुराने जमानस अन्तर्वेदी नामसे तथा मुगल-शासनमें यूरोपियोका शुभागमन हो गया है। इससे नगरकी बहुत दोआव नामसे पुकारा जाता था। बडे घड शस्यश्यामल उन्नति हो रही है। क्षेत्रोंके सिया कहीं कहीं यन नडाल भी दिखाई देता इस मोरट प्रदेशकी तरह भारतके और कहीं का ऐसा है। इस जिलेके भनेक स्थानों में आम्रचारिकायें प्रकृति प्राचीन इतिहास नहीं मिलता। वैदिकयुगमें मार्य लोग को लोला कुशलताका परिचय दे रही है। गंगा और अन्तर्वेदो में बसे थे। उसी प्राचीनतम समयसे यहाँको यमुनाको वालुकामयो भूमिमें खेती-वारी नहीं होती। श्रीवृद्धि हो रही है। रामायण पढ़नेसे मालूम होता है, जय वायु प्रवल घेगसे प्रवाहित होती है, तब वाटू एक। कि अयोध्या, वैशाली और मिथिला जनपदमि सूखे और जगहसे उड़ कर दूसरी जगह जा एक स्तूप दन चन्द्रवंशी राजाओंका आवास था। इससे यह स्वीकार जाता है। करना होगा, कि आर्य लोग पहले दोभायमें रह कर शक्तिशाली हो कर पूर्वाफी ओर बढ़े थे। जिस समय गंगा और यमुनाके सिवा यहां हिन्दन नामको और महाभारत हुआ, उस समय भी मौरट बहुत समृद्धि एक नदी है । वर्षा ऋतु- इस नदोके द्वारा नार्यो में माल सम्पन्न नगर था । पोंकि, दिल्ली नगरो (इन्द्रप्रस्थ के एक जगइसे दूसरी जगह ले जाया जाता है। मिया इन निकटका यह मीरट नगर ही कुरुवंशी राजाओंकी राज- नदियोंके कितने ही यालुफामय निम्नस्थान है जो वर्षा ऋतु में छिछले जलसे भरे रहते हैं और अन्य ऋतुओं में धानी हस्तिनापुर विद्यमान था। हस्तिनापुरीका कोई सूण जाने हैं। इन जलाशयोंसे यहांको ग्येतीमें बहुत प्राचीन चिह्न न मिलने पर भी यहांके आधिवासी गगाके उन्नति हुई है। अनूपशहरकी नहर ढालू गगाके निकट निकटवर्ती जिस स्तूपको हस्तिनापुरफा खण्डहर बताते के प्रदेशोंको मी'चती है। इससे यहांका कृषि कार्य बहुत | हैं, वह निःसन्देह हस्तिनापुरका खण्डहर मालूम होता । है। महाभारतका युद्ध समाप्त हो जाने पर यहां राजा उन्नत हो रहा है।