पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७६५

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१८१ पोरतोजक-मोरन • पहले बना था। यहांके लोगोंके महमे सुनाई देता है,, विशेष पढता थी । प्रति माममें इमके या पर 'कि यहांका,महेश्वर मन्दिर पाण्डव-वंशीय किसी राजा- सङ्गीतशास्त्रविद् इकट्ठे होते थे। यहुनेरे इमफे सुधार के द्वारा बनाया गया था। से निकली हुई गीतलहरोको सुन कर मन्तमुग्ध हो • सिवा इसके सन् २०१४ ई०में लाला दयालदास- जाते थे। का बनाया तला और मातचल नामका तालाव, कुनु यह शाह गुलमान उर्फ सेन सादुल्लाका शिष्य था। खुद्दीनका बनाया नौवस्ती महल्लाको दरगाह १६२० इसके लिखे हुए मालिनाल-च-दरन्, अली सरद, दादु- 'ईम नूरजहानका वनवाया शाहपीरको दरगाह, १०१६ ई०- दिल, इल-उल-सिताव तथा फारसी और उर्दू भाषामें में गजनी महमूदके वजीर हमनमेहरोको वनाई जामा | दो दीवानग्रन्थ पाये जाते हैं। अलावा इसके सुफी मसजिद, मखदुमशाह तिलायतको दरगाह, मन् १९६१ मतकी श्रेष्ठताको सापित करनेके लिये इसने विसाल- ई०के आयु महम्मदका मकबरा, सालारमसाग्य गाजोका पारिदात नामक एक साम्प्रदायिक प्रन्यकी रचना की। मकबरा (१९६१), व्यार महम्मद खांका मकबरा १७८४ ई०में इसका देहान्त हुमा। (१३३६), करवला (१६०० ई०) आदि उल्लेखयोग्य | मोरन-यगालके अधिपति मीरजाफर अली की है। सन् १८२१ ई०में मेरठमें जो गिरजा मना, उसका लड़का। इसका असल नाम मीर सादिक था। यह उच्चशिखर गगनचुम्बन कर रहा है। । बडा हो निष्ठुर और दुत था। पिता मीरजाफारका मौरतोजक-सेनानायकविशेष। युद्धयात्राफालमें सेना सिंहासन अविचलित रखने के लिये यालफ मी मददी दलकी श्रेणीबद्ध गति रक्षा और शान्तिरक्षा तथा सेनाः | और अलोवी चेगम थादि राज्यों के उत्तराधिकारी और वर्गकी अनुपस्थिति आदि प्रधान सेनापतिको जताना राजकुल ललनाओं के प्राण संहार कर'इमने जो पाशव- 'इसका काम था। चरित्र और अत्याचारको पराकाष्ठा दिखाई है उससे मोर दरद-एक 'मुसलमान-कवि, विग्यात सेस साधु उनके पिताके चरित्नमें भी कलंककालिमा लग गई है। खाजा नासिरका लड़का । साधु नामिरके अध्ययन- यही वंगालके चालक नवाव सिराजुद्दीलाके प्राणनायका कौशलसे दरदने बहुत जल्द उपयुक्त शिक्षा प्राप्त की। प्रधान पड्यन्त्रकारी था, इसीसे वंगाल इतिहास में उसको माधुर्यपूर्ण उच्च अङ्गको कवितामाला पढ़नेसे इसने अक्षय नाम कमाया है। उसे कल्पनादेवीका मानस-पुत्र कहने में कोई अत्युक्ति पिताके उद्योग इसने पटनाफा नयादी पद और - नहीं। सबमुन उस समय इसके जोड़कर कोई कयि शाहमगंगको उपाधि पाई। पटना-युद्ध के समयसे । न था। इसका असल नाम साजा महम्मदमीर था । इनके वीरत्वका भी परिचय मिलता है । अपने दो पेमे- • अपनो कविताशक्तिके परिचयस्वरूप इसने मोर दरकी में अनाघातसे इसकी मृत्यु हुई। इसकी यमाघातमे संशा पाई थी। मृत्युके सम्बन्धमें एक कहावत इस प्रकार है-ढाकाके दिल्ली नगरमें इसका जन्म हुमा था। यहां पढ़ना नायब नया जसरत् साने मौरनके आदेशले यसर खां समाप्त कर यह सेना विभागमें काम करने लगा। पीछे नामक एक दुराचारोके हाथ गलीयदीकी दो लड़की पिताको अनुमतिसे इसने कठोर सैनिक वृत्तिका परि. घोसथी और अमीना बेगमको सौंपा । दुराचारियों ने ।' त्याग कर ब्रह्मचर्य अवलम्बन किया। मुगल बादशाहोंका। दोनों बेगमको नाव पर चढ़ा कर जलमें सुवी दिया। शासनदण्ड जब दूसरोंके हाथ लगा, तब दिल्लीवासी घेगमो ने इस समय वनाघातसे मोरनको पापका प्रायः नगरको छोड़ भाग गये। किन्तु मीर दरदने ऐमी श्चित्त हो' इस प्रकार अभिशाप दिया। मृन्युके बाद • अवस्था भएको दी मूल जान कर राजधानीका परि- मीरनका शव पहले हाथोकी पीठ पर और पोछे गाय स्याग न किया। पर पटगासे राजमहलमें लाया और बद्दी दफनाया ___ "मोर सुफो सम्प्रदायका था। संगीतविद्यामें इसको गया था। volut 111