पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७६६

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मृत्यु हुई। पोरन प्रादिल खां फलं खो-मीरपुर खास मौरन आदिल ना फर्म ग्यो-खान्देशका एक राजा । पिता मोरन शाह ( मिर्जा )--विख्यात मुगल घोर तैमुरशाहका मोरन मुवारिक खाँफे मरने पर यह १४५७ ई०में सिंहा. वडा लड़का। पिताके परलोकनासो होने पर सिर्फ मन पर बैठा। इसके शासनकालमें राज्यको बड़ो : यही जीवित रहा। १३ ७ ९०में इसका जन्म हुभा। उन्नति हुई थी। सुन्दर सुन्दर इमारत बनवानेका इसे इराक, आजर घेजान, दयारफेर और सिरिया प्रदेश- बड़ा शौक था । सुनिपुण शिल्पियोंको नियुक्त कर का शामन फर १४०८ ई में करो युसुफके युद्ध में मारा इसने शीर और मलयगढ़-दुर्गको दुर्भय बना दिया । गश । । था । १५०३ ६०में युनिपुरके दौलत-मैदानके प्रासाद : मीरन हुसेन निजामशाह--निजामशाही वंशका एक के पास ही इसके कथनानुसार इसकी लाश दफनाई राजा । १५८८ ई०में पिता मूर्तजा निजामशाहको गई थी। इसका दूसरा नाम मीरनखानि भी था। गुप्तहत्याके बाद यह दाक्षिणात्यके अहमदनगरके सिंहा. मीरन मुयारिक स्यां फरखी (१म)-खान्देशके अधिपति सन पर अभिषिक्त हुआ। इसको हठकारिता और मोरन आदिल खां फल खोका लड़का। पिताके मरने पर निष्ठुरप्रतिसे राज्झमें अशान्ति फैल गई. धी। सिर्फ १४४१ ई०में यह खान्देशके सिंहासन पर बैठा । १७ दश मास राज्य करनेके बाद इसे गिद्दीसे उतार मार यर्प निरापदसे राज्य करनेके बाद १४५७ ई० में इसकी' डाला गया। मोरपुर---२ वम्बई प्रेसिडेन्सीके शिकारपुर जिलान्तर्गत मोरन मुबारिफ खां फरखी ( २य)-खान्देशका एक रोहि महकमेका एफ तालुक। यह अक्षा० २७°१६ से मुसलमान राजा। १५३६ ई०में भाई मीरन महम्मद २८४ उ० तथा देशा० ६९१३ से ७०.११ पू०के खांके राज्यशासनके वाद यह खान्देशके सिंहासन पर मध्य अवस्थित है। अधिरूढ़ हुआ। १५६६ ई० में इसको मृत्यु हुई। २ उक्त तालुकका एक नगर। यह अक्षा० ३३११ मोरन मुहम्मद खां फर्सवी (१म)-खान्देशका एक उ० तथा देशा० ७३° ४६ पू०के मध्य अयस्थित है। राजा । २६२० ई०में पिता आदिल खाके परलोक- समुद्रतलसे इसको ऊंचाई १२३६ फुट है। सरकारी वासी होने पर इसने राजसिंहासन सुशोभित किया। झेलम धारकसे यह २२ मील उत्तर पड़ता है। कहते हैं, १५३७ ६०में गुर्जराधिपति यहादुर शाहके मरनेके याद यह कि दो सौ यसे यधिक हुप, मोरन खाँ और सुलतान माता और उमरावों के साथ अपने मामा यहादुरशाह के यहां फतेह खां गकरने इसे घसाया था। यहां पुराने समय- आये और गुर्जर तथा मालवराज्यका अधीश्वर हुमा था। के बने हुए बहुतसे मन्दिर हैं जिनमें महाराज गुलाय. माण्ड में मीरन महम्मद शाह नारा धारण कर गुर्जरराज्य- सिंह द्वारा निर्मित सरकारी रघुनाधका मन्दिर और का अधिपति हुआ सही, लेकिन अधिक दिन राज्यसुखका दीयान अमरनायका मन्दिर है। शहरमें स्कूल और भोग न कर सका । तख्त पर बैठने के २ मास वाद ही यह अस्पताल है। अनाज और धोके व्यवसायफे लिये यह . इस लोकसे चल बसा। पीछे उसका भाई २य मुवारक स्थान प्रसिद्ध है। यहां सिन्धु और पक्षाय रेलवेका ' माँ सान्देश तथा वहादुरशाहका भतीजा महमूदशाह | एक स्टेशन है। गुर्जरके सिंहासन पर बैठा । युनिपुर नगरमें जहां मोरपुर मास-बम्बईके थर और पार जिलेका एक उसके पिताका मायरा था उसोको बगलमें इसका मक | तालुक। यह अक्षा० २५ १२ मे २५ ४८३० तथा परा सड़ा किया गया था। देशा० ६८ ५४ से ६९.१५ ३०के मध्य अवस्थित है। मीरन मदम्मद याँ फर्सपो ( २य )-पान्देशका एक भूपरिमाण ४३७ वर्गमोल और जनसंपन्या चार हजारफे रामा। १५६६ ई०में मुवारक ग्वाँ (२य) के पाद यह फरीव है। इसमें मीरपुर-याम नामकर शहर और राजसिंहासन पर बैठा। १९७६ ई० में इसका देदान्त १३५ प्राम लति है। दुधा। । २उन तालुकका एक नगर । यह मा० २०५:३००