पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७६८

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मध्य हैदराबादसे चौर ग्यत है। १८०६ . होने नगरको स्थापित काजक वाणिज्यके। सिरिटिटो स्थापित हुई को युक प्राइमरी स्कूल के कराची यशा २४ ३६ से : से २८७ १८२ पोरन आदिल खा फर्रुखो-पीरपुर खास गौरन शादिल मां फरपो-खान्देशका एक राजा । पिता ' मोरन शाह ( मिर्जा )-विम्यात मुगल योर यत । मोरन मुयारिक योके मरने पर यह १४५७ ई०में सिंहा. यहा लड़का। पिताके परलोलासो होने नगर मन पर. येटा। इसके शासनकालमें राज्यको वड़ो , यही जीवित रहा। . १३७६० में इसका जक था। उन्नति हुई गोमुन्दर सुन्दर इमारत बनयानेका इसे , इराक, माजर येजान, दयारफेर और सिरियो । बड़ा शौक था । सुनिपुण शिल्पियोंको नियुक्त करने का शासन फर १४०८३०में करो युसुफफे युइक प्रा इसने अशोर और मलयगढ़-दुर्गको दुर्भध बना दिया , गया। था। १५०३ ६०में युहानपुरके दौलत-मैदानके प्रासाद-मीरन हुसेन निजामशाह--निजामशाही यंशा २४ ३६ फे पास ही इसके कथनानुसार इसको लाश दफनाई राजा । १५८८ ई०३ पिता मृतजा निजा६ पू० गई थी। इसका दूसरा नाम मोरनखानि भी था। गुप्तहत्याफे बाद यह दाक्षिणात्यफे भलादनगर केंद्रोल और " मौरन मुयारिक सां फत्री (१म) खान्देशके अधिपति । सन पर अभिषिक्त हुआ। इसको हठकारिरमा ६८ प्राम मोरन आदिल खां फर्रुखीका लड़का। पिताके मरने पर . निष्ठुरप्रतिसे रामें अशान्ति फैल गई थी । वाणिज्य १४४१ ई०में यह खान्देशके सिंहासन पर बैठा । १७ दश मास राज्य यरनेके बाद इसे गिद्दीसे उनादक सुकर, वर्ष निरापदसे राज्य करनेके वाद १४५७ ई०में इसफी डाला गया। मृत्यु हुई। मोरपुर-१ यम्यई प्रेसिडेन्मीके शिकारपुर जिला के मध्य मोरन मुगरिफ खां फरीखी (२य)-खान्देशका एक, रोहि महफूमेका एक तालुक। यह अक्षा और जनसंख्या मुसलमान राजा । १५३६ ६०में भाई मोरन महम्मद : २८४ उ० तगा देशा० ६६.१३ से के राज्यशासगके बाद यह खान्देशके सिंहासन पर मध्य अवस्थित है। अधिरूढ़ एमा। १५६६ ई० में इसको मृत्यु हुई। २ उक्त तालुकमा एक नगर। यह अक्षा ईके कार मीरन मुहम्मद खाँ फर्सवी (१म)-यान्देशका एक: उ० तथा देशा० ७३४६ पूरके मध्य अयस्थित से २४', राजा। १६२० ई०में पिता आदिल सांके परलोफ- . समुद्रतलसे इसको ऊंचाई १२३६ फुट है। सरकार यामी होने पर इसने राजसिंहासन सुशोभित किया। झलम वारकसे यह २२ मील उत्तर पड़ता है। कहते संख्या १५३७ ई० में गुर्जराधिपति बहादुर शाहके मरनेके याद यह कि दो सौ बसे गधिक हुए, मोरन सा और सुलतार माता और उमरावोंके साथ अपने मामा वहादुरशाहके यहां फतेह खां गकारने इसे घसाया था। यहां पुराने समय जी. आये और गुर्जर तथा मालवराज्यका अधीश्वर हुमा था। के बने हुए बहुतसे मन्दिर हैं जिनमें महाराज गुलगायः माएड में मोरन महम्मद शाह नाम धारण कर गुर्जरराज्य.! सिंह द्वारा निर्मित मरकारी रघुनाथका मन्दिर और फा अधिपति हुआ सही, लेकिन अधिक दिन राज्यसुखका दीवान अमरनाथका मन्दिर है। शहर में स्कूल और भोग न कर सका । तख्त पर बैठनेके २मास वाद ही यह अस्पताल है। अनाज और घोके व्ययसायके लिये यह इस लोकसे चल बसा। पीछे उसका भाई २य मुयारक स्थान प्रसिद्ध है। यहां सिन्धु और पाय रेलचेका मां सान्देशके तथा बहादुरशाहका मोजा महमूदशाह एक स्टेशन है। गुर्जरफे सिंहासन पर बैठा। युनिपुर नगरमें जहां मोरपुर मास-यम्यईके थर और पार जिलेका एक उसके पिताका मकबरा था उसोको यगलमें इसका मक- तालुक। यह अक्षा० २५ १२ से २५ ४८ उ० तथा.. वरा घड़ा किया गया था। देशा०६८ ५४ से ६६.१५ ३०के मध्य अवस्थित है। मौरन महम्मद पौ फर्ससी ( २य )-पान्देशका एक भूपरिमाण ४३७ यगंमोल और जनसंख्या चार हजारके राजा। १५६६ २०में मुबारक या (श्य )-फे बाद यद करीब है। इसमें मीरपुर-नाम नामक १ शहर और राजसिंहासन पर बैंटा। ९५७६६०में इसका वेदान्त १३५ प्राम लाते है। 1 २ उन नालुकका एक नगर । यह यक्षा० २५.३०० . दक्षिण भागमें.. 7 उपजता है।