पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७६९

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मोरपुर बतोरा-पीरमन्नू ६८ तथा देशा० ६६ ३ पूके, मध्य हैदरावादसे अमर- । मौरभुयड़ी (फा० पु० ) एक कल्पित पौर। इसे होजड़े कोट जानेके रास्ते पर अम्धित है। १८०६ ई० में मोर। अपना आदिपुरुष और आचार्य मानते हैं। हौजड़े थली मुराद ताल पुरन इस नगरको स्थापित किया। इसी वंशके अपनेको यतलाते हैं। कहते हैं, कि ये पौर यह स्थान अनाज और रुईके याणिज्यके लिये प्रसिद्ध स्त्रियोंके धेशमें रहते, बरखा कात कर अपना गुजारा है। १९०१ ईमें म्युनिसपलिटो स्थापित हुई हैं। शहरमें | चलाते और छः महीने स्त्री तथा छ: महीने पुरुष रहा एक चिकित्सालय और एक प्राइमरी स्कूल है। करते थे। जब कोई हिजड़े में शामिल होना चाहता है, मोरपुर पतोरा-सिन्धुप्रदेशके फरावी जिलेका एक तब वे इन्हींको नामको कड़ाहो तलते और उसे पकवान तालुक। यह अक्षा० २४.३६ से २५१ उ० तथा खिलाते हैं। प्रवाद है, कि जो कोई यह पकवान खा देशा०६८ से ६८२६ पूके मध्य अवस्थित है। लेता है यह भी होजड़ों की तरह हाथ पैर मटकाने भूपरिमाण २६८ वर्गमील और जनसंख्या साढ़े तीन लगता है। . हजारसे ऊपर है। इसमें ६८ प्राप्त लगते हैं। यहां घी मौरमंजिल ( फा० पु.) यह कर्मचारी जो बादशाहों या और अनाजका जोरों वाणिज्य चलता है। | लश्कर आदिके पहुचनेसे पहले ही मंजिल या पड़ाव पर मीरपुर मायेलो-बम्बईके सुकर जिलेका एक तालुक।। | पहुंच कर वहां सब प्रकारको व्यवस्था करे। यह अक्षा० २७२० से २८ उ० तथा देशा० ६६ . १६ से ७०.१० पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण । मोरमजलिस ( फा० पु०) सभा या अधिवेशनका प्रधान १७२० धर्गमील और जनसंख्या ५० हजारके करीब है।! अधिकारी, सभापति । तालुकके दक्षिण भागमें विस्तृत मरुभूमि है । यहां जुआर | मोरमदन-सिराज-उद्दौलाका एक सेनापति । पलामीको बहुनायतसे उपजता है। ) लड़ाईमें यह अप्रेजोंकी गोलीसे घायल हो पश्यत्वको मीरपुर मकरो-~यम्बईके कराची जिलेका तालुक। यह प्राप्त हुभा ( १७५७ ई०)। अक्षा० २४.१४ से २४' ५१ उ० नथा देशा०६७ से मीरमन्न-पञ्जावका एक मुसलमान शासनकर्ता, वजीर ६७५५ पू०के मध्य अवस्थिन है। भूपरिमाण ११३७ फरर उद्दीन खांका लड़का। इसके अमित परायमसे वर्गमील और जनसंख्या ढाई हजारसे ऊपर है। इसमें ७४ माम लगते हैं, शहर एक भी नहीं है। यहाँको प्रधान १७१८ ई० में दुर्रानी-सरदार अबदालो हार कर भाग गया उपज धान, वाजरा और तिल है। था। इस वालककी पोरता पर प्रसन्न हो सभाट मह- मौर फर्श (फा० पु० ) ये गोल, ऊचे और भारी पत्थर म्मदशाहने इस लाहोर और मूलतानका शासनकर्ता जो बड़े बड़े फी या चांदनियों आदिक कोनों पर इम- वनाया तथा मुहन-उल मुल्ककी उपाधि दे इसका सम्मान लिये रग्वे जाते हैं जिसमें ये हवासे उड़ न जाय। किया। उसी साल महम्मदशाहफे मरने पर उसका मोर वयसो (फा० ए०) मुसलमानी अमलदारीका पक लड़का अहमदगाद दिलोके सिंहासन पर बैठा। मन्नू प्रधान कर्मचारो। इसका काम येतन यांटना होता । के साथ उसका गरना नहीं था. इस कारण वह इसका मोरवहर (फा० पु० ) मीर बहरी देखो। राज्य छिननेको आगे बढ़ा। इसी सूत्रमे दो में घम- 'नीरवहरो ( फा० पु०१२सलमानां अमलदारोमे जल! सान युद्ध आरम्भ हुआ। युरमें मम्राटको हार हुई। सेनाका प्रधान अधिकारी। यह प्रधान कर्मचारी जो इसके पराक्रमसे सारी सिरा जातिको इसकी अधानना यंदरगाहों मादिको देख-रेख करता है। । स्योकार करनी पड़ी थी। अनन्तर जब यह गहमद- मीरवार ( फा० पु. ) मुसलमानी समयका एक . शाह अबदालीको प्रतिभूत कर देनेमे इशार चला अधिकारी। यह लोगोंको किसी सरदार या बादशाह गया, तब १७११५२६० में दुर्रानी सरदारगे फिरसे पवाय - के सामने उपस्थित होनेसे पहले उन्हें देखता और तब पर आयमण किया। आखिर भात्मसमर्पण करके उपस्थित होनेका हुकुम देता था। मन्नने छुटकारा पाया था।