पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७७२

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मोराबाई प्रार्थना कर युर हों। किन्तु उनको प्रफुनना दिनों-दिन; मोरा-गोविन्दजोके मन्दिरमें अपना सारा समय नष्ट होने लगी, चेहरे पर उदासी छा गई। कृपप्रेमके मधुर मङ्कीर्तनमें बिताने लगी। सांसा. पोळे राणा कुम्भने मोराफे इच्छानुमार राजपुरोके रिक भोग-वासनाफे प्रलोभनसे मोराका चित्त विलफल मोताछोरीका एक मन्दिर वनवा दिया। मन्दिर- : आफष्ट होने को नहीं जान फर राणा दूसरा विवाद करने- में बालगोपालको मूर्ति प्रतिष्ठा की गई। मीराके आदेशसे । को तैयारी करने लगे। ममी घेणायके येगा मन्दिर जा कर हरिकीर्तन करने . इस समय झालबार-राजकुमारोके साथ मन्दर राज लगे। मोरा भो भकुण्ठिन वित्तमे उनके माथ मिल कर, कुमारका विवाह सम्यन्ध स्थिर हो चुका था। झालयार. हग्गुिणगानमें परमानन्द लाभ करने लगीं। राजसे इशारा पा कर जिस दिन विवाद होता , उसी किन्तु राणा इन सय कामों को पसन्द नहीं करने । रातको राणा कुमारोको हर लाये। किन्तु यह कन्या चित्तोरको राजमहिपो असंकुचिनभावमै सबफे मामने मन्दर राजके प्रति बिलकुल मासत हो गई थी। मत. हरिकीर्तन करेंगी, इसे चे वरदास्त न कर सके। उन्हें एव पुम्म दाम्पत्य-प्रणयका सुख जोयनमें अनुभव न कर मोराके चरित्नमें मदद भी होने लगा। इन सय कारणों सके। प्रणयलाभ बलपूर्वक नहीं होता। .. : में राणा भारी चिन्तामें पड़ गये। आखिर उन्होंने दमरा गोविन्दजीके मन्दिरमें रात दिन वैष्णव लोग पेरोक- विवाद करनेका सङ्कल्प किया। टोक मोराफे प्रेमोन्मत्त संकोत्तनमें सम्मिलित होने इधर मोरा मुक्तमाणसे हारकीर्तनमें मत्त हो रानाफे । लगे। दूर दूर देश विदेशके भिन्न भिन सम्प्रदायफे लोग पास भी न आने लगीं। मलयानिल सेयोको पया कमी ' भो भेष बदल मीराफे अनुपम सौन्दर्य और लावण्यका ताटके पत्तोंके पंगेमे प्रवृत्ति हो सकती है? " दर्शन करने और सगीय संगीत सुननेफे लिये आने एक दिन कुम्भने मौराको युला कर पूछा, मारा! लगे। मोरावाई सभी अभ्यागतोंको अपने हासे तुम रान दिन हरिकोनन करती हो। स्वामिसेधा पा 'पैर धोने के लिये जल दे कर म्यागत करतो और समीको तुम्हारा कत्तथ नहीं ? मैं दूमग विवाद करना चारता ई, अपने हाथ प्रसाद भोजन करा कर सन्ध्या समय माप क्या तुम्हें कोई आपत्ति भी है ?'

प्रसाद पाती थीं।

। एक दिन मन्दर-राजकुमार नये वैष्णय भेषमें गोविन्द मोराने हाथ जोड़ कर उत्तर दिया, 'महाराणा ! आप

जीफे मन्दिर पहुंचे । सभी धैष्णोंने प्रसाद खाया, लेकिन

पदि दूसरा वियाह कर ले, तो मैं यहुन प्रसन्न होऊंगी।। पोयिा, मैं भाप लोगोंको यथोचित चरणसेवा नहीं कर । नये वैष्णयने कुछ नहीं ब्रहण किया । मोराको थार वार , अनुरोध करने पर उन्होंने कहा, 'महारानी ! आपसे मुझे सकती। आप एक दूसरो दासी लायें, इसमे मुझे हपके : एकान्तमें कुछ कहना है। आप मेरी सुन लें तव में सिया विषाद नहीं।' भोजन कर सकता है।' अतिथियत्सला मोरा तुरत यह सुन कर राणाको मोराफे चरित्रमें जो मन्देश सहमत दुई। पकान्त कमरेमें मन्दर-युमारने मोरास या यह और भी दृढ़ हो गया। एक दिन रातको । कहा, "भाप यदि मेरी मभिलाको पूर्ण करनेको चित्तीरफे राजकुलदेवताने उन्हें स्वप्न दिया कि, प्रतिक्षा करें तो मैं अपना अभिप्राय प्रकट करू।" मीरा "मोरा मानुरागिणो परम सतो है. भक्तिको राजीच 4 बहुत मोच विचार कर सहमत हुई। राजकुमारने निरिणो है।" भारमत्तान्त प्रकट करते हुए कहा, 'मैं मालया-राज प्रातःकालमें जब राणा सो कर उठे, तब अपने ममः कुमारोको एफ. यार देपना चाहता है। हम दोनों प्रेम लक मन्देहफे लिपे धान पश्चात्ताप करने लगे। पोंछे/ पाशमें आम है। उन्होंने मीरा मामने उनकी पुल अभिलाषाएं पूर्ण माराने कहा,-"चारों और हथियारबंद पहरेदार घूम. , करनेकी प्रतिमा की। रहे हैं। माग किस प्रकार राजाय भन्तःपुरमें घुस कर ।