पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७८३

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___ मुईज-उद्दीन घहरम-मुकदमा ६५ मुज-उद्दीन बहरम-अत्यन्त साहसी, उद्यमशील तथा निपुणता अभी भी भास्कर विद्याका गौरम घोषित युद्धप्रिय दिल्लोके 'सम्राट । उनके जैसे आइम्यररहित करती है। सम्रार दिल्लीके सिंहासन पर कभी भी नहीं बैठे थे। मईन उद्दीन जविनि (मौलाना)-जयिनका रहनेवाला अन्यान्य समारोंको तरह वे राजोनित उज्ज्वल वेशभूपा- एक मुसलमान कधि । ( १३वों सदो) इमने प्रमित से अपनेको नहीं सजाते थे। जब रजिया वेगमको पारसी कयि सादीका अनुारण कर 'निगारिस्तान: कारावास हुआ तब १२४० ई० में कुछ कालके लिये ये ) नामको एक नीतिपूर्ण गद्य-पद्य सम्बलित पुस्तकको सिंहासनारूढ़ हुए थे। रचना की थी। मुइज लि-दीन अल्ला अयि तामिम याद-धर्वर राज्यका मुईन उद्दीन महम्मद-हिरातका रहनेवाला एक मुसल. चतुर्थ खलीफा तथा मित्र-राज्यका फतिमा बंशोय प्रथम मान ऐतिहामिक । इसने तारीध-मुमावी नामसे राजा। पिता इस्माइल अल मनसुरकी मृत्युके उपरान्त ) मिस्रदेश में रहनेवाले यहदियोंका इतिहाम लिखा था। घे वर राजसिंहासन पर बैठे थे। इन्होंने अपने | इसके अतिरिक्त इमने 'रोजत-उल-जनात' में दिरात वाहु-वलसे इजिप्ट-राज्य जोत कर वहांके केरवान नगरको समृद्धिका वर्णन करते हुए एक ग्रन्थ १४८६ नामक स्थान राजधानी वसाई थी। इनके मुशासनसे ई०में समाप्त कर सुलतान हुसेन आयुटगाजी यहादुरके सारा मित्र-राज्य समृद्धशालो हो उठा था। इनकी वसाई। नामसे उत्सर्ग किया था। १४८६ ई०में इसने मिमा- हुई गल-काहिरा नगरोने भारत आदि देशान्तरोय पण्य | राज उल -नघुयात नामका ताराभिक्ति प्रन्य तथा द्रव्योंसे पूर्ण हो कर नगरको समृद्धिको बढ़ाया था। रोजत-उल-बाणजिन नामक अन्ध लिखा था। २४ वर्प राज्य करनेके बाद ये परलोक सिधारे। मिस्रके मुईन-उल मुल्क रस्तम दिन्द-लाहौरफा एक मुसल. फतिमायंशीय राजाओं के राज्यकाल १५२ ११८८ १०में मान शासनफर्ता । महिन्दफे युद्ध में अदमदशाह मित्रमें वैदेशिक वाणिज्यको समधिक उन्नति हुई थी। अब्दालीको पराजित कर इसने मुगल सम्राट अहमद मुईन उदोन- समादत नामक प्रत्यके रचयिता। शाहसे शासकका पद प्राप्त किया था। १७५४ ई० में इन्होंने अपना अन्य सम्राट आलमगोर यादशाहको इसकी मृत्यु हुई । इसका दूसरा नाम मीरमन्नू था। उत्सर्ग किया था। मुकन्द ( सं० पु० ) कुदरू । २ पलाण्ट, प्याऊ । ३ पष्टिक, . मुईन उद्दोन इस्फरारी (मोलाना )-तारोख मुवारक | व्रोहिविशेष, साठो धान । शाहा नामक इतिहासकं प्रणेता। | मुकन्दक (सं० पु०): पलाण्ड, प्याज। २ पप्टिक मुईन उहान खाँ-दिल्लोके राजपुर-रक्षक मन्त्रिप्रवर जवित, नीहिविशेष, साठो नामक धान । २ कुधन्यभेद, कोदो। का पुत्र । अगरेज-राजको सहायता देनके कारण ! मुकट (हि. पु० ) मुकुट देयो । ये मासिक पांच हजार रुपया येतन पाते थे। इति- मुकटा ( हि० पु० ) एक प्रकारको रेशमी धोती जो प्रायः हासमें ये भानयु खां नामसे भी परिचित हैं। पूजन या भोजन आदिके समय पहनो माता है। मुईन उद्दोन विस्तो (ख्याजा)-प्रसिद्ध मुसलमान माधु । मुकता (हिं० पु० ) १ मुक्ता देखो। (वि० ) ३ यथेट, १९५२ ई०में शिस्तानमें इनका जन्म हुआ था। जिस बहुत अधिक । समय दिल्लीवर पृथ्वीराज शाहबुद्दान गोरों (मुइज | मुकत्ता ( म० यि०) १ काट छांट कर दुयस्त किया था, उद्दीन महम्मद साम ) द्वारा ११९२ ६०में वन्दी हुए थे | ठोक तरहसे बनाया दुमा । २ शिष्ट, सभ्य। - उस समय मुसलमान-साधु चिस्तीने अजमेर में पदार्पण | मुकदमा (१० पु.) १ अधिकार मादिसे संबंध रसाने- किया था। १२३६ ई० में १७ वर्षको अवस्थामे यहीं पर वाला कोई झगड़ा अथवा किमो,अपराधका मामला जो इनकी मृत्यु हुई। उनके पवित नामके स्मरणार्य अन | निबटारे या विचार के लिये न्यायालयमें जाय, अमियोग। मेरमें समाधि मन्दिर बनाया गया था जिसको शिल्प- ' घनका अधिकार आदि पानेफे लिये अथवा किये हुए