पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७९१

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मुकुन्दराम राय (राजा ;-मुकुरित है कि उनको माताका नाम देवको, उनके दोनों पुवोंके / अनन्तर बंदी अवस्था १६३६ ई०को ये मारे गये। उन्हों नाम शिवराम तथा पञ्चानन, पुत्रवधूका नाम चित्रलेखा, ने शत्रुजित्पुर नगर वसाया था। इस प्रदेशमे मा दपुरके कन्याका नाम यशोदा और जामाताका नाम महेश था। स्थापक राजा सीताराम भी वीरता दिखा कर कायस्थ कविने .अपने दोनों भाइयोंके साथ माणिक दत्त जाति के गौरवको यढ़ा गये हैं। नामक अध्यापकके निकट सङ्गीत शास्त्रकी शिक्षा मुकुन्दलाल-पाराणसी (फाशी ) के रहनेवाले एक पाई थो। किंवदन्तो है, कि पाथरकुचा-निशासी गोपाल. विख्यात पण्डित । कोलगजमदन, गणेशार्चन- चन्द्र चक्रवत्ती नामक एक गायकने ब्राह्मणभूमिकी | | चन्द्रिका, गोगलरहस्य, गौतमीयतंत्रटोका, तन्त्रसार, राजसभामें सबसे पहले उनके चण्डोकाव्यका गान तीर्थमञ्जरी, विकूटारहस्यटीका. प्रणवार्चन चन्द्रिका, किया था । दामन्यामें कविकी हस्तलिग्वित कुछ | प्रायश्चित्तकुतूहल, भैरवीरहस्य, मार्तण्डार्चनचन्द्रिका, पुस्तके इस समय भी सुरक्षित है। उनसे कविका | विज्ञानेश्वरकृत मिताक्षराके प्रायश्चित्ताध्यायटीका, वाम- घंशंपरिचय, समकालीन सजनोंका “सङ्ग तथा केश्यरतंत्रटोका, शक्तिसङ्गमतन्त्रटोका, धादमचरो, समय- दामुन्यांका माहात्म्य प्रकट होता है। प्रकाश, स्मृतिसार, स्मृत्यर्थसार आदि अनेक प्रधाँको मुकुन्दराम राय (राजा)-बङ्गालके एक विख्यात हिन्दू। इन्होंने रचना की है। 'शासनकर्ता । ये वारभूयासे एक थे। फतेहा- मुकुन्दवन-१ स्याम्यानचन्द्रिकाफे प्रणेता, आनन्दयनके वाद तथा भूपणामें उनकी जमींदारी थी। ये बंगाली, गुरु । यह एक प्रसिद्ध साधु थे । २ महिमतरंगटोकाके कायस्थ थे। गंगाके दूसरे किनारे फरीदपूरके नग्मुकु. । रचयिता। • दिया नामक स्थान आज भी उनके अस्तित्वको सूचित । मुकुन्दशर्मन् - तम्बदीपिका नामक तन्त्र पथके प्रणेता। फरना है। अवरनामा और वादशाहनामा उनको ! २ अमरकोपके लिङ्गानुशासनटोका रचयिता। “वीरताका यथेष्ट परिचय दिया गया है । . अबुलफजलके मुकुन्दसेन-एक हिंदू राजा | ये मुकुदनिजयके प्रणेता .वर्णनसे मालूम होता है, कि फतेहाबादमे सरकारी अफ । श्रेप्ट पण्डित परमके प्रतिपालक थे । इनके पिताका गान और हिन्दू जमीदारों तथा पुर्तगीज सरदारोंका नाम सद्रसेन और प्रपितामहका चन्द्रसेन था। प्रभाव विस्तृत था । १५७४ ई०में खान वाना मुनाईम मुकुन्दु (स० पु.) मोरयति विषयान्तरानुरामिति भयरशाहको सेनाका ले कर बङ्गाल तथा उड़ोसा अन्तभूतण्यर्थ मुच का, न्यकादित्वात् पृत्वम, तं उन्द. पर आक्रमण करने के लिये अग्रसर हुए थे। उनको । त्याद्रोंकरोतीति उन्द उन्, पृषोदरादित्वात् साघुः। माशासे मुराद के अधीन एक सैन्यदल पूर्व बङ्गाल- कुन्दुर, कुदरू । २ श्वेत करयी, सफेद कनेर । ३ गंमारी फे दुई जमोदारोंको यशमें लाने के लिये गया था। नामक पक्ष । ४ पोईका साग। . भूषणा राज मुकुन्दरायके साथ उम्मका घोर संग्राम मुकुम् (सं० अश्य० ) १ निर्माण, मोक्ष। २ भक्तिरस । ३ हुमा । हिन्दु-राजने मुसलमान मातनायियोंसे वने । प्रेम। मुकुन्द देखो। लिये चतुराईने उसको निमंत्रण दे कर पुत्र सहित मार | मुकुर (स पु० ) मक-( मकुरदर्दू । उग्ण १४१ ) इत्यव डाला। . | बाहुलफादकारस्थान उकार इत्युज्ज्वलदत्तोना। उरव । - उनके पुत्र शत्रुजित्ने मुगल-मम्राट जहांगीर याद- दर्पण, माईना। २ कुलवृक्ष, मौलसिरी। ३लाल- शाहके तत्कालीन घंगालफे शासनकर्ताको बहुन सताया, दण्ड, कुम्हारका यह इंसा जिसमें वह चाक चलाता है। था । अन्तमें शाहजहां बादशाहक राज्यकालमें ये | ४ फुलयश, भेरका पेड़। ५ मटिकापुपक्ष, एक प्रकारका काविहार तथा कोचहाजोंक राजा माथ पड़पट में बला। ई कोरक, कली। शामिल होने के कारण मुगल सेनापतिम पराजित हुए। मुकुरित ( स० वि०) मकरः मस्य मानसदर गंशात -