पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७९२

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७०० - मुकुल-मुक्के शो गोखरू . तारकादिम्य इतच । पा ५॥२॥४१ ) इति इतच । मुकुलित, | मुकुलित ( स० वि०) मुकुलतारकादित्वात् इतच । १ खिला हुआ। | जिसमें फलियां आई हों। २ कुछ खिलो हुई । ३ कुछ मुकुल (सपु० क्लो०) मुञ्चति फलिकात्व,मुच उलक् । १ | कुछ खुला। ४ झपकता हुआ। । ईपद् विकशित-कलिका, कुछ खिली हुई फली। पर्याय-1 मुकुली (संपु०) मुकुल-अस्त्यर्थे इनि । मुकुलयुक्त, कुर्मल, मफुल, पीटकोरक । २ शरीर । ३ आत्मा। 8| यह जिसमें कलियां आई हों। प्राचीन कालका एक प्रकारका कर्मचारी।५ एक प्रकारका | मुकुलोभाव ( स० पु०) अमुकुलो मुकुलो भवति भू. छन्द । ६ जमालगोटा । ७ भूमि, पृथ्वी। ८ गुग्गुल देखो। घड्। अविकाशका विकाश भाव, पहले जो मुकुल या मुकुल (मोकलदेव)-मेवाड़ के एक राणा । राणा लाक्षाके | खिला हुआ नहीं था, पोछे उसका होना या खिलना। , औरससे मारवाड राजकन्याके गर्भसे उनका जन्म हुभा मुकुष्ठ ( स० पु०) वनमुद्ग, मोठ। था। लाक्षाके ज्येष्ठ पुत्र चण्डने अपनी प्रतिज्ञाके अनुः | मुकुष्ठक (संपु०) मुकुस्तकति प्रतिहन्ति स्तक-अच, , सार राजसिंहासन पानेको इच्छा छोड़ दी थी । चण्ड- | पृषोदरादित्वात् साधुः। वनमुद्ग. मोठ । पर्याय-मय- की प्रार्थनासे राणाके गयाती) उद्धार के लिये याना | एक, मयष्ठ, मपष्टक, मुद्गष्टक, मटक, मयुगक । गुण- .. करनेसे पहले मुकुलजीको टोका दे कर चित्तौरके राज- शीतल, ग्राहक, कफ और पित्तज्वरनाशक । इसका जूस सिंहासन पर विठाया गया । उस समय मुकुलजीको रोगियोंको दिया जा सकता है । यह बहुत ताकतवर है। अवस्था केवल पांच वर्षकी थी । पिताको अनुपस्थितिमें "मुद्गान मसर्राश्चनकाण कुलस्यान् सगकष्टकान् । आहारकाले थुपार्थे परिताय प्रदापयेत् ॥" चण्ड अपने फनिष्ठके उपकारार्थ विशेष सुदक्षताके साथ (वैद्यकचक्रपाणि०) राज्यकार्यको देख-भाल करने लगे। मुकुलको विधया | मुकेरियन-पावके हुसियारपुर जिलान्तर्गत एक नगर।। माता अपने प्रभुत्वको नष्ट होते देख वहुत दुःखित हुई। यह अक्षा० ३७५६५०"उ० तथा देशा० ७७३८५०" डाके वशीभूत हो वह चएडके कार्यों में दोपारोपण के मध्य अवस्थित है। यह स्थान वाणिज्य-समृद्धिसे करने लगी। विमाताफे व्यवहार पर चएडको बहुत घृणा पूर्ण है। यहां स्थानीय विभिन्न प्रकारके अनाजों और हुई और चित्तीरको छोड़ फर माण्डराज्य चल दिये। सूती कपड़े का जोरों वाणिज्य चलता है। यहाँके सरदार इस तरह चण्डके चित्तौर छोड़ने पर मारवाड़से | पुढासिंह द्वारा प्रतिष्ठित धर्मशाला और दिग्गी उल्लेख- मुकुलकी माताके आत्मीय कुटुम्वोने मेवाड़में गा कर नीय है। अपना प्रभुत्व फैलाया । राणा रणमल्ल राजकुमारको | मुक्का (हिं० पु०) वधी मुट्ठी जो मारने के लिये उठाई जाय । ले कर सिंहासन पर बैठे। मेवाड़राजवंशका प्रभुत्व मुक्को (हिं० पु०) १ मुका, घूसा। २ बाटा गूधनेके बिलकुल घट गया । शिशोदिया तथा राठोरवंशकी प्रचण्ड दाद उसे मुट्ठोसे घार पार दवाना जिससे आटा नरम हो वीरता तथा प्रतियोगिता प्रारम्भ हुई। जाता है। ३ वह लड़ाई जिसमें मुक्कोंकी मार हो। ४ राणा मुकुलके तीन पुत्र और एक कन्या थो। माद | मुहियां बांध कर उससे किसीके शरीर पर धीरे धीरे भाघात करना जिससे शरोरकी शिथिलता और पोड़ा रियाको पहाड़ी प्रजाओंके विद्रोहको शांत करते समय घे व दूर होती है। अपने दो चानासे अकारण मारे गये। चित्तौर नगरके मकवाजी ( हि० स्त्री०) मुक्कोंकी लड़ाई, घुसेवाजी । पश्चिम पर्वत श्रेणीके मध्यभागमें जो चतुर्भुजा देवीका मषकेश (म0पु0)१ चांदी या सोनेका एक विशिष्टरूप- मन्दिर है वह उन्होंके यलसे बनाया गया था। में कटा हुआ तार जिसे बादला कहते हैं । २ सुनहले या मुकुलक (सं० पु०) दन्तोवृक्ष । रुपाले सारोंका बना हुमा कपड़ा, ताश। मुकुलभट्ट-अभिधात्तिमातृकाके प्रणेता, कलटके पुत्र । मुक्कशी ( म०वि०) १ वादलेका बना हुआ। २ जरी या रतकण्ठने इनका नामोल्लेख किया है। ' ताशका बना हुआ। मलान (सं० क्लो०) प्राचीनकालका एक प्रकारका अस्त्र। मुक्कशी गोखरू (हिं० पु०) एक प्रकारका महीन गोखरू इसका आकार फलीको. आकृति-सा होता था। है जो तारोंको मोड कर बनाया जाता है।