पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८३३

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पुगत ७१३ वावरशाहको अद्भुत प्रतिमाने भारतमें जिस मुगल., ये सबके सब मुगल साम्राज्यरे मनःपतनके कारण साम्राज्यको स्थापनाका सूत्रपात किया, दुर्यल हुमायूके हुए। समयमें, उसमें यह प्रतिभा न रहने के कारण, उस इसके अलावा औरङ्गजेबफे उत्तराधिकारी कमजोर दिल. साम्राज्यका मानो मेरुदण्ड ही टूट गया। पीछे समदशी के निकले। शासन चलाने के लिये उन लोगोंको स्थायी . अकवरने एकतासूवमें भिन्न सम्प्रदार्योको प्रांघ मुगल और झगड़ाल मन्त्रियों पर निर्भर करना पड़ता था। साम्राज्यको पुनः प्रतिष्ठा की। उसका लड़का जहांगीर , प्रज्ञा विद्रोही हो स्वाधीनताकी चेष्टाम थी और मन्त्री महावत खां और शाहजादा ग्रैम (शाहजहां)के विद्रोहसे लोग अपना स्वार्थ साधने में लगे थे। इस दुरवस्थाम तंग तंग आ गया। फिर भी अपने पिता जीते जो हो। औरङ्गजेबके बाद मुगल शासन जाता रहा। औरङ्गजेय आदि शाहजादोंने राज्यलोभसे युद्ध किया। १७०७ ई-में औरङ्गजेवको मृत्यु के बाद शाहजादा औरङ्गजेब अपने भाइयोंके रक्तसे वसुधराको रेजित कर मुअज्जिम और उसके छोटे भाई अजीमफे बीच तकरार तथा अपने युद्ध पिताको कारागार भेज राजसिंहासन पैदा हुआ। मुनीम लाने मुमजिमका पक्ष लिया और पर बैठा । मुगल-राज्यमें मुसलमान सेनापति कृपा- दूसरे सेनापति अनीमके सहायक हुए । राजशासनको पान बनने की इच्छासे भिन्न भिन्न शाहजादो को खुशा- यह गड़यड़ी देख दिल्ली के लोग चिढ़ गये। मुमन्तिम मद किया करते थे । ये लोग उन्हें सिंहासन हस्तगत ! मधुरा भाग गया। ढोलपुर और मागरेके वीच दोनों करने के लिये उभाइते भी थे। उच्च पद और सम्मान पक्षमें घोर युद्ध हुआ। अजीम पेत रहा और मुस्लिम पानेको लालसा स्वभावतः उन्हें चञ्चल बना देती थी। यहादुर शाहकी उपाधि ले दिलोफे सिंहासन पर बैठा। फलतः शाहजादोंकी बगावत साधारण घात हो गई। मुनीमको 'सान्मानान्'-को उपाधि और मन्त्री-पर शाहजादोंका घोर विद्रोह ही मुगल-शक्तिको अधःपतनका मिला। वास्तविक कारण था। यहादुर शाह अपने पितामह शादशहाक जैसा बड़े शादजादों का विद्रोह, सिंहासनके उत्तराधिकारोका' भाडम्मरके साथ अपना दरयार लगाता था। निश्चित न रहना जिससे शासनमें व्यवस्थाका ' हिन्दुओंका मुसलमानों के प्रतिद्वप इसके पहले हो घरम- अभाव, शाहजादों का राजाशाका उलन करना, छोटे। सीमाको पहुंच चुका था। राजपूत, जाट और सिम्म छोटे सामन्तोंकी स्वतन्त्र होनेको चेष्टा और सेनापतियों- लोग मुगल साम्राज्यके विरुद्ध उठ खड़े हुए। उस को जागीरदारी भादि अनेक कारणोंसे मुगल साम्राज्य समय औरङ्गजेषका एक लडका कामवषस यीजापुरका को इतिश्री हुई। राजकर्मचारी लोग शासनाने यमजोरी शासक था। अपने भाईकी बढ़तोको यह न देख सका देख अपनी अपनो स्वार्थसिद्धिकी फिकमें रहते थे। और लहनेको तैयार हुभा । उसको पका सानेका इस सारो गढ़बड़ोमें मुगल साम्राज्यके नाशके वोज छिपे भार मुनीम सांको दिया गया। उस समय औरङ्गजेषका थे। औरहजेवको विचारहीनताने उस पीजको उगा दिया। पुराना सेनापति जुलफिकर मां दाक्षिणात्यमें था। धर्म विद्वेष और प्रजापोहनके कारण हिन्दू उससे घृणा | कामयपसको उससे शत्रुता घो। जुलहिकरने बाद करते थे। शफो बादशाहको पुढ़ापेमें भी शान्ति न | माहफे हुपमफे विना ही कामवयसको लडाईमें दरा बन्दी मिली। किसीफे प्रति उसको सहानुभूति न थी, मतपय कर लिया। उसो हालतमें कामयपसकी मृत्यु हुई। कोई उसका हितपो भी न था ! दाक्षिणात्य जीतने के लिये बादशाहकी कृपासे जुलफिकर मां दाक्षिणात्यका दोघे फाल-व्यापी युद्ध तथा उसमें धन और शक्तिका सूर्यदार हुआ। उस समय मुगलपनफे महाराष्ट्रफे क्षय, हिन्दुओंको स्वाधीनता प्राप्त करने की इच्छा, दाक्षि.! सेनापतियों के बीच मतान्तर हो गया। जुलफिसर णात्य में महाराष्ट्रपगारी नियाजीका अभ्युत्थान मोर और मुनीमणांने भिरा मिल्न पक्ष लिया। दामाद पावसे गुरुगोविन्दसिहफे नेतृत्वमें सिपमो का उत्धान' मुंह पर किसीकी प्रार्थनाको सम्वीकार नहीं कर