पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८३५

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मुगल ७४५ इशारेसे दाउद ग्वां उससे लड़ने की तैयार हुआ। युद्ध | उपाय न देख वह आत्मरक्षाके लिये १० हजार मराठी में दाउद खां मारा गया। सेना ले फर दिल्ली पहुंचा और अपने भाईको मदद पहुंचाने • इस समय सिपखाने फिर सर उठाया । मुगल के लिये भरक्षित राजधानो पर हमला कर दिया तथा उसे सेनापतिमे बड़ी निष्ठुरतासे दो हजार सिख सैनिकों को अपने कम्जेमे कर लिया। प्रासादको छत पर नगरको मार एक हजारसे अधिक अनुयायियों के साथ सिख महिलाओंसे घिरा हुआ बादशाह घंदी हुआ । यह गुय यन्दाको बन्दी किया। चंदा मुगलोंके हाथ मारा | कारागार मानो उसका फत्र ही था। यहां भी बादशाद गया। इस घटनाफे एक वर्ष याद मीरजुम्ला गटना छोड़ मुक्त होनेको आशासे परेदारों के साथ सैयद भाइयोंके राजधानीके पास आया। बादशाह हुसेन अलीके परा | विरद्ध पह यन्त्र रचने लगा। यंदी होने के तीन महीने बाद . मर्शानुमार दरवारमें उसका स्वागत न कर सकें। वहां विपक्षियोंका दिया हुआ विग्युन आहार खा कर बादशाह. तुरंत शासन-कार्यके लिये लाहोर. भेजा गया। ने अपनी मानवी लीला सम्बरण की। फरवगियर देशो। इधर सैयद भाइयों का प्रभाव जितना पढ़ता जाता सैयद भाइयोंने इस बीचमें रफि उस्पेन (पहादुर • था, उधर बादशाहको भी विलासिता उतनी ही अधिक शाहका लड़का )-फे सबसे छोटे लड़के रफिउद-दराजत पढ़ती जाती थी। राजकाज में थादशाहका जी जरा भी) को मयूरसिंहासन पर विठाया। उसको मैयद भाइयों. न लगता। और तो फ्या, प्रधान मन्त्रीको उमका दस्त के स्वेच्छाशासन पर निर्भर करना तथा फेवल नामका ग्यत लेना भी कठिन हो गया। राज्यको इस विशाल बादशाह रहना पसन्द न था । अतएव उसने अपने बारे दशामें, जिजिया कर फिरसे लगाया गया । हिन्दू कम| भाई रफि उद्दौलाके नामसे खुत्वा-पाठ और सिपका चारियोंसे परखारतगीको धमकी दिग्या हिसायका तलय चलानेका प्रस्ताय किया। नदनुसार रफि उद्दीला याद. किया गया । वादशाहने सैयद भाइयों के पंजों से छुटकार शाह हुआ। यह भी पुतली जैमा तीन महीने राजकाज पानेकी आशासे उठते हुए मराठों को उत्साहित करना चला इस लोकसे चल यमा। नदिनों हिन्दु शक्ति शुरू किया। इस आपसी विवादको कारण सभी जगद ! बढ़नी तथा मुगल-शक्ति क्षीण होती जाती थी। हिन्दुओका परामाम बढ़ गया और मुगल साम्राज्यका राजपूतराज जयमिह और अजिम्मिद व शकि. गौरव जाता रहा। शाली थे। ये लोग अपनी सेना ले दिलीके द्वार पर • मुसेन गलो बहुत दिन तक युद्ध करके भी मराठोंको। मा घटे। सैयद भाइयोंने उन लोगोंका फ्रोध शान्त करने. न दया सका, अन्तमें उसे सन्धि करनी पड़ी । इम के लिये जयसिंहको सुरतका तथा भजिन्मिएको 'सन्धिफे फलस्वरूप, मराठौको शिवाजीफे अधिकृत : यजमेर और अहमदाबादका शासन दे दिया। फलनः प्रदेशोंमें स्वतन्त्र राज्य तथा दाक्षिणात्यमें चौथ और ! उन लोगोंका राज्य भारत महासागर तक फैल गया। मराठे सरदेशमुखी उगाहनेका अधिकार मिला। इसके बदले उन लोग पहलेसे दो दाक्षिणात्यमें स्याधीन हो चुके थे। लोगेांने वादशाहको सालाना १० लाख रुपया और एक अय फेयल मागरेके पास-पासके स्थान ही मुगल बाद. हजार सेना भेज सहायता देना स्वीकार किया। शादफे शासनमें यम रहे। • सैयद भाइयोंके विपक्षियों को सलादसे वादशाह इस रफि-उद्दौलाको मृत्युफे बाद दोनों मैयद-भाई अपनी • घृणित प्रस्ताप पर उत्तेजित हो उठा। यह सैयदभाइयों को बनाई राह पर चलनेवाले एक शादजादेकी पोज में चले। असे उखाद सालने के लिये योधपुर के राजा अजिसिंह बहादुर शाहफे मबसे छोटे लड़फे गहान शाहवं. लह के साथ सम्मिलित मुगा । भवदुल्ला यां यानी रक्षाके सुलनान गेशन अवतरको उन्होंने गदम्मद नाद नाम • लिये सैन्यसंप्रद करने लगा। चञ्चर नित्त पादशाहको दिल्लीको राजगद्दी पर विटाया। अन्तिम गुगट-बाद- भाहासे हुसंग भली राजधानी युलाया गया । उसको इम । माहोंमें भादजदाफे मयूर रिहासन पर बैठनेका मौभाग पक्ष्यन्त्रका पहले ही धूमिल गया था। अतएय दूसरा पेपल इमीको प्राप्त दुभा गा। _Vol. XPII. 187