पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८३६

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मुगल इसी समय फारससे आये हुए सयादत् अली और । णात्यमें नासिरजंगका शासन, राजमाता कुसिया तुर्क चिनालिज खांका प्रभाव दिल्ली दरवार में जम गया। येगम ( उदमदाई) के प्रियपात्र खोजा जाविद खांका घे लोग अपने अपने दलके सरदार थे। बादशाहने उन प्रभुत्व, जाविद-हत्या, सिया और सुशी दलोंमें विरोध, लोगों की सहायतासे सैयद भाइयोंको शक्ति नए कर अपनी विलासिता तथा मुगल साम्राज्यको नष्ट करने डाली। वाली मराठा और जाट-शक्तिका उत्थान आदि पकके पतनसे दूसरेका उत्थान हुआ। थाढावासी अनेक कारणों से वादशाद घबड़ा उठा और शासन न सैयद भाइयोंका शक्ति हास तो हुआ लेकिन तुरानी और चला सका। मन्त्रियोंने यड्यन्त्र कर उसको गहोसे इरानी दो सरदारोंको शक्ति बढ़ गई। मरहठे लोग इस उतार दिया तथा सलीमगढके कारागारमें उसे बन्दी समय सर उठाये खड़े थे। उन लोगोंसे चिन्। रखा । दुष्ट द्रोहियोंने उसको दोनों आखें निकलवा लो। ' किलिजने हार कर मालवा राज्य छोड़ दिया और राज. तैमूरवंशीय अन्तिम बादशाहोंमें यही कुछ कुछ साम्राज्य. पवारसे कुछ कर देना भी स्वीकार किया। अब शाही. सुखका भोग कर सका था। इसके बाद जो मुगल-बाद- शासनमें उसका भी प्रभाव घट गया। कारण, उस | शाह गद्दी पर बैठे वे सब मरहठों या अगरेजी कम्पनीके समय दौरान खां सर्वेसर्या हो रहा था। खिलौनेमात्र हुए। अहमदशाह, नाशिरगंज और सफदरजंग चिकिलिजने अपने सम्मानको रक्षाके लिये सयाआदि शब्द देखो। दत्से सलाह ले फारसके राजा नादिरशाहको खुला १७५४ ई०में अहमदशाहको कारागार भेज मन्त्री भेजा। उस समय सरहदको यात ले कर दिल्ली सरकार | लोगोंने जहान्दारके ( अनूप वाईके गर्भसे उत्पन्न ) छोरे और नादिरशाहके वीच तकरार चल रहा था। १७३८) लड़के गज़ीज उद्दीनको २य आलमगीरके नामसे सिंहा. ईमें नादिरशाह भारत आया। सयादत् युद्धके बहानेसे सन पर बिठाया । इसके राज्यकालमें अराजकतासे आगे बढ़ा। उसकी सहायताम पां दौरान दौड़ा लाभ उठा। १७५८ ई०में अह्मद अबदालीने दूसरी बार और युद्ध में मारा गया। इसके बाद सयावत् अलीको । भारत पर चढ़ाई को । महमदशाह देखो। । मृत्यु हुई। यहो अयोध्याके वजीरवंशका प्रतिष्ठाता १७५६ ईमें श्य आलमग़ोर गुप्तरूपसे मारा गया । था। अयोध्या और सयादत् भती देखो। और औरंगजेयके लड़के कामवसका पोता महि उल चिफिलिज्ने सन्धिका प्रस्ताय किया। नादिर सुन्नत 'श्य शाहजहां' नाम धारण कर दिल्लीके सिंहासन शाहने उसको उपेक्षा कर दिल्लीमें प्रवेश किया। यह ८ पर बैठा। केवल कुछ महीने ही इसका राज्य रहा। करोड रुपया और मयूरसिंहासन ले कर अपने देश लौट उन दिनों मन्त्री लोगोंको यदमाशीसे दिल्ली में अराजकता . गया। नादिरशाह देखो। अत्यन्त बढ़ गई और इसलिये २य शाहजहांके राज्य. ' १७४५ ई० में रोहिलखंड तथा बंगाल, विहार और | फालको इतिहासमें स्थान नहीं दिया गया है। इस उड़ीसाके शासक लोग तथा हैदराबादमें निजाम नामसे | समय सदाशिव भाउ द्वारा चलाया गया पानीपतका युद्ध चिकिलिज स्वाधीनताके साथ राजकाज चलाने लगे। समाप्त हुआ। गाउ साहयको बुद्धिके दोपसे महा- इसके बाद हो दुर्रानी सरदार अहमद शाह अबदाली | • राष्ट्र साम्राज्यका स्थापन दुष्कर हो गया। पानीपतको हिन्दुस्तान लूटने आया । १७४८ ई०में युद्ध के बाद भागते । लड़ाई में मराठे नष्ट भ्रष्ट हो गये तथा हिन्दूजातिको आशा समय वजीर कमबहीनको मृत्यु हुई। भाईके वियोग- पर पानी फेर गया। शोकसे वादशाहका स्वास्थ्य खराब हो गया। उसो वर्ष । १७४० ईमें मराठोंने दिली लूटा। मरहठा-सेना- १६वीं अप्रिलको बादशाहकी मृत्यु होने पर उसका लड़का पतिने अकर्मण्य २य शाहजहाँको राजगदीसे उतार श्य महम्मदगाह सिंहासन पर बैठा। इस समय रोहिला- आलमगीरके लड़के अलो गौहरको बादशाह बनाया। . . युद्ध, सफदरजंग और निजामपुत्रका विद्रोह, दाक्षि-| उस समय अलो गौहर बंगालमें बैठ अपने भाग्यको ,