पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८४५

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मुङ्ग लो-मुचुकुन्द शासनकर्ता रामनारायण और बड्डालके डिपटी गवर्नर २ उक्त तहसीलका एक शहर । यह अक्षा० २२ राय दुर्लभको गलेमें कलसी बांध कर गङ्गामें | ४३० तथा देशा० ८१४१ पू० मागर नदीके किनारे दुवा दिया था, दुर्ग सन्निहित उस स्थानको आज भी | बिलासपुर शहरसे ३१ मोल पश्चिममें अवस्थित है। लोग उंगलीसे दिखाते हैं तथा जिस स्थान पर राज इसके तीन ओर गागर नदी रहने के कारण वाणिज्य. चल्लभ 'हा राम' कहते कहते गङ्गामें गिरे थे, उस स्थानमें | व्यवसायमें बड़ी उन्नति है । शहरमें सरकारी अस्- आज भी उस शोकसूचक घटनाको हृदयविदारिणी प्रति- पनाल, एक व फ्युलर मिडिल और एक वालिका ध्वनि अतीत दुःखस्मृतिको उद्दीपित करतो है। अलावा स्कूल है। इसके मोरकासिमने यहां और भी कितने आदमोको मुङ्गोलीग्यालियरराज्यके इलागढ़ जिलेका एक सदर । जलम दुया कर मार डाला था। उनमेंसे वङ्गालके यह अक्षा० २४ २५ उ० तथा देशा० ७८८ पू०के मध्य धनकुयेर सुविख्यात जगत्सेठ दोनों भाइयों की हत्या हो | येतवा नदीके किनारे अवस्थित है। जनसंख्या ५ हजार- लोमहर्पण है । इसमें राय रायां राजा उमेदसिंह, युनियाद- के करीव है। १८०४ ई०में म्युनिस्पलिटो स्थापित सिंह, फतेसिंह मादि तथा कितने अंगरेजोंको भी मीर- | हुई है। सरकारी अदालतके अलावा एक स्कूल, एक कासिमने गंगामें डुबा हुवा कर अपनी नृशंसताका परि- कारागार, एक अस्पताल और स्टेट-साकघर है। चय दिया था। मुचंगढ़ (हि० वि०) मोटा और भहा। ___ अंगरेजी शासनकालसे ही इतिहासमें मुङ्गरको मुचक (सं० पु०) लाक्षा, लाख्न । प्रसिद्धि देखी जाती है। मुचकुन्द (सं० पु०) स्वनामख्यात पुष्पं वृक्ष । मुचुकुन्द देखो। मुङ्गको सीताकुण्ड और रामकुण्ड नामक दो गरम मुचलका (तु० पु० ) एक प्रकारका प्रतिज्ञापत्र । इसके सोते हिन्दू तोध माने जाते हैं। सीताकुपट शब्द देखा। द्वारा भविष्यमें कोई काम, खास कर अनुचित काम न - मुरफे कमान-दन्दूकफे कारखाने में अभी तरह तरह करने अथया किसो खास शर्त पर कचहरी में हाजिर के देशो अस्त्र शस्त्र बनते हैं। अलाया इसके यहाँका होने को प्रतिक्षा करता है और कहता है, कि यदि मुझसे हाथी दांतसे मढ़ा हुआ सुन्दर मावलुस लकड़ोका वक्स, कोई अनुचित काम हो जायगा, अथवा मैं नियत समय उसको हालको छड़ी, लकड़ीका फलमदान, खिलौना, पर कचहरीमें हाजिर न होऊगा, तो मैं इतना आर्थिक पनवट्टा, अलमारो और खसका पंखा मशहर है। मुङ्गेरे- दण्ड दंगा। साधारणतः शान्तिरक्षाके लिये मुचलका 'फा लौहशिल्प एफ समय भारतविख्यात था, इसोसे लिया जाता है। इसका नाम भारतीय पम्मिंहम' रखा गया था। मुचिर ( सं० वि० ) मुञ्चति धनादिकं ददाति मुच ( इपि- ____शहरकी जनसंख्या ४० हजारफे करोव है जिसमें मदिखिदिछिदिभिदिमन्दीति । उण् ११५२) इति किरच । हिन्दूको संख्या ज्यादा है.। १८६४ ई० में म्युनिस्पलिटी, दाता, उदार । (पु० ) २ धर्म । ३ वायु । ४ देवता । स्थापित हुई है। इट इण्डियन रेलयेको लूप लाइनसे मुचिलिङ्ग (सं० पु० ) १ मुचकुन्दवृक्ष । २ तिलकक्ष, एक शाखा-लाइन निकल कर मुर शहर तक चली तिलपुष्पी । ३ एक नागका नाम । ४ एक पर्वतका नाम । आई है। यहांसे मुसाफिर स्टीमर द्वारा गङ्गा पार५ एक चक्रयत्ती का नाम। . करते हैं। मुचिलिन्द । सं० पु० ) १ मुचकुन्द । २ तिलक, तिल- मुरली-१ मध्यप्रदेशके विलासपुर जिलान्तर्गत एक पुप्पी। , . उपविभाग। यह अक्षा० २१.५३ से २२ ४० उ० तथा मुचुक (सं० पु० पु० ) मैनफलं।.. देशा०.८५१२ से ८२.२ पू०फे मध्य अवस्थित है। भू मुचुकुन्द ( पु०).मुच बाहुलकात् कु. मुचुकुन्द परिमाण १७६४ वर्गमोल और जनसंख्या प्रायः २५५०५४ | इयेति, राजदन्तादित्वात् पूर्वनिपातः ।..१.स्सनामख्यात है। इसमें १ शहर और ८७७ ग्राम लगते हैं। . पुष्पाक्ष | इसके पत्ते फालसेके पत्तोंसे मिलने