पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/९५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


महम्पद खां महा-महम्मद गयासुद्दीन होनेसे यह नगर समृद्धिशाली दिपाई देता है। नहर तथा किया। इसके बाद गुरासेनके मादारोंने दिमजाक • पको सड़क मास पासफे नगरमें स्थानीय याणिज्य- द्वितीय पुव अध्यासको १७६८०में परसिपाके राज ध्यकी आमदनी और रफ्तनी होती है। सिंहासन पर विठाया। .: मीर महम्मद खां तलपुर शाहबानीने मोर फते अली महम्मद खुदायन्द (सुल्तान)-परमियाफे एक रामा। • कि राजत्वकालके ये वर्ष इस नगरको बसाया था। चंगेज यांचंगधर अधुन खोफे पुत्र थे। १३०४०में मीर महम्मदको इसके चारों ओरके प्रदेश जागीरमें अपने भाई सुलान गजा खाके मरने पर ये परसियाफे मिले थे। विचिकाफे प्रादुर्भायसे यह मगर अनशन्य राजा हुए। हो गया था। १८१३ १०में मोर महम्मदको मृत्यु हुई। ये विशेष न्यायपरायण थे। परमियाफे राजामौर्म - मोर करमपां गौर गुलाम यांने यथाप्रामसे यहाँका शामन सबसे पहले इन्होंने हो भलीफे चलाये दुए मतका भनु. फिया । जिस समय अप्रेजोंने सिन्ध पर अधिकार किया सरण किया था । सर्वसाधारणको उक्त मतमें अपनी था उसी समय १८४३ ई०में मोर गुलामकी मृत्यु हुई। प्रगाढ भनि दिखाने के लिये इन्होंने अपने भामसे जो उनके पात्र मला यस मोरके पद पर अभिषिक्त हुए। सिका चलाया उस पर द्वादश मामका नाम पनि महम्मद सो लङ्गा-सुल्तानके चतुर्थ राजा, युवराज रहता था। इन्होंने मिमिया राज्यातगत सुल्तानिया फिरोदके पुत्र । १५०२ ६०में अपने पितामद हसन पो . गगरीको प्रतिष्ठा कर यहां अपनी राजधानी वसाई । इन- लड़ाके मरने पर महम्मद खां लगा राज्याधिकारी हुए। की मृतदेव इसो नगरफे दफगाई गई थी। मफपरके इन्होंने २३ वर्ष तक राज्य किया था। समार यावरने गुम्यजका ध्यासके गुम्बज ४५ फुट है।। महम्मदको मृत्युसे कुछ पहले १५२४ ई०में पापको जीत महम्मदगढ़-१ मध्य भारतयप में भूपाल पजेन्सीके भन्स- कर दिल्लीकी चढ़ाई कर दी थी। यहां पहुंच कर उन्हों गंत एक सामन्त राज्य । यद यिदिशा तयारोक्तिगट ने उट्टके शासनकर्ता हुसैन अघुनको फहला भेजा, कि ' बीचमें भयस्थित है। क्षेत्रफल २३ यर्गमील है। मस्तानका युद्ध-भार भाजसे तुम्हारे ही ऊपर सौंपा जाता यह स्थान पहले पुर्याई राज्यके अधीन था। कुर्याई । तदनुसार हुसैन अघु न भी काफी सेनाफे साप के भयाय महम्मद दलील यांफे मरने पर यह राम्य इनके सिन्धु नदी पार कर मुस्तान पहुचे। परन्तु इसके दो लड़कोंके बीच बंट गया। छोटे लइफे मासान . पहले ही महम्मद खाका स्वर्गवास हो चुका था। अनंतर भागमें महम्मयपुर भार वरसीदा नामक स्थान पड़ा । उनके लड़के श्य हुसेन लड़ाके तख्त पर बैठे। भासानके मरने पर उनका लका सौदाका और माद- महम्मद खां सरफुद्दोन मोगलू तफलदोरटफे एक मुसल.. मद मा महम्मदगढ़का मधिकारी दुमा। १८में मान शासक। इन्होंने तुमायूको पलायनकालमें विशेर सिगदफे राजाने इसका कुछ मशीन कर अपने सहायता दी थी। | राउपमें मिला लिया। परन्तु मंगरेज-राजन वीध पर 'महम्मद खुदावन्द (सुल्तान)-परसियाफे राजा रम शाह, कर उसे फिर लोरा दिया । यदाक नयाद पटानमाति . तहमाम्पफे ज्येष्ठ पुत। इतिहासमें ये सुल्तान सिकन्दर । अफगान है। राजाको उपाधि नयाप है। शाहनामसे विख्यात है। १५३१ में इनका जन्म २ उक्त राज्यका प्रधान नगर । पद मना० २३३८० -हुमा। १५६६ में भपने भाई द्वितीय शाह इस्लाम । मया देगा०७४ १२ १०.मध्य विस्तृत है। यहां मफोम मरने पर ये परसियाफे सिंहासन पर बेठे। न्द तपा मन्यान्य गमाझा जोरों कारदार पटना। कम सूझता था इसलिये इनका बड़ा लड़का हेमा महम्मद गयासुदीन-लएनऊ मगरके एक प्रसिद्ध मामि. मिर्जा पिताका प्रतिनिधि हो कर रासकार्य चलाने लगा। पानिक। हनि १४ वर्ष कठिन परिभर करके १८२६ पिताको मायके वाद राज्यमें विगलता उपस्थित में पर रटा कोप नैयार किया। इस मिया पनि दुई। इसी समय किसी गुमयरने इनका काम तमाम मिफ्ना उल् अनुन', 'सार सिमरामामा' पा