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पृष्ठ:हिन्दुस्थान के इतिहास की सरल कहानियां.pdf/१७९

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                २६-पानीपत की लड़ाई।
                     भाऊ की हार।

१- इस समय शाह की सेना तैयार हो गई। पलटने अपनी अपनी जगह पर खड़ी थीं। सेनापतियों को कई दिन पहले अपना अपना काम बता दिया गया। पृष्ठ १७४ पर लड़ाई का एक नकशा दिया हुआ है। १०० बरस से अधिक बीते जब यह नकशा काशीराव ब्राह्मण ने बनवाया था। काशीराव वहीं था और उसने सारी घटना देखी थी।

२-नकरो के पश्चिम अफ़ग़ान-सेना पूर्व की ओर मुंह

लिये खड़ी है। इसके तीन खण्ड हैं, मध्य भाग, दहिना अङ्क और बायाँ अङ्क। एक चौधा खण्ड सब के पोछे है और इस खण्ड का नाम कोतल है।

३-दहिने अङ्ग में पठान सरदार रहमत खाँ की कमान में

सत्रह हजार रुहेले और एक बेग की कमान में ईरानी मध्य भाग में बीस हजार अफगान पैदल और सवार बली खाँ की कमान में थे जो शाह का प्रधान सेनापति था। बायें अङ्ग में पहिले शुजाउद्दौला की कमान में चार हज़ार पठान पैदल और सवार थे और उसी पांति में नजीबुद्दौला पन्द्रह हजार रुहेले लिये खड़ा था। वाई ओर कुछ दूर एक पठान सरदार पसन्द खाँ की कमान में पाँच हजार सवार थे। यह दूसरी कोतल थी।