सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:हिन्दुस्थान के इतिहास की सरल कहानियां.pdf/६९

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

बढ़ता गया और कुतुब ने उसे अपनी बेटी याद ही। कुतुब के भरने पर यही अलतमश दिल्ली का बादशाह हुआ। बेटियां थीं पर बह रजिया को सब से बढ़ कर जाता था। उसने उसे स्त्रियों के गुण सिखाये ही थे, पुरुषों के गुण भी सिता दिये ; वह शाहजादे को माति सिध्याई पढ़ाई गई। राज काज समऋती थी और पड़ना लिखना मानती थी। छोड़े पर चढ़ सकती थी और रजिया। तीर सलवार का काम जैसा उसके भाई जानते थे वैसाही यह भी जानती थी -रजिया बड़ी सुन्दरी थी। उस समय के एक पुराने लेखक ने लिखा है कि उसकी सुन्दरता देख कर बालियों का अनाज पक जाता था। वह हर बात को बधुत सोचती थी। किताबें पढ़ा करती थी, सब पर दया करती थी और उसका पाप और सारे दरबारी लोग उसको प्यार करते थे। ५-रजिया छोटी ही थी तब अलतमश को एक बड़ी सेना लेकर दक्षिण में राजपूतों से लड़ने के लिये दिल्ली छोड़ कर जाना पड़ा। अलतमश जानता था कि मुझे बहुत ।