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गान्धीवाद
 


ation BILL) पास कर दिया जाय, ताकि हिन्दुस्तानी समुद्र तट देशी जहाजों के लिए सुरक्षित होजाए।

(९) समस्त राजनीतिक बन्दियो को रिहा कर दिया जाय। इनमें वे शामिल नहीं हैं , जिन्हे हत्या करने तथा हत्या का प्रयत्न करने के अपराध मे सज़ा मिली है। समस्त राजनीतिक मुकदमे वापस ले लिए जायॅ। भारतीय दण्डविधान धारा १२४ (अ) तथा सन १८१८ के तीसरे रेग्यूलेशन को रद कर दिया जाय, और भारतीय निर्वासितो को स्वदेश वापस आने की आज्ञा दी जाय।

(१०) गुप्तचर पुलिस विभाग उठा दिया जाय अथवा उसको जनता के नियन्त्र्ण मे दे दिया जाय।

(११) आत्मरक्षा के लिए शस्त्र प्रयोग के निमित्त लाइसेंस दिये जायॅ और उन पर जनता का नियन्त्र्ण रहे।

गान्धीवाद--महात्मा गान्धी के सिद्धान्तो के लिए आज गान्धीवाद शब्द प्रचलित है। गान्धीवाद आव्यत्मिक होते हुए भी आधुनिक भारत का एक राजनीतिक सिद्धान्त है। गान्धीजी का यह 'वाद' आहिंसा के आधार पर स्थिर है। आहिंसा उसका मेरुदण्ड है। सदैव शान्तिमय साधनो पर ही वह ज़ोर देता है। सघर्ष को वह पसंद नही करता। सम्सत समस्याओं--सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक--को वह सहयोग तथ सामंजस्य के सिद्धांत के आधार पर हल करना चाहता है। गान्धीवाद का साधन अहिंसा और लक्ष्य सर्वोदय है। वह मानव-मात्र का हिताकाक्षी है, और उसके लिए वह सामाज मे प्रचलित वर्गों तथा सम्प्रदायो मे परस्पर सहयोग चाहता है। गान्धीवाद प्रत्येक देश की स्वाधीनता का समर्थक है और साथ ही वह अन्तर्राष्ट्रीयता का समर्थन करता है। परन्तु वह कार्लमार्क्स के वैज्ञानिक समाजवाद का विरोधी है। गान्धीवाद आर्थिक सम्स्या के हल के लिए, सामूहिक उद्योगवाद के स्थान पर वैयक्तिक उद्योग चरखा, खादी, ग्रामोद्योग तथा घरेलू-धन्धो के सगठन तथा प्रोत्साहन पर अधिक ज़ोर देता है। वह ज़मीनदारी प्राथा का नाश नहीं चाहता, और न देशी राज्यो तथा नरेशो का निष्कासन ही उसे पसंद है, किन्तु वह इन सत्ताधरयों को जनता के संरक्षक